श्वेता तिवारी के बेटे रेयांश ने कुछ इस तरह मनाया पहला जन्मदिन

श्वेता तिवारी का खूबसूरत अंदाज यह बयां कर रहा था कि उनके बेटे की पूर्ण विकसित पर्सनैलिटी होगी।

श्वेता तिवारी के बेटे रेयांश पिछले सप्ताह एक साल के हो गए और कहने की जरुरत नहीं है कि उनकी मां श्वेता तिवारी ने इस दिन को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

श्वेता तिवारी हमेशा से अपने बेटे की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करती रही हैं और अपने बेटे के पहले जन्मदिन पर उन्होंने कुछ ऐसा शेयर किया जिससे हर मां कनेक्ट करेगी।

एक साल के हुए श्वेता तिवारी के बेटे रेयांश

बहुत ही शानदार अंदाज में श्वेता तिवारी ने वादा किया कि वो अपने बेटे के हर जन्मदिन पर एक नई जगह जाएंगी।

 

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उनका ये भाव दिखाता है कि ऐसा करने से उनके बेटे को आसानी से याद रहेगा कि वो अब तक कितनी जगह घूम चुके हैं।

इस साल श्वेता तिवारी ने पवित्र स्थल वैष्णो देवी को अपने बेटे का पहला जन्मदिन मनाने के लिए चुना। हम निश्चित तौर पर बोल सकते हैं कि खुद देवी मां भी रेयांश को ढेर सारा आर्शीवाद दी होंगी।

टेलीविजन स्टार श्वेता तिवारी ने इंस्टाग्राम के जरिये एक प्यारा सा मैसेज अपने बेटे को दिया। उन्होंने लिखा कि मैंने फैसला किया है कि हर जन्मदिन पर मैं तुम्हें एक नई जगह, शहर या देश लेकर जाऊंगी। इस तरह से तुम्हारे कोमल मन में और भी सपने होंगे और तुम सपनों का पीछा करोगे क्योंकि तुम्हारी मां भी कम से कम घूमना कवर कर चुकी होगी।

 

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श्वेता तिवारी ने ये भी लिखा कि  मेरे Soul , मेरे बेटे रेयांश को पहला जन्मदिन मुबारक। रेयांश जब तुम साथ नहीं थे तब भी मुझे जिंदगी बिल्कुल पूर्ण और परफेक्ट नजर आती थी लेकिन ये तुम थे जिसके आने के बाद मुझे एहसास हुआ कि मुझे तुम्हारी कितनी जरुरत है और मेरी जिंदगी तुम्हें कितना चाहती थी। ये मुझे हमेशा दिलचस्प लगता है कि कैसे छोटे बच्चे घर में एक बड़ा स्थान बना सकते हैं। तुम मेरी जिंदगी बन गए हो रेयांश।

श्वेता का संकल्प कई माओं को नए लक्ष्य देता है। बाल विशेषज्ञों के अनुसार नई जगह दिखाने से बच्चों की जानकारी बढ़ती है और कई रिर्सच से पता चलता है कि जो बच्चे अधिक घूमते हैं उनकी पूर्ण रूप से विकसित पर्सनैलिटी होती है।

जानिए क्यों आपको भी श्वेता तिवारी की तरह अपने बच्चों के साथ घूमना चाहिए

 

  • दिमाग विकसित होता है: बच्चों पर अक्सर अपने आसपास के परिवेश का प्रभाव पड़ता है भले इसे समझने के लिए वो छोटे हों। नया जगह या नया चेहरा हमेशा उनके छोटे से दिमाग रोज एक ही चीज देखने से कहीं अधिक विकास करता है।
  • उन्हें सीखने और दिमाग से निकालना सिखाएं: आप सोचेंगे कि ये बयान एक दूसरे के ठीक उलट है। लेकिन सच्चाई ये है कि नए-नए अनुभव बच्चों को नई चीजें सिखाते हैं और उन्हें उनके कंफर्ट जोन से भी बाहर लेकर आते हैं। अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलेंगे और नई जगहों पर आसानी से खुद को ढाल लेंगे। ये कौशल उनमें धीरे-धीरे आगे जाकर आएगा।
  • बच्चों पर गहरा प्रभाव: कई स्टडी ये प्रूव करते हैं कि जो बच्चे अधिक घूमते हैं उनका दिमाग भी अधिक विकसित होता है। इसका असल में तीन-डायमेंशनल फायदा है जिसमें किताब पढ़ना भी शामिल है। बच्चों के लिए किताबें पढ़ना , उन्हें नई जगह लेकर जाना और नई जगहों के बारे में बातें करना बेहद जरुरी है।