लेबर के दौरान दर्द कम करने के 10 असरदार तरीके

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दर्द से राहत देने के कई तरीकों से लेबर बनाया जा सकता है आसान

 

किसी भी युगल के लिए अभिभावक बनना सबसे बेहतरीन अनुभव होता है। आखिरकार आप खुशियों की चाबी को अपने घर लेकर आ रहे हैं। लेकिन प्रसव का वास्‍तविक अनुभव इन सभी से बिल्‍कुल अलग होता है। जबकि कुछ गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव बहुत दर्दनाक हो सकता है जबकि अन्‍य के लिए यह बहुत आरामदायक हो सकता है।

इसलिए अगर आप पहले ही अपने प्रसव की योजना को अंतिम रूप दे चुकी हैं तो आपके लिए यह अच्‍छी बात है। हम यही कहेंगे कि आप सही दिशा में हैं। लेकिन अगर अभी तक आपने इस बारे में कुछ भी नहीं सोचा है, तो आप इसे पढ़ें। दिल्‍ली स्थित ई- साइक्लिनिक डॉट कॉम (ePsyClinic.com) की गाइनेकोलॉजिस्‍ट डॉ. प्रियंका मेहता बता रही हैं 10 ऐसे तरीके , जो आपकी प्रसव पीड़ा कम कर सकते हैं।

 

 

अरोमाथेरेपी

अरोमाथेरेपी एक पूरक थेरेपी है, जिसमें इसेंशियल ऑयल्‍स का इस्‍तेमाल किया जाता है। ये सुगंधित तेल पौधों से प्राप्त सत्वों से तैयार किए जाते हैं।

डॉ. मेहता बताती हैं, ‘कुछ इसेंशियल ऑयल्‍स जैसे कि ब्‍लैक पैपर और लैवेंडर में ऐसे रसायन होते हैं, जो दर्द निवारक का काम करते हैं। इनका प्रभाव शरीर पर पड़े इसके लिए जरूरी है आप प्रसव से कई सप्‍ताह पहले से ही इन ऑयल्‍स से नियमित मालिश करवाना शुरू कर दें। शोध से पता चला है कि नियमित मालिश या अरोमाथेरेपी से प्रसव पीड़ा कम करने में मदद मिलेगी।

फ्रैंकिंसेंस एक बेहद उत्‍कृष्‍ट काल्मिंग ऑयल है और प्रसव के पहले चरण की समाप्ति में काफी उपयोगी साबित होता है।

 

हिप्‍नोथेरेपी

जब कोई महिला हिप्‍नोसिस के साथ प्रसव की तैयारी करती है, तो इसका उद्देश्‍य डर व दर्द की आशंका के बजाय सुरक्षित, सौम्‍य और सहज प्रसव की उम्‍मीद देना होता है। डॉ. मेहता कहती हैं, ‘‘महिलाएं हिप्‍नोटिक सुझावों पर इतनी अच्‍छी प्रतिक्रिया दे सकती हैं कि प्रसव के दौरान उनके शरीर से ‘ अच्‍छा महसूस करने वाले’ हॉर्मोन जैसे एंडोरफिंस और सेरोटोनिन निकलते हैं। इससे मां की मांसपेशियां और तंत्रिका तंत्र को इतना आराम मिलता है कि उसे कम दर्द महसूस होता है या फिर जरा भी दर्द महसूस नहीं होता है।’’

 

जगह और गतिविधियां

गर्भवती महिला को नियमित तौर पर चलना, सैर करना या फिर आगे की ओर झुकना चाहिए। इस तरह की गतिविधियों से प्रसव प्रक्रिया बहुत आसान हो जाती है और साथ ही शिशु के लिए भी बर्थिंग कैनल तक आना आसान होता है।

इन गतिविधियों का एक और फायदा होता है कि इससे महिला को प्रसव की शक्ति मिलती है। एक करवट पर लेटने और पीठ को तकिए का सपोर्ट देने से आपके शरीर पर सुकूनदायक प्रभाव पड़ेगा और आपके शरीर की ऊर्जा भी संरक्षित की जा सकेगी।

 

टीईएनएस मशीन

टीईएनएस का मतलब है ट्रांसक्‍यूटेनियस इलेक्ट्रिकल नर्व स्टिम्‍यूलेशन। गर्भावस्‍था के शुरूआती चरण में यह सबसे ज्‍यादा प्रभावी होता है, जब ज्‍यादातर महिलाएं पीठ के निचले हिस्‍से में दर्द की शिकायत करती हैं।

डॉ. मेहता कहती हैं, ‘‘इसमें इलेक्‍ट्रोड को पीठ पर लगाकर उसे तारों के जरिये छोटे से स्टिम्‍युलेटर से जोड़ा जाता है, जो बैटरी से चलता है। गर्भवती महिला टीईएनएस का इस्‍तेमाल करते हुए चल- फिर भी सकती है। इसके अतिरिक्‍त इसका मां या शिशु पर कोई नकारात्‍मक प्रभाव नहीं पड़ता है।’’

 

पानी के नीचे प्रसव

गुनगुने गर्म पानी में प्रसव से महिला को आराम मिल सकता है और पेट में होने वाले संकुचन ज्‍यादा सहनीय हो जाते हैं। इससे कुछ ऐसी ही राहत मिलती है, जैसे पेट या पीठ दर्द की स्थिति में गर्म पानी से नहाने पर। ध्‍यान रहे कि पानी का तापमान सहज स्‍तर पर रहे और किसी भी स्थिति में 37.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होना चाहिए।

बर्थ पूल का इस्‍तेमाल करने से आपके प्रसव का पहला चरण छोटा हो जाएगा और आपको दर्द से निजात पाने में मदद मिलेगी। डॉ. मेहता कहती हैं, ‘‘शोध में सामने आया है कि जो महिलाएं प्रसव का कुछ समय पानी में बिताती हैं उन्‍हें प्रसव के दौरान एपिड्यूरल लेने की जरूरत उन महिलाओं के मुकाबले कम पड़ती है, जो पूरा प्रसव बिस्‍तर पर बिताती हैं।’’

 

एक्‍यूप्रेशर

प्रसव में मां को आराम पहुंचाने और प्रसव सहजता से पूरा करने के लिए एक्‍यूप्रेशर का इस्‍तेमाल किया जा सकता है। अगर आप एक्‍यूप्रेशर लेने की योजना बना रही हैं तो इसका अभ्‍यास पहले ही शुरू कर दें। गर्भावस्‍था के 37वें सप्‍ताह तक शरीर के सभी बिंदु सुरक्षित होते हैं लेकिन वास्‍तविक प्रसव प्रक्रिया के दौरान कम दबाव प्रेशर देना चाहिए। डॉ. मेहता कहती हैं, ‘‘ जीवनसाथी से मालिश करने के लिए कहना भी काफी मददगार साबित हो सकता है, जबकि कुछ गर्भवती महिलाओं को इस स्थिति में किसी का भी स्‍पर्श पसंद नहीं होता है। लेकिन यह प्रक्रिया बहुत आरामदायक होती है।’’

लेबर पेन शुरू होने से पहले पांच मूल एक्‍यूप्रेशर बिंदुओं का इस्‍तेमाल करें :

  • पीठ के निचले हिस्‍से को राहत पहुंचाने के लिए रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर निचले बिंदुओं को दबाएं। प्रसव के शुरूआती संकुचन के दौरान पीठ के निचले हिस्‍सों को उंगलियों के पौर से जोर से दबाने को कहें।
  • गुर्दों को राहत के लिए तलवे के बीचों बीच अंगूठे की नस को दबाएं। पैर की एड़ी के पास दिए जाने वाले प्रेशर से शरीर को शांति मिलेगी।
  • मूत्राशय को राहत के लिए एड़ी के निचले हिस्‍से को दबाएं। ट्रांजिशनल प्रसव चरण से गुजर रही महिलाओं के लिए यह सबसे पसंदीदा बिंदु होता है। इस बिंदु पर दबाव से शरीर में रक्‍त प्रवाह बढ़ता है और शरीर का दर्द भी कम होता है।
  • स्‍पलीन को राहत के लिए पिंडली की के अंदरूनी हिस्‍से पर टिबियल हड्डी के साथ एड़ी से करीब चार उंगली ऊपर की ओर दबाएं। अटके हुए प्रसव में यह प्रक्रिया काफी प्रभावी होती है। इस समस्‍या के लिए दो एक्‍यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव देना बहुत फायदेमंद रहता है।
  • गर्भवती मां स्‍वयं ही बड़ी आंत पर दबाव डाल सकती है। जबकि प्रसव के दौरान उनकी साथ मौजूद व्‍यक्ति भी प्रभावी प्रसव के लिए इस पर दबाव डाल सकता है।

 

 

हॉट कंप्रेस

योनि में किसी भी प्रकार के तनाव को कम करने के लिए कई डॉक्‍टर हॉट कंप्रेस का इस्‍तेमाल करते हैं। बल्कि जब शिशु का सिर बाहर निकल रहा हो तो बेहद हॉट कंप्रेस को पेरिनियम (गुदा व अंडकोश के बीच का क्षेत्र) में लगाया जा सकता है। ऐसा योनि में हो रही जलन को कम करने और पेरिनियम को राहत देने के साथ ही रक्‍त प्रवाह बढ़ाने के लिए किया जाता है।

 

 

ऑक्‍सीजन या एंटोनॉक्‍स

यह ऑक्‍सीजन और नाइट्रस ऑक्‍साइड गैस का मिश्रण होता है। गैस और हवा पूरा दर्द नहीं कम करेंगी बल्कि वह इसे बहुत कम करने और सहनीय बनाने में मदद कर सकती हैं। कई महिलाओं को यह बहुत पसंद आता है क्‍योंकि इसे इस्‍तेमाल व नियंत्रित करना उनके लिए बहुत आसान होता है।

डॉ. मेहता कहती हैं, ‘‘गर्भवती मां मास्‍क के जरिये इसे अपनी सांस के साथ अंदर ले सकती हैं।’’ दिलचस्‍प है कि इसके गर्भवती मां और शिशु पर कोई नकारात्‍मक प्रभाव नहीं पड़ता है।

 

 

सांस लेने के व्‍यायाम करें

हर कॉन्‍ट्रेक्‍शन से पार पाने के लिए सांसों पर ध्‍यान देना बहुत मददगार साबित होता है। डॉ. मेहता बताती हैं, ‘‘जब गर्भवती मां सांस लेती है तो उसे ‘रिलैक्‍स’ शब्‍द को दो चरण में याद करना चाहिए। कॉन्‍ट्रेक्‍शन शुरू होने पर गहरी सांस अंदर लें और फिर ‘रि’ करने के बारे में सोचें। अब सांस बाहर छोड़ें और ‘लैक्‍स’ के बारे में सोचें और अपना तनाव दूर करें।’’

महिला को नाक से सांस अंदर लेनी और मुंह से बाहर छोड़नी चाहिए, इस दौरान मुंह को हल्‍का सा खुला रखें। सांस लेने की गहराई और अवधि बहुत मायने नहीं रखती है। वह बताती हैं, ‘जब कॉन्‍ट्रेक्‍शन पूरा हो जाए तो महिला को जितना मुमकिन हो सके उतना आराम करना चाहिए। नियंत्रित ढंग से सांस लेने से ऊर्जा संरक्षित करने में मदद मिलती है और दर्द कम करना आसान होता है।’

 

जन्‍म में साझेदार

अगर प्रसव के दौरान गर्भवती महिला के दौरान कोई ऐसा व्‍यक्ति हो, जो उसे सहज रहने में मदद कर सकता है तो प्रसव प्रक्रिया बहुत सहज व आसान हो जाती है। डॉ. मेहता कहती हैं, ‘‘अगर किसी गर्भवती महिला के साथ कोई सपोर्ट के लिए कोई है तो वह दर्द निवारक का कम इस्‍तेमाल करती है। अगर उनका जीवनसाथी उनके साथ हो तो कुल मिलाकर यह प्रसव अनुभव उनके लिए संतोषजनक रहता है।’’

वह कहती हैं कि महिलाओं को अपने साथ प्रसव के दौरान किसी को रखने पर जोर देना चाहिए। डॉ. मेहता कहती हैं, ‘‘ यह व्‍यक्ति आपके पति, कोई दोस्‍त या कोई संबंधी भी हो सकता है क्‍योंकि इससे प्रसव नतीजे पर काफी असर दिख सकता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्‍सेट्रेशियंस एंड गाइनेकोलॉजिस्‍ट जैसे अंतरराष्‍ट्रीय संगठन भी ऐसा करने की सलाह देते हैं।’’

 

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