“शादी के 17 साल बाद मेरे पति मुझे छोड़ना चाहते हैं क्योंकि मैं मोटी हूं”

सबकुछ इतना अच्छा चल रहा था कि कभी कभी मुझे खुद डर लग जाता था कि कहीं कुछ बुरा ना हो जाए। हमेशा डर रहता था कि कहीं किसी की नजर ना लग जाए।

ये कल की बात लगती है जब मेरी शादी हुई थी। जून की भीषण गर्मी का महीना था। मैं 22 साल की थी और मेरे पति 26 साल के। हमारा परिवार एक दूसरे को जानता था और यही हमारी पूरी जिंदगी साथ निभाने का पर्याप्त कारण था।

मैं शादी को लेकर पूरी तरह से कॉन्फिडेंट नहीं थी लेकिन सच्चाई यही थी कि मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। एक छोटे शहर से होने के कारण मेरी उम्र की हर लड़की निर्णय लेते समय यही सोचती है। मैं भी जैसे जिंदगी जैसे ले गई चलते गई। अपनी नई जिंदगी को लेकर मैं काफी एक्साइटेड थी।

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हमारी शुरूआत काफी अच्छी हुई। हम नए शहर में आए, नए लोगों से मिले, कुछ नए दोस्त बने और हम साथ में देश के कई जगहों में घूमे और साथ में काफी अच्छा वक्त गुजारा। हम काफी खुश थे और साथ ही हमारे परिवार वाले भी। मेरे ससुराल वाले भी मुझसे बेइंतहा प्यार करते थे, उन्हें मेरा खाना, व्यवहार सभी पसंद आया था। सच्चाई ये भी थी कि मैं परिवार में बड़ी आसानी से घुल मिल गई थी। वो अक्सर हमारे पास आते थे और मुझे इससे कोई समस्या नहीं थी बल्कि मैं उन दिनों को इंज्वॉय करती थी।

एक साल के बाद मैंने खुद का कुछ करने का सोचा और एक प्राइवेट इंस्टिट्यूट में इंग्लिश पढ़ाने लगी। नौकरी शुरू करने के बाद मुझे लगा कि मुझे जिंदगी में सबकुछ मिल गया। सबकुछ इतना अच्छा चल रहा था कि कभी कभी मुझे खुद डर लग जाता था कि कहीं कुछ बुरा ना हो जाए। हमेशा डर रहता था कि कहीं किसी की नजर ना लग जाए।

पहले बच्चे का जन्म तीन साल के बाद हुआ...

तीन साल के बाद ऐसा लगा जैसे चमत्कार हुआ हो। मेरे बड़े बेटे का जन्म हुआ और मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी दुनिया पूरी हो गई। मैं पूरी तरह मातृत्व को इंज्वॉय करने लगी। मैंने खुद पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया और मेरे पति की खुशी तो सातवें आसमान पर थी। मेरे घरवाले और ससुराल वाले काफी खुश थे। मुझे जैसी जिंदगी चाहिए थी मैं बिल्कुल वैसी जिंदगी जी रही थी।

जैसा कि हर नई मां के साथ होता मेरे साथ भी हुआ। मेरा वजन डिलिवरी के बाद काफी ज्यादा बढ़ गया था। चूंकि हम अलग शहर में रहते थे मुझे ये ध्यान देने का समय ही नहीं मिला की मेरा वजन काफी बड़ गया है। व्यायाम तो भूल जाइए।

सच बताऊं तो मैंने कभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। मैं वैसी इंसान नहीं हूं जिसके लिए बाह्य सुंदरता मायने रखती हो। मेरे लिए आंतकिक सुंदरता मायने रखती है। साफ दिल और आत्मा जरूरी होता है। इसलिए मैं सबकुछ भूलकर अपनी दुनिया में मस्त थी।

वहीं दूसरी तरफ मेरे पति इतने साल में बिल्कुल भी नहीं बदले हैं। वो बिल्कुल अपनी शादी के दिन जैसे ही लगते थे।  कई लोग मुझे कहते थे कि उनके जैसा पति मिलना सौभ्याग्य की बात है। मेरा चेहरा खुशी से चमक उठता था। लेकिन तब भी मुझे यही लगता था कि कहीं किसी की नजर ना लग जाए..

दूसरे बेबी के बाद मैंने काफी वजन बढ़ाया..

दूसरे बेबी के जन्म के बाद मेरी खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। इस बार मेरा वजन काफी ज्यादा बढ़ गया था।  इतना ज्यादा कि मैं खुद ही नकारात्मक सोचती थी कि मैं कैसी लगती थी।   

लेकिन मेरे आस पास लोग काफी खुश रहते थे और मेरे पति भी। मुझे लगा कि शायद मैं ज्यादा सोचती हूं। मुझे खुद को थोड़ा समय देना चाहिए। लेकिन तब मुझे बिल्कुल भी नहीं लगा था कि मेरा वजन इतना बड़ा मुद्दा बन जाएगा कि मेरी दुनिया तहस नहस हो जाएगी। 

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शुरूआत में मेरे पति मजाक में मुझे मोटी कहकर चिढ़ाते थे। मैंने इसपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि मैं खुद की दुनिया में व्यस्त रहती थी। शादी के सात साल के बाद मेरे बच्चे पांच साल और चार साल के थे। मैंने वापस काम पर लौटने का सोचा और इंस्टिट्यूट से संपर्क किया। खुशकिस्मती से उन्होंने मुझे वापस रखने का फैसला कर लिया।

बस फिर क्या था..मेरी जिंदगी तेज गति से आगे बढ़ने लगी। अगला आठ साल बिल्कुल जल्दी बीत गया। मेरे बच्चे स्कूल और पढ़ाई में व्यस्त रहते थे और मैं घर के काम और इंस्टिट्यूट में। मेरे पति का काम पर तनाव भरा समय चल रहा था, वो घर देर से आते थे लेकिन मुझे लगा इसमें चिंता करने वाली कोई बात नहीं है।

मेरा बड़ा बेटा दसवीं में था...

2016 में मेरा बेटा दसवीं कक्षा में पहुंच गया। उसके लिए ये महत्वपूर्ण साल था इसलिए मैंने अपने अपने क्लास कम कर दिए ताकि उसपर फोकस कर सकूं। मैं सिर्फ दो से पांच बाहर जाती थी और उसके बाद सीधे उसे कोचिंग क्लास से लाने चली जाती थी।

इन सब के बीच मैंने ध्यान दिया की मेरे पति के टूर और शहर से बाहर के ट्रिप बढ़ते जा रहे थे। मैं अक्सर उनसे पूछती थी तो वो कहते थे कि जैसे जैसे आगे बढ़ो जिम्मेदारियां बढ़ती हैं और वो उन्हें ना नहीं कह सकते। वो ये भी कहते थे कि उन्हें बुरा लगता है कि वो ज्यादा समय साथ नहीं बिता पाते। मैंने भी उनका विश्वास कर लिया।

कुछ महीनों बाद मैंने एक अजीब बात नोटिस की। उन्होंने मेरे बेटे की पढ़ाई में दिलचस्पी लेना छोड़ दिय़ा था जबकि वो अपने पापा से पढ़ना चाहता था। एक अच्छे इंजिनियरिंग कॉलेज से पढ़ने का अर्थ था अच्छा गणित होना और वो गणित पढ़ाने में मदद भी करते थे। शुरूआत में मुझे लगा कि शायद उनके पास समय की कमी है। इसके बाद मेरे बेटे की पहले टर्म के नंबर आए और वो किसी तरह पास हो पाया था।

इसके बाद मैं अपना धैर्य खो चुकी थी और उनके घर आते ही मैंने गुस्से में पूछा कि आप अभियुद्य को गणित पढ़ाने में मदद क्यों नहीं करते। उसे आपकी जरूरत है और आप उसकी मदद नहीं कर रहे हैं। अपने पिता से मदद लेने की बजाय वो बाहर कोचिंग पढ़ने जाता है। आप क्यों नहीं उसकी मदद करते?”

 

उन्होंने कुछ भी जवाब नहीं दिया। इसके बाद इस तरह के झगड़े रोज होने लगे। हम छोटी  छोटी बातों पर झगड़ जाते थे और खासकर अपने बेटे की पढ़ाई पर। वो भी झगड़ा करते थे और दरवाजा पटक कर थोड़ी देर के लिए बाहर चले जाते थे। धीरे धीरे उनका काम की वजह से देर से आना और भी बढ़ गया और साथ ही टूर भी।

बस बहुत हो गया..

मैं पूरी तरह से परेशान हो जाती थी। जब मुझे उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तो वो मेरे साथ नहीं थे। मुझे छोड़िए वो मेरे बेटे के साथ भी नहीं थे जब उन्हें अपने पापा की सबसे ज्यादा जरूरत थी। और आखिरकार एक दिन मैंने सोचा बस बहुत हुआ।

जैसे ही वो अपने काम से रात में वापस आए मैंने बरस पड़ी और पूछा कि आखिर क्या कारण है वो मुझमें और अपने बच्चों में दिलचस्पी खोते जा रहे हैं। वो पहले कुछ समय तक एक शब्द नहीं बोले और फिर मैं बार-बार लगातार उनसे यही सवाल पूछती रही। और उसके बाद उन्होंने कुछ ऐसा बोला कि मेरी पैरों तले जमीन खिसक गई।

उन्होंने कहा सच बताऊं सोनू, मैं तुमसे अब प्यार नहीं करता। मेरा मतलब है तुम खुद को देखो क्या हो गई हो? तुम कितनी खूबसूरत थी जब हमारी शादी हुई थी। अब तुम्हारा वजन बढ़ गया है। मुझे तुम्हें अपनी पत्नी बुलाने में भी शर्म आती है। तुम मुझे अब आकर्षक नहीं लगती हो।

मुझे विश्वास नहीं हो रहा था उन्होंने जो भी कहा। मैंने पूछा भी कि तुम क्या बोल रहे हो शिव, तुम ऐसा कैसे कह सकते हो कि मेरा वजन बढ़ गया। मेरा वजन इसलिए बढ़ा क्योंकि मैंने दो बच्चों को जन्म दिया। मैं उनके उपर ध्यान दिया है, उनकी पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दिया। मेरे पास समय नहीं था।

मैंने साथ ही ये भी कहा कि तुम मुझे उस समय क्यों कुछ नहीं बोले। मैं अब लगभग 40 की हूं। मुझे लगा कि तुम बहुत खुश होगे इसलिए मैंने भी कभी ध्यान नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि यही तो तुम्हारी समस्या है कि तुम चिंता नहीं करती। तुम अपनी चिंता नहीं करती। तुम नहीं चिंता करती कि लोग तुम्हारे बारे में क्या करते हैं। तुम बाकी महिलाओं की तरह तैयार नहीं होती।

मैं पूरी तरह से आश्चर्यचकित रह गई। सच बताऊं तो मैं एक साधारण पत्नी हूं जो मां भी है जो परिवार भी चलाती है। तुम क्या कर रहे हो? तुमने 17 साल में ये बात क्यों नहीं बताई? तुमने जब हमारा बेटा हुआ तो क्यों नहीं बताया? तुमने क्यों मेरा हौसला नहीं बढ़ाया ताकि मैं वजन कम कर सकूं? अब क्यों ? क्यों?”

उन्होंने कहा मैं तुम्हारे साथ कोई झगड़ा नहीं करना नहीं चाहता । मैंने निर्णय लिया कि मैं अब और रह सकता। मुझे तुम्हें अपनी पत्नी कहने में शर्म आती है। मैंने 1BHK भी ले लिया है जहां मैं रात में रुकता था ना कि टूर पर रहता है।

इसके बाद उन्होंने अपने ऑफिस बैग को उठाया और निकल गए।

मैं आज तक उनके लौटने का इंतजार कर रही हूं...

*इसे लिखने वाली शख्स का नाम और शहर नाम पहचान छिपाने की वजह से नहीं बताया गया है।

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Source: theindusparent