Rude बच्चे को Control करने के 7 तरीके

क्या तुम होमवर्क करने के बाद खेलने नहीं जा सकते ? “चिल” मैं होमवर्क कर लूँगा ।   मैं ये हमेशा ही अपने घर में सुनती हूँ ।   ये मेरे 8 साल के बच्चे का जवाब है ।  एक मिनट बाद आप उसे ये बोलता हुआ पाएंगे “ओके ठीक है , मैं कर लूँगा अभी”।

एक माँ के हैसियत से मुझे गुस्सा आता है, दुःख होता है यहाँ तक की अपने पेरेंटिंग पर भी शक होने लगता है।   मै  उदास होकर बैठ जाती हूँ जो मुझे नहीं करना चाहिए ।

टीनेजर बनने से पहले बच्चों का पण खुद का दिमाग काफी विकसित होने लगता है ।   वो चीजों को अपनी तरह से देखने और समझने लगते हैं ।  ऐसा हमने भी किया है ।   लेकिन ये ज्यादा असर इन्टरनेट और उनके दोस्तों का होता है जो उन्हें अपने पेरेंट्स से इस तरह बात करवाता है । लेकिन चिंता मत करिए ये इतना भी बुरा नहीं है ।   आइये जानते हैं वो 7 टिप्स जिससे आप अपने गुस्सैल बच्चे को आसानी से समझा पाएंगे :

#1 उन्हें बताते रहें की आप अब भी उनके माता-पिता हैं ।

हो सकता है की बच्चे के दोस्त बन्ने की ये उनकी सही उम्र न हो ।   हो सकता है आपको आश्चर्य हो लेकिन ये हो सकता है की बच्चे इस स्टेज पर खुद ही कंफ्यूज हों और आपसे उम्मीद लगाए बैठें हों ।   अपनी सिचुएशन को हैंडल करने के लिए वो आपसे ही गुड़ सीखते हैं ।   मई ज्यादातर देखती हूँ की मेरी बेटी किसी दोस्त से बहस करते समय या सही को सही कहते समय बिलकुल मेरे जैसे लगती है ।   इसीलिए हमेशा ध्यान रखें की बच्चे आपका अनुसरण कर रहे हैं ।

#2 अपने मुद्दे चुन लें

एक माता पिता के तौर पर ये समय है अपनी अपनी लड़ाई खुद लड़ने का ।  हमारे घर में आजादी का माहौल है ।  मै अपने बच्चे को गलत नहीं करने दूंगी , उसे सही ही करने कहूँगी , अच्छे नंबर लाने को कहूँगी, कपडे गंदे नहीं करने को कहूँगी।   मैं  बिलकुल शांत स्वभाव से अपनी बात कहने की कोशिश करती हूँ ।   लेकिन कहने से कठिन है उसे करना ।   चाहे कितनी भी शांत रहने की कोशिश करें डिनर के टेबल पर बहस छिड़ ही जाती है ।

#3 सजा भी सुधरती रहनी चाहिए

स्टीकर और स्टार लगाना अब होमवर्क नहीं है ।  इसीलिए उन्हें अब सजा देना मेरे लिए स्ट्रगल की बात है ।  कुछ  बच्चों में सजा देने से बात बन जाती है तो कुछ बच्चों के साथ ऐसा नहीं होता है ।   आप अपने बच्चे को सबसे अच्छे से जानते हैं इसीलिए सजा ऐसी दें जो उनके मतलब की हो जिससे वो कुछ सीख सकें ।   जैसे खेलने का समय कम कर देना, खाना नहीं देना आदि ।

 

#4 आदर करें

बच्चे को ये पता होना चाहिए की मैं भी एक इंसान हूँ और मुझे भी बुरा लगता है या दुःख होता है ।   ये दोनों तरफ से होना चाहिए ।   एक पैरेंट की तरह मैंने अपने बच्चे की हर बात ध्यान से सुनी है ।   बच्चे को बोलने दें टोकें नहीं ।   हमेशा याद रखें की वी आपसे ही सीखते हैं ।

#5 ब्रेक लें

कई बार हम बहस कर लेते हैं चाहे मुद्दा कोई भी हो ।   कई बार तो ये सीमा से बाहर चला जाता है ।   मैं हमेशा कोशिश करती हूँ की चीजें फिर से ठीक हो जाएँ ।   हमें नहीं भूलना चाहिए की रिश्तों में हम बच्चे से बड़े हैं इसीलिए किसी भी बहस आदि को सीमा से बाहर न जाने देने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है ।   बच्चे को कुछ देर के लिए अकेला छोड़ दें ।

#6 कुछ समय बचा कर रखें

बच्चे से बात करने में मज़ा आता है ।   मैं अपनी दोनों बेटिओं से बात करती हूँ ।   ये दिन में कभी भी हो सकता है ।   अपने बच्चे के साथ बात करना बहुत जरुरी है ।  कई बार रूटीन से हटकर घुमने चले जाएँ या वाक पर चलें जाएँ और उनसे बातें करें ।   कई बार मैं कंप्यूटर पर काम कर रही होती हूँ और मेरी बेटी मुझसे अपने किसी दोस्त के साथ हुए झगड़े के बारे में बात करने लगती है मैं तभी उससे बात करना शुरू कर देती हूँ ।

#7 फॅमिली टाइम

जब तक आपको लगता रहेगा की आपका बच्चा छोटा है और अकेला रहना चाहता है या थोड़ी फ्रीडम महसूस करना चाहता है तबतक वो आपकी इस कमजोरी का फ़ायदा उठा सकता है ।   मैंने देखा है की एक साधारण सी बात रिश्तों को कितना मजबूत कर देती है।

कभी यूँही साइकिलिंग कर लेना, दोपहर में बीच पर चले जाना, साथ में खाना बनाना, खर में खेलना, बिना आईपेड या आईफ़ोन के , सच में आपके रिश्तों में मधुरता ला सकता है ।

 

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