रिर्सच द्वारा प्रमाणित..बच्चों पर डांटना या चिल्लाना नहीं होता असरदार..जानिए क्यों

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ऊंची आवाज में बात करना या सजा देना भी परवरिश के तरीकों में ही आता है जो दुनिया भर में परवरिश के लिए इस्तेमाल की जाती है लेकिन अब धीरे धीरे ये कम हो रहा है और होना भी चाहिए।

आप 4 बजे सुबह तक जागी हुई हैं और आपका बेबी दिन में भी लगातार जागे हुए हैं। आप भी इंसान हैं इसलिए एक समय के बाद आप बच्चे पर चिल्ला देती हैं और धीरे धीरे ये आदत बन जाती है।

ऊंची आवाज में बात करना या सजा देना भी परवरिश के तरीकों में ही आता है जो दुनिया भर में परवरिश के लिए इस्तेमाल की जाती है लेकिन अब धीरे धीरे ये कम हो रहा है और होना भी चाहिए।

एक विशेषज्ञ का कहना है कि इस तरीके पर फिर से विचार करना चाहिए क्योंकि कई बार ये आपके बच्चों के विकास में हानिकारक है और साथ ही बेअसर भी।

बच्चों पर चिल्लाना : क्या है गैरमामूली

लाउरा मारखम एक क्लिनिकल मनोविशेषज्ञ हैं और साथ ही Peaceful Parent, Happy Kids: How to Stop Yelling and Start Connecting.की लेखिका भी, उन्होंने इसके नकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डालने की कोशिश की और साथ ही बताने कि इस तनावपूर्ण जीवन में कैसे खुद को कूल रखना और नहीं डांटना लगभग नामुमकिन होता है।

खुशी की बात ये है कि बच्चों को डांटना उन्हें मारने से कम हानिकारक है लेकिन बुरी बात ये है कि बच्चों के टीनएज के पहले उनके उपर चिल्लाकर आप उन्हें भी इसकी आदत लगा सकती हैं।

जानिए क्या होता है जब आप अपने बच्चों पर चिल्लाती या डांटती हैं

1. मस्तिष्क के विकास में रुकावट

जब आप अपने बच्चे को डांटते हो तो ना सिर्फ इससे उनके मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है। डॉ मारखम बताती हैं कि शांतिपूर्ण समय के दौरान दिमाग में न्यूरोट्रांसमिटर हमें बताते हैं कि हम बायोकेमिकल से सुरक्षित हैं। बच्चे भी इस तरह से अपना खुद को शांत रखते हैं।लेकिन अगर लगातार आप चिल्लाते हैं तो इनके प्रति रवैया बिल्कुल एक सा हो जाता है।

2. संचार नहीं

आप एक बार सोच कर देखिए जब भी आप स्टाफ मीटिंग में होती हैं और आपके मैनेजर आपके ऊपर चिल्लाते हैं तो आप कैसा महसूस करती हैं? क्या आप बार उन्हें सुनेंगी? शायद नहीं। बस यही बच्चों के साथ भी होता है।

कोई भी चिल्लाना पसंद नहीं करता है खासकर छोटे बच्चे बस रोना शुरू करेंगे और बड़े बच्चे इस आदत से ऊब जाएंगे। दोनों ही रिएक्शन दिखाते हैं बच्चे आपको सुनने में दिलचस्पी नहीं लेते।

3. ये डरावना है

आप बच्चों के लिए किसी चट्टान के सामान होते हैं जो उन्हें हर सुख सुविधा देते हैं, लेकिन जब आप उन्हें डांटती या चिल्लाती हैं तो उनका विश्वास टूटने लगता है और भयावह स्थिति बन जाती है।

डॉ मारखम ने ये भी बताया कि स्टडी के अनुसार जब उन्होंने बच्चों चिल्लाने के दौरान की वीडियो बनाया और उसे दुबारा चलाया तो उनका विकृत चेहरा दिखा। बड़े होने के बाद परिपक्वता के साथ इसे हैंडल करते हैं लेकिन तीन साल के बच्चों का क्या?

4. इसके दूरगामी परिणाम

जब आप अपने बच्चों पर चिल्लाते हैं तो आप उन्हें संचार के आसान तरीकों को समझाने की कोशिश करते हैं जब कोई गुस्सा या निराश होता है तो ऐसा करता है जबकि असल में हमसब को पता है कि ऐसा नहीं होता है। बच्चे इससे धीरे धीरे डरना या घबराना भी बंद कर देते हैं और तब आपको समझ जानना कि आप बच्चों पर अधिक चिल्ला रही हैं।

ये सिर्फ डॉ मारखम की सलाह नहीं है कि हमेशा अपने बच्चों को अनुशासन सिखाने के दौरान आवाज नीचे रखें। कई और भी स्टडी उनकी इस सलाह को मानती है।

2013 में the journal Child Development में प्रकाशित हुए जनरल के अनुसार डांटना, चिल्लाना भी बच्चों के लिए मारने या सजा देने जितना घातक साबित हो सकता है।

इसका उनके ऊपर आत्म सम्मान, बेचैनी या गुस्सा करने जैसे दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं।

इसका विकल्प क्या है?

डॉ मारखम के अनुसार इसका सबसे अच्छा विकल्प है मजाक या ह्युमर। दुर्व्यवहार करते हैं और गलतियां करते हैं। ये नॉर्मल है लेकिन अगर पैरेंट्स थोड़ा सेंस ऑफ ह्युमर के साथ इससे निपटें तो। आपके बच्चे आपसे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं ये ना भूलें।

इसके अलावा आप गुस्सा शांत करने के लिए थोड़ा समय लें, खुलकर इमोशन के बारे में बच्चों से बात करें और नतीजों पर पूरी तरह से अडिग रहें ना कि सिर्फ खोखले धमकी दें।

पैरेंट्स, हम समझ सकते हैं कि आप कैसे अपने बच्चों को अनुशासित रखते हैं लेकिन ये बेहतर है कि आप अनुशासन अपनाने के अलग अलग तरीकों क बारे में जानें और समझें कि बच्चों पर क्या ज्यादा असरदार होगा और आपके लिए भी क्या अच्छा रहेगा।

अगर आपके पास कोई सवाल या रेसिपी है तो कमेंट सेक्शन में जरूर शेयर करें।

Source: theindusparent