रावण से जुड़ी 5 दिलचस्प बातें अपने बच्चों को दशहरा पर जरुर बताएं

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क्या आप जानते हैं कि रावण को दस सिर क्यों थे? इस लेख में जानिए रावण से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।

हम सभी उसे रामायण के विलेन के रुप में जानते हैं। एक ऐसा शैतान जिसने सीता का अपहरण किया था और राम से दूर सोने की लंका ले गया था।

रामायण की यही कहानी हम अपने बच्चों को बताते हैं। कई पैरेंट्स यहां तक कि रावण का उदाहरण भी बच्चों को देते हैं कि कैसे शैतान लोग संत के वेष में अपहरण कर सकते हैं।

हालांकि बात जब रावण की आती है तो रावण के बारे में हम जितना जानते हैं उससे भी अधिक जानने की जरुरत है। आज हम रावण से जुड़ी 5 दिलचस्प बातें लेकर आए हैं जो आपको अपने बच्चों को इस दशहरे पर जरुर बताना चाहिए।

रावण बहुत ही अच्छा वीणा वादक था

पूरी दुनिया रावण की शैतानी गुणों के बारे में जानती है। वेदों और शास्त्रों में लिखा गया है कि वो बहुत ही अच्छा वीणा बजाता था। वो काफी ज्ञानी पुरूष और प्रकांड पंडित भी माना जाता था।

पिछले जन्म में विष्णु का द्वारपाल था रावण

पौराणिक कथाओं में ऐसा बताया गया है कि रावण और उसके भाई कुंभकर्ण पिछले जन्म में विष्णु के द्वारपाल हुआ करते थे और उनका नाम जया और विजया था। चूंकि दोनों भगवान विष्णु के बैकुंठ के द्वारपाल थे इसलिए उनमें अहंकार आ गया।

एक प्रसिद्ध कहानी के अनुसार एक बार भगवान ब्रह्मा के चार कुमार विष्णु से मिलने बैकुंठ आए और उन्होंने चारों का मजाक उड़ाया। सभी ने नाराज होकर उन्हें श्राप दिया कि वो कभी भगवान विष्णु के करीब नहीं जा सकेंगे।

 

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जब उन्होंने माफी मांगी तो उन्हें विकल्प दिया गया कि वो या तो सात जन्मों तक विष्णु के सहयोगी बन कर रहें या तीन जन्म उनके दुश्मन बनकर। उन्होंने दूसरा विकल्प चुना और इसी तीन में से एक जन्म में रावण और कुंभकर्ण के रुप में उनका जन्म हुआ था।  

चार वेद और छ: शास्त्रों का ज्ञाता रावण

रावण चार वेदों में छ: शास्त्रों का ज्ञाता था और इस वजह से उसे 10 सिर थे जो बहुत ही अधिक ज्ञान और बुद्धिमता की निशानी थी। कथाओं के अनुसार रावण इतना ज्ञानी था कि वो ग्रहों को कंट्रोल कर सकता था।

एक और पौराणिक कथा के अनुसार शिव का ध्यान आकर्षित करने और उनके आर्शिवाद के लिए रावण ने अपने सिर को 10 टुकड़ों में बांट लिया था लेकिन उसकी भक्ति और निष्ठा के कारण हर टुकड़ा एक सिर बन गया।

रावण भगवान शिव का भक्त था

रावण भगवान शिव का बहुत ही बड़ा भक्त था और चाहता था कि शिव कैलाश से लंका में जाकर रहें जो असंभव था। इसे संभव बनाने के लिए  रावण एक बार शिव के निवास स्थल कैलाश को उठाने की कोशिश करने लगा। भारी क्रोध में शिव ने अपना पैर पटका और रावण की उंगली कुचली गई।

 

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रावण दर्द में कराह उठा और दर्द में भी उसने भगवान शिव को ही याद किया और शिव तांडव स्त्रोत का पाठ किया जिस वजह से भगवान शिव ने उसका नाम रावण रखा जिसका अर्थ ‘तेज चीख’ है।

रावण ने रची थी रावण संहिता

रावण अपनी शक्ति औऱ ज्ञान की वजह से प्रकांड पंडित बना और कई पौराणिक कहानियों में लिखा गया है कि उसने ही रावण संहिता रची थी। रावण संहिता एक ऐसी किताब है जो हिंदुओ के लिए पवित्र मानी जाती है। कई ग्रंथों में यहां तक लिखा गया है कि वो सूर्य के उदय और अस्त को भी अपनी शक्ति से कंट्रोल कर सकता था।