श्रीदेवी के सौतेले बेटे अर्जुन कपूर अपनी सौतेली बहनों से कोई मतलब नहीं रखना चाहते

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अर्जुन कपूर पहले भी बोल चुके हैं कि उनका श्रीदेवी या सौतेली बहनों जान्ह्वी कपूर और खुशी कपूर से कोई रिश्ता नहीं है। अब उन्होंने खुलकर अपनी मां और बहन पर बात की है।

अर्जुन कपूर तब सिर्फ 11 साल के थे जब उनके पिता और प्रोड्यूसर बोनी कपूर ने उनकी मां को छोड़ एक्ट्रेस श्रीदेवी से शादी कर ली थी। उस समय इस विवादास्पद शादी के कारण कई लोगों ने श्रीदेवी को घर तोड़ने वाली औरत भी कहा था।

इस फैसले से दोनों बच्चे अर्जुन कपूर और उनकी छोटी बहन अंशुला कपूर पर गहरा असर पड़ा और परिवार ने भी श्रीदेवी को नहीं अपनाया। चूंकि उनकी मां अपने ससुराल वालों से अधिक नजदीक थी, वो 2012 में अपनी मृत्यु तक बच्चे और उनके साथ ही रही।

अर्जुन कपूर पहले भी बोल चुके हैं कि उनका श्रीदेवी या सौतेली बहनों जान्ह्वी कपूर और खुशी कपूर से कोई रिश्ता नहीं है। अब उन्होंने खुलकर अपनी मां और बहन पर बात की है।

 

 

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की और का एक्टर ने लीडिंग डेली से बातचीत के दौरान कहा कि “मैं इस सच्चाई को कैसे स्वीकार कर लूं कि वो ये सब देखने के लिए नहीं रही कि मैंने अपनी एक पहचान बना ली है। मैं एक घर को चलाता हूं और मैं बड़ा होकर वही बना हूं जो वो मुझे देखना चाहती थी। उन्होंने मेरे लिए त्याग किया लेकिन मुझे यहां आज आपके सामने बैठे देखना उन्हें सबसे ज्यादा खुशी देती।

काश कि मैं उस पोजिशन में तब होता कि उन्हें कह पाता कि आप मेरे ऊपर गर्व कर सकती हैं मां।  उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि मैं बिना किसी सहारे के पिछले पांच साल से अपनी जिंदगी जी रहा हूं। जब उनके पिता अपने नए परिवार के साथ खूबसूरत यादें सजा रहे थे तो उस वक्त उनकी बहन थी जो इस सदमे से निकलने में उनकी मदद की।

“अंशुला चट्टान की तरह मेरे साथ खड़ी रही”

अपने सबसे मजबूत सपोर्ट के बारे में बात करते हुए अर्जुन ने कहा कि वो कोई और नहीं उनकी छोटी बहन अंशुला थी।

 

 

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“मेरी बहन अंशुला मेरे साथ चट्टान की तरह खड़ी रही। वो मुझसे भी ज्यादा बुरे समय से गुजरी। वो मुझसे छोटी थी। मैं तो फिर भी 11 साल तक पिता के साथ घर में रहा और मां के साथ 25 साल समय बिता पाया लेकिन वो तब सिर्फ 20 साल की थी। आप सोच सकते हैं कि ऐसा बच्चा जिसके पिता 5 साल के बाद शारीरिक रूप से कभी आस पास ना हो और मां जो हमेशा साथ रहीं हो वो 20 साल की उम्र में दुनिया छोड़कर चली जाएं। आप ये मनोस्थिति समझ सकते हैं लेकिन वो मुझसे कहीं ज्यादा परिपक्व, अच्छी पढी-लिखी और ईमानदार है।“

सौतेली बहनों के साथ कोई रिश्ता नहीं

उन्होंने साथ ही ये भी साफ कर दिया कि भले उनका परिवार धीरे धीरे श्रीदेवी को अपना रहा हो लेकिन उनका श्रीदेवी या उनकी बेटियों जान्ह्वी और खुशी से कोई लेना देना नहीं है।

 

 

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अर्जुन कपूर ने कहा कि “हम असल में ना तो मिलते हैं और ना साथ वक्त बिताते हैं इसलिए इस रिश्ते का सही मायनों में कोई अस्तित्व नहीं रह जाता है।“

इस इंटरव्यू में अर्जुन कपूर ने अपने पिता की दूसरी शादी के बारे में जिक्र किया कि कैसे ये उनके और उनकी बहन के लिए सदमे की तरह था।

कैसे टूटी हुई शादियां बच्चों को प्रभावित करती है

दिल्ली की मनोविशेषज्ञ और सोशलिस्ट अनुजा कपूर का कहना है कि बच्चे ना सिर्फ पैरेंट्स के विवाद, पुनर्विवाह और तलाक के कारण फंस जाते हैं बल्कि कई बार उन्हें इसके गलत परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं। बच्चे एकल पैरेंट्स, सौतेले पैरेंट्स के आने से अपने माता या पिता को नहीं भूल सकते। इस तरह के केस में वो खुश नहीं रहते। ऐसे केस में बच्चों को लगता है कि असफल शादियां उनके पैरेंट्स के अलगाव और पुनर्विवाह से ज्यादा अच्छा है।

अनुजा कपूर के अनुसार ये पांच प्रभाव बच्चों पर पुनर्विवाह के पड़ते हैं

  • टूटे हुए परिवार के बच्चों को बॉन्डिंग बनाने में काफी समस्या होती है
  • इस वजह से वो कम कॉन्फिडेंस में होते हैं और नए दोस्त बनाना भी मुश्किल होता है।  
  • वो तनाव से जुड़ी समस्याओं का सामना करते हैं जैसे सर दर्द, बिस्तर गीला करना, पेट दर्द , बीमार रहना
  • खुद को तुच्छ समझना
  • स्कूल ना जाने की जिद करना

कैसे इस समस्या से निपटा जाए?

अनुजा कपूर का कहना है कि इस तरह के केस में लोगों को कम से कम 2 से 3 साल तलाक या मृत्यु के बाद इंतजार करना चाहिए और फिर डेट करना चाहिए और इसके बाद अगर आप शादी की योजना बना रहे हैं तो शादी से पहले बच्चों के साथ डेट पर जाएं और अच्छा वक्त बिताएं। जाने कि कैसे नए और सौतेले परिवार के साथ घुलना मिलना है। इस बात को समझे कि हनीमून पुनर्विवाह करने वाले कपल के लिए आखिरी में होता है ना कि ये शुरूआत होती है।

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Source: theindusparent