शिशु की पहली दिवाली को यादगार बनाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

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आपकी बिज़ी लाईफ और शिशु के बीच कुछ प्यार भरे लम्हों को रौशन करने के लिए हम लेकर आए हैं कुछ उपयोगी टिप्स...जिसे अपनाकर आप शिशु की पहली दिवाली सेलिब्रेशन को हमेशा के लिए यादगार और स्पेशल बना सकती हैं।

सभी पर्वों में सबसे खास, रौशनी के पर्व दीवाली के दस्तक देते ही जैसे घरों में रौनक आ जाती है। साफ-सफाई का काम पूरे चरम पर होता है और खुशियों से भरा हुआ हर घर जैसे अपने भीतर पूरा संसार समेटे होता है। इस दिन तरह तरह के पकवानों की खुशबु, हंसी-ठिठोलियों की गूंज और अपनों के साथ खुशियां बांटने के अनोखे आनंद में सभी मगन होते हैं।

रंगोलियों के इंद्रधनुषी रंग, दीवारों पर लगी जगमग लड़ियां माहौल में और भी खूबसूरती भर देता है। इन सब के बीच पूरे चमक धमक के साथ आप भी दीवाली पर अपने खास लुक में उत्साह और उमंग से हर आने जाने वालों का स्वागत करने वाली हैं।  

यूं तो दीवाली हर साल ही हमारे घर और हमारे अंतर्मन को जगमग कर जाती है पर कोई भी त्योहार यादगार तब बनता है जब उसमें कुछ नया, कुछ अलग हो रहा हो जिसे हम आने वाले हर उत्सव में याद करें।

आप भाग्यशाली हैं कि दीप के पर्व को विशेष रुप देने के लिए आपके घर खुशियों के नन्हे कदम पहले ही पड़ चुके हैं और ये दीवाली मां के रुप में आप पहली बार मनाने जा रही हैं। लेकिन क्या इतनी व्यस्तता भरे उत्सव की तैयारी में आप अपने शिशु को समय दे पा रही हैं…मुझे लगता है कि कहीं ना कहीं कुछ कटौती जरुर हो रही होगी ।

शिशु का विकास हर दिन हो रहा होता है और उनके व्यवहार में भी बदलाव आता जाता है इसलिए इस पल को आप खूब ऐन्जॉय कीजिए क्योंकि देखते ही देखते आपका नवज़ात शिशु बड़ा हो जाएगा और उसकी दुनिया फिर आपकी गोद तक ही सीमित नहीं रहेगी। इसलिए आपकी बिज़ी लाईफ और शिशु के बीच कुछ प्यार भरे लम्हों को रौशन करने के लिए हम लेकर आए हैं कुछ उपयोगी टिप्स…जिसे अपनाकर आप शिशु की पहली दिवाली सेलिब्रेशन को हमेशा के लिए यादगार और स्पेशल बना सकती हैं।

शिशु की दिनचर्या में ना करें कोई बदलाव

माना कि काफी काम बचा है अभी करने को लेकिन बेबी से बढ़कर कुछ भी नहीं होना चाहिए। अगर आप ही उसकी रुटीन फॉलो करती रही हैं तो दिवाली वाले दिन भी खुद से उसके नहाने-खाने या मालिश के टाईम टेबल का ध्यान रखें। किसी करीबी रिश्तेदार के साथ शिशु अगर कंफर्टेबल रहता हो तब ही उसकी मदद लें। फीड कराने की रुटीन को डिस्टर्ब ना करें।

अधिक शोर से दूर रखें

शिशु के स्वास्थ्य के लिए बम के धमाके जैसी ध्वनि अच्छी नहीं होती इसलिए बाहर की शोर से बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए खिड़की बंद रखें। अचानक से धमाकेदार आवाज़ सुन कर शिशु डर सकता है। इसके अलावा कोशिश करें कि जहां आतिशबाज़ियां हो रही हो वहां के प्रदूषण से शिशु दूर ही रहें।

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skeeze / Pixabay

आरामदायक कपड़े पहनाएं

छोटे से शिशु के लिए भी कई फैंसी व डिजाइनर कपड़े मिलते हैं लेकिन आप शिशु की सुविधा का भी ध्यान रखें। शुरुआती 3 माह तक शिशु कई घंटे तक सोते हैं इसलिए चुभने वाले कपड़े उनकी नींद में बी खलल डाल सकते हैं।

हर किसी के गोद में ना दें

शिशु को पालने में या मां की गोद में देख कर हर कोई उसे गोद में लेकर प्यार करना चाहता है लेकिन जिसके स्पर्श की आदत ना हो उसकी गोद में शिशु असहज महसूस करने लगते हैं और ज़ोर-ज़ोर से रोना शुरु कर देते हैं। इसलिए शिशु की सुविधा के लिए आपको थोड़ा कठोर तो बनना ही पड़ेगा।

शिशु के कमरे की सजावट

ऐसी रंग बिरंगी लाइट्स लगवाएं जिसकी रौशनी को देखकर आपका शिशु प्रफुल्लित हो जाए लेकिन ज़रा ध्यान से बिजली की तारों को हिफाज़त से छुपा दें। शिशु के कमरे में रंगोली बनाएं और उसपर आर्टिफिशियल लाइट्स से सजावट करें आपका बेबी आपकी कला को निहारता ही रहेगा। कई तरह के रंग बिरंगे तोरन या विंड चाइम्स भी बेबी को आकर्षित कर सकता है।

अगर शिशु क्रॉलिंग कर पा रहा हो तब तो आपको और भी सावधानी बर्तने की जरुरत है। फर्श को केमिकल फ्री रखें। शीशे के कटोरे में पानी रखकर, पेट्ल्स से सजाकर दीया रखना खुबसूरत लगता है लेकिन बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है।

  • दीवाली पर जलायी जाने वाली हर एक चीज़ बच्चे की पहुंच से दूर रखें
  • कभी भी बच्चे को अकेला ना छोड़ें
  • फुलझड़ियों के साथ बच्चे की तस्वीर लेते समय विशेष ध्यान रखें एक भी चिंगारी शिशु के कपड़े पर ना गिर जाए

इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए आप बेशक अपनी दीपावली धूम धाम से मना सकती हैं क्योंकि इस तरह आपका शिशु अऩावश्यक रुप से रो कर आपका मूड खराब नहीं करेगा और पूरे परिवार के साथ नन्हा सा ये सदस्य भी दिवाली के उमंग को महसूस कर सकेगा ।