समय रहते समझिए गुमसुम या अधिक शांत रहने वाले बच्चों के मनोभाव

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कई बच्चे आवश्यकता से अधिक शांत होते हैं, गुमसुम रहना पसंद करते हैं। इसलिए उनकी उदासी या खुशी के संकेतों को समझना चुनौतियों भरा हो सकता है ।

8 से लेकर 16 वर्ष तक बच्चों के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं और इस दौरान उनका मानसिक विकास भी तेजी से हो रहा होता है इसलिए एक मां की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। जी हां, उम्र का ये एक ऐसा पड़ाव होता है जिसमें बच्चे प्राइवेट स्पेस ढूंढते हैं। उन्हें पैरेंट्स से ज्यादा अपने हमउम्र दोस्तों के साथ बैठना, बातें करना पसंद होता है ।

पहले की अपेक्षा आजकल बच्चों को समझना और भी मुश्किल हो गया है । चूंकि अब के समय में कोई भी पैरेंट एक से अधिक बच्चा नहीं चाहते इसलिए अपने इकलौते संतान को वो हर खुशी देने की पुरजोर कोशिश करते हैं ।

इसतरह बच्चों में कमी सहने या अपनी जरुरतों के लिए ना शब्द सुनने की आदत नहीं रह जाती है । इसतरह बच्चों में अपने मन मर्जी के मुताबिक सभी चीजों के मिलने से उनमें निराशा, या हार को झेलने की सहनशक्ति कम होती जाती है ।

यूं तो हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है लेकिन कई बच्चे आवश्यकता से अधिक शांत होते हैं, गुमसुम रहना पसंद करते हैं। इसलिए उनकी उदासी या खुशी के संकेतों को समझना चुनौतियों भरा हो सकता है ।

उनके मन में क्या चल रहा है ये पता करना कठिन है फिर भी आपको उनकी कुंठाओं का निदान समय रहते ही करना होगा ताकि वो मानसिक रुप से स्थिर और कॉन्फिडेंट महसूस करें ।

उम्र से पहले ही मैच्योर हो रहे हैं बच्चे

src=https://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2017/10/good habits.jpg समय रहते समझिए गुमसुम या अधिक शांत रहने वाले बच्चों के मनोभाव

एक मिनट के लिए आप अपना बचपन याद करिए जब आप 8 या 9 वर्ष की थीं तो आपके मन में क्या चल रहा होता था...मुझे यकीन है कि उस वक्त आपकी समझ आपके आसपास की परिस्थिति और आपके पैरेंट्स के दिशानिर्देशों के ईर्द-गिर्द घुमा करती होगी या हो सकता है कि दोस्तों के व्यवहार और उनके लाईफस्टाईल का असर आपकी सोच को प्रभावित करती हो ।

लेकिन अब के बच्चों की सोच बहुत वृहत हो चुकी है । लेटेस्ट टेक्नोलोजी, रिलेशनशिप अफैयर से लेकर सेक्स या लव मेकिंग जैसी कोई भी बातें उनके चंचल मन से परे नहीं है । टीवी , इंटरनेट के साथ उनके अटूट संबंधों ने उन्हें हर अच्छे-बुरे खबरों और कहानियों से असमय ही जोड़ रखा है । जिसका असर उनके सोच पर पड़ना लाज़िमी है ।  

साथी को इम्प्रेस करने लिए कर जाते हैं गलतियां

नयी उम्र में बच्चे अपोज़िट सेक्स की तरह आकर्षित होते हैं और कई बार साथी को मनाने या इम्प्रेस करने के लिए अपना हाव-भाव, पहनावा अपने शौक बदलते हैं । आप सोच भी नहीं सकतीं कि आजकल चौथी पांचवीं कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की गॉसिप कितनी ऐडवांस और मैच्यौर  होती हैं । मेरी बातों पर ज़रा भी संदेह हो तो कभी किसी दूर के बच्चे या पड़ोस के बच्चों से घुल-मिल कर देखें । उनके मन को टटोलने का प्रयास करें ।  बढती उम्र में अपने बच्चे तो आपसे दूरी बनाने लगते हैं क्योंकि उनके मन में डर रहता है या ऐसी आशंका होती है कि आप उन्हें नहीं समझ सकते ।  

कई बच्चे अति संवेदनशील और सुसाइडल टेनडेंसी वाले होते हैं

जी हां भले ही ये तथ्य आपको परेशान करने वाली हो पर सत्य है । सामान्य व्यवहार वाले बच्चों में अगर अचानक कोई गंभीर बदलाव हो तो उन्हें समझने का प्रयास करना चाहिए । कई बार खुद से असंतुष्ट होकर बच्चे ऐन्जाइटी का शिकार हो जाते हैं । गुमसुम रहने वाले बच्चे बातें शेयर करने में कतराते हैं इसलिए उन्हें अकेला छोड़ना ठीक नहीं है । बच्चों के आत्मघाती कदम उठाने को लेकर आए दिन कई खबरें प्रकाशित होती हैं इसलिए आपको ये सोचना होगा कि बच्चों के मन के बोझ को कैसे हल्का किया जाए । अगर आपके बच्चे हॉस्टल या बोर्डिंग स्कूल में रहते हैं तो उन्हें भी अत्यधिक सावधानी पूर्वक समझने की जरुरत है ।

जानिए बड़े होते बच्चों के साथ कैसा बर्ताव करें

  • दोस्त बन कर उनकी गुत्थियों को सुलझाएं
  • अनावश्यक रुप से दबाब ना डालें
  • अच्छे रिजल्ट के लिए उनके साथ-साथ आप भी मेहनत करें
  • आपस में बेहतर संवाद स्थापित करें
  • बच्चे के करीबी दोस्तों से आप भी मिलती रहें

गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड जैसे कल्चर स्कूलों में खूब चलते हैं इसलिए आप उन्हें ऐसी बातें शेयर करने का मौका दें ताकि समय रहते आप उन्हें सही-गलत का पहचान करा सकें ।

उनके पर्सनालिटी में क्या खास है और क्या बुरा है ये जरुर बताएं ताकि वो और बेहतर बनने की कोशिश करें ।

अगर बात बेकाबू हो तो मनोवैज्ञानिक से सलाह लेने में हिचकिचाएं नहीं ।