ये 8 पारंपरिक भारतीय प्रथाएं आपके नवजात के लिए हानिकारक हो सकते हैं 

ये 8 पारंपरिक भारतीय प्रथाएं आपके नवजात के लिए हानिकारक हो सकते हैं 

जहाँ तक नवजात बच्चों की बात है भारत में वैसे भी लोग डॉक्टर से ज्यादा दाई माँ पर विश्वास करते हैं । यहाँ हम ऐसे 8 पारंपरिक प्रथाओं की बात करेंगे जो आपके बेबी पर अच्छे से ज्यादा बुरा असर करती हैं।

कई पारंपरिक आदतें हो सकता है की आपके और आपके बेबी के लिए ठीक हों लेकिन कई पारंपरिक प्रथाओं का कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं होता है और वो बिलकुल गलत फहमी के कारण बना होता है। जहाँ तक नवजात बच्चों की बात है भारत में वैसे भी लोग डॉक्टर से ज्यादा दाई माँ पर विश्वास करते हैं । यहाँ हम ऐसे 8 पारंपरिक प्रथाओं की बात करेंगे जो आपके बेबी पर अच्छे से ज्यादा बुरा असर करती हैं।
#1 6 महीने से कम के बच्चों को गाय का दूध देना
 जब मेरी बेटी 3 महीने की थी तब मेरा दूध बनना कम हो गया थ, ऐसे में मैंने सोचा की क्यों न गाय के दूध में पानी मिलकर बच्चे को दूँ । हालाँकि शुरू में मुझे ये अटपटा तो लगा लेकिन फिर सोचा की दिन में एक बार तो दे ही सकते हैं । लेकिन इसके बावजूद मेरी बेटी को आंत्र संक्रमण हो गया और डॉक्टर ने मुझे गाय के दूध के जगह फार्मूला मिल्क देने को कहा ।
बच्चों के पाचन तन्त्र स्तनपान से मिले दूध को पचाने के लिए होते हैं तो पचाने में आसान होते हैं । विज्ञान कहता है की गाय का दूध पूरी तरह से प्रोटीन, मुश्किल से पचने वाले खनिज से भरा होता है जो बच्चे के पाचन तंत्र पर असर डालता है । इसके अलावा इसमें आयरन, विटामिन सी और बच्चों के लिए जरुरी अन्य पोषक तत्वों की कमी होती है।
#2 बहुत ज्यादा पाउडर लगाना
ये भारत में बड़ा सामान्य है । ये सही है की आप कभी कभी पाउडर लगा लें लेकिन बच्चे को पूरा टेलकम पाउडर से ढकना नहीं चाहिए । कई स्टडीज बताती हैं की ज्यादा टेलकम पाउडर का इस्तेमाल सीधे तौर पर कैंसर से जुड़ा है क्योंकि उसमे मैग्नीशियम, सिलिकॉन और एस्बेस्टस जैसे खनिज होते हैं जो जाने माने कार्सिनोजन हैं ।

इसके अलावा ज्यादा मात्रा में टेलकम पाउडर के इस्तेमाल से इसके सांस के साथ फेफड़ों तक पहुँच जाने का भी खतरा बना रहता है । ये पाउडर के कण फेफड़े में फंसकर फेफड़े को नुकसान पहुंचा सकते हैं ।हालाँकि अगर आपको सही में पाउडर लगाना ही है तो आर्गेनिक पाउडर का इस्तेमाल करें जो कॉर्नस्टार्च और अन्य हानिरहित पदार्थ से मिलकर बनता है ।

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#3 बच्चे को एक जोरदार मालिश देना
पारंपरिक प्रस्ताव में बच्चों के मसाज की अपनी एक ख़ास जगह है । लेकिन कई बार माएँ बहुत ज्यादा आगे बढ़ जाती हैं । कुछ तो बच्चों के मसाज के लिए दाई आदि लोगों को पैसे देती हैं जो बच्चे के शरीर की तेल के साथ मसाज करती हैं फिर चाहे बच्चा दर्द के कारण रो ही क्यों न रहा हो । क्या उसको कुश्ती में भेजने का इरादा है आपका ?
इसमें कोई शक नहीं है की मसाज से बच्चे के शरीर को बहुत ज्यादा फायदा होता है, लेकिन इसका तेल से ज्यादा माँ के हाथों के स्पर्श से लेमा देना होता है । एक मुलायम, अच्छा सा मसाज आपके और आपके बच्चे के बीच के बॉण्ड को बहुत ज्यादा मजबूत बनाता है।
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#4 3 महीने से पहले ही ठोस खाद्य पदार्थ देने लग जाना
होंसक्ता है की आपको लगे की आपका 3 महीने का बच्चा ठोस खाद्य पदार्थ के लिए तैयार है लेकिन सच ये है बच्चों का पाचन तंत्र ठोस भोजन 6 महीने के बाद ही संभाल सकता है, इससे पहले डायबिटीज और दूसरी बीमारियों के होने का रिस्क बढ़ जाता है । इससे पेट में जलन शुरू हो सकती है ।
#5 बेसन या उबटन से बच्चे के शरीर का रंग या बाल हटाना
आगे कुछ लिखुँ इससे पहले बता दूँ की इस चक्कर में मैं भी पड़ गयी थी। मैंने ये अपनी बेटी के साथ किया और नतीज़ा ये हुआ की उसकी त्वचा लाल चकत्ते बनने शुरू हो गए ।

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जब मुझे पता लगा की बच्चों की त्वचा बहुत ही नाजुक और संवेदनशील, होती है खासकर के 6 महीने के पहले तो और भी ज्यादा । ऐसे में बेसन आदि का इस्तेमाल करना बच्चे के लिए बहुत की नुकसानदायक होता है । अगर आपके बच्चे के शरीर पर बहुत ज्यादा बाल हैं तो चिंता मत करिये ये आम आप ही गिर जाते हैं और कुछ समय बाद फिर से बढ़ जाएंगे। ऐसा कुछ भी करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें ।
6. शिशु को मिश्री पानी या घुट्टी देना
एक और जो बहुत सामान्य प्रथा है की जब भी बच्चा रोये आपकी आंटी या दाई माँ झट से बोलती हैं की मिश्री पानी दे दो।
ये बड़े बच्चों में तो काम करता है जो 1 साल से ऊपर के हैं लेकिन नवजात बच्चे को माँ के दूध के अलावा कुछ भी नहीं देना चाहिए । माँ के दूध के अलावा कोई भी चीज़ बच्चे को बैक्टीरिया या किस तरह की एलर्जी या आँतों में जलन को जन्म दे सकती है ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी नवजात बच्चे के लिए केवल और केवल माँ का दूध ही देने की बात कहता है । क्योंकि इसके अलावा किस भी चीज़ में सोडियम बाइकार्बोनेट, अल्कोहल आदि जैसी चीजें हो सकती हैं जो बच्चे के लिए बहुत ही हानिकारक होती है ।

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#7 सरसों का तेल नाक और कान में लगाना
ये बात भारत में बड़ी जानी मानी है की भारत में सरसों तेल बच्चों की मालिश के लिए इस्तेमाल किया जानेवाला सबसे चहेता तेल है । मसाज करने के अलावा किसी भी तरह का इस्तेमाल बच्चों में नुकसान कर सकता है खासकर के अगर आप तेल बच्चे के कान या नाक में डालते हैं । इससे संक्रमण हो सकता है । इसीलिए चाहे मालिश वाली आपको कहे की कुछ बून्द बच्चे के नाक या कान में डाल दो, ऐसा कभी न करें ।
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#8 बच्चे के नाल की स्टंप को सरसों तेल से साफ़ करना
आपके बच्चे का नाल का स्टंप सिर्फ और सिर्फ साफ़ पानी से साफ़ करना चाहिए । स्टंप अक्सर 20 दिन में सुख जाता है लेकिन इसके पीछे त्वचा खुली सी रह जाती है जिसे ठीक होने में थोड़ा समय लगता है । इसमें संक्रमण होने के भी बहुत ज्यादा संभावना होती है । कई बार आप इसमें से पीले रंग के द्रव्य को बाहर आता देखेंगे जो सदहरण सी बात है । साफ़ पानी के अलावा किसी भी एयर चीज़ से इसको सफाई करना मतलब संक्रमण को बुलावा देना । हालाँकि संक्रमण होता बहुत कम है लेकिन अगर आपको कुछ गंभीर लगे तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें ।

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