शादी के पहले वाली हनीमून ने बदल डाली उसकी जिंदगी...पढ़ें ये सच्ची कहानी

खैर, मेरी परिचित सोनाली के साथ जो हुआ वो किस्सा ज़रा हट कर है और आधुनिकता के नाम पर नई पीढ़ी की खोखली मानसिकता को सामने लाती है ।

आजकल प्री मैरिटल हनीमून का क्रेज हर कपल्स के सिर चढ़ कर बोल रहा है। हो भी क्यों ना, जब देश-दुनिया इतनी रफ्तार से आगे बढ़ रही है तो किसी भी बात का इंतज़ार करना भला किसे रास आता है ।

नई पीढ़ी को डिजिटल युग और रिमोट कंट्रोल की आदत ऐसी पड़ चुकी है कि उन्हें निर्धारित गति से चलनी वाली वाली रीति-रिवाजों, समाज की मानसिकता या मान्यताओं से कोई खास फर्क नहीं पड़ता । उन्हें अपने पार्टनर को करीब से जानने और बिना देरी किए उस पर अपना अधिपत्य जमाने की जल्दी रहती है ।

ये सही भी है कि युवा खुल कर जीने में यकींन करते हैं, अपनी हर आरज़ू पूरी करने के लिए पहल करना जानते हैं और समाज में यही एक बड़ा बदलाव लेकर आता है ।

चूंकि आमतौर पर कपल्स ये सारी प्लानिंग घर-परिवार वालों से छुपा कर करते हैं तो ऐसे में सवाल ये उठता है कि बांकि बदलाव की तरह क्या कभी प्री मैरिटल हनीमून के कॉन्सेप्ट को स्वीकार किया जाना संभव होगा और क्या ये हमेशा पार्टनर के साथ एक बेहतरीन जिंदगी की बुनियाद दे सकता है...अफसोस इस मामले में मेरी एक सहेली के साथ कुछ उल्टा ही हो गया ।   

वो मना नहीं कर सकी और यही उसकी सबसे बड़ी भूल बन गई!  

सच्चे प्यार नाम का कोई इत्तेफाक़ हर किसी के साथ हो जाए ये ज़रुरी तो नहीं। नई उम्र में हर लड़की अपना एक साथी चाहती है जिसके साथ वो घंटों बातें कर सके, जिसके लिए वो ख़ास अपनापन महसूस कर सके और जिसके लिए सारे बंधन तोड़ने को दिल मज़बूर हो जाए ।

सच्चे प्यार की तलाश में कई बार निगाहें धोखा खा जाती हैं तो कई बार दिल को टूटना पड़ता है और हमें ऐहसास तब होता है जब इस अनजान सफर में हम कोसों दूर निकल गए होते हैं...ये सारी बातें आपको दार्शनिक भले ही लग रही हो पर सच इसके ईर्द-गिर्द ही है ।

खैर, मेरी परिचित सोनाली के साथ जो हुआ वो किस्सा ज़रा हट कर है और आधुनिकता के नाम पर नई पीढ़ी की खोखली मानसिकता को सामने लाती है ।

दरअसल सोनाली एक मिडिल क्लास लड़की है जो शिक्षित है और कामकाज़ी भी । हाई-स्कूल व कॉलेज के दिनों में भी उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं बन सका था, उसके औसत लुक्स, मध्यम वर्गीय रहन-सहन के अलावा कारण चाहे जो भी हो पर उसकी तलाश कभी पूरी ना हो सकी थी ।

वक्त बीतता गया...अब सोनाली एक अच्छे सेक्टर में काम करती थी। माता-पिता ने उसके लिए रिश्ते देखने शुरु कर दिए और भला उसे ऐतराज़ होता भी क्यों ! आनन-फानन में अच्छा घर-वर मिलते ही परिवारों का मेल-मिलाप हो गया और शादी तय कर दी गई ।

बड़े शहर में पले-बढ़े होने के नाते ज़ाहिर है लड़का सोनाली से अधिक आधुनिक विचारों वाला था पर सोनाली को उसका हर एक ख्याल पसंद आने लगा था । घर में शादी का माहौल 6 महीने पहले से ही दिखने लगा था । इस बीच नए प्रेमी युगलों के बीच बातचीत बढ़ने लगी । घर वाले तो शादी से जुड़ी तैयारियों के लिए 6 महीने को भी कम समझ रहे थे पर नए कपल्स के लिए तो एक-एक दिन काटना मुश्किल हो रहा था ।

कई कसमें वादों के बाद दोनों ने मिलने की ठानी और वो भी शादी के पहले इन लम्हों को यादगार बनाने के लिए वो किसी अनजान जगह मिलना चाहते थे...भविष्य को लेकर कई रणनीतियां बनानी थी, एक-दूसरे के तौर-तरीके को समझना भी था...इसलिए सोनाली ने सोचा कि वैसे भी शादी तो इसी इंसान से करनी है तो कुछ पल साथ रहने में क्या बुराई है ।

उसे भी अपने होने वाले पति से प्रेम हो चुका था...

उसके फैसले पर उसका दिल हावी था क्योंकि उसे भी अपने होने वाले पति से प्रेम हो चुका था । खैर, वो दफ्तर के काम का बहाना बना उसके शहर पहुंची । उसके दोस्तों से मिलना हुआ, प्री वेडिंग फोटोग्राफी भी हुई, पार्टी हुई और कुछ शॉपिंग भी गिफ्ट के तौर पर । सोनाली अपने मंगेतर के साथ बहुत खुश थी । उन दोनों ने साथ-मिल कर मिलन के हर एक पल को भरपूर जिया ।

लेकिन ट्रिप से वापस आने के बाद अचानक लड़के के व्यवहार में परिवर्तन आने लगा, उसे बात-बात पर शंका होने लगी । और वो ये मानने को तैयार ही नहीं था कि सोनाली का पहले से कोई अफेयर नहीं रहा था ।

वो मिलने की बात पर उसकी रज़ामंदी को लेकर उसे ताने देने लगा ।आपसी लड़ाई में बात इतनी बिगड़ गई कि परिवार वालों को भी ख़बर हो गई और एक दिन लड़के वालों ने अचानक से शादी से इंकार कर दिया...।

अब आप सोनाली के ऊपर टूटे मुसीबतों के पहाड़ का अंदाज़ा लगा सकती हैं...उसे इस मोड़ पर कोई धोखा दे जाऐगा ऐसा उसने सपने में भी नहीं सोचा था ।

आपको क्या लगता है...ये गलती किसकी थी...क्या प्री वेडिंग हनीमून मनाने का आईडिया गलत था या लड़के  की सोच...!!