ये टिप्स पहली बार शिशु को लेकर ट्रेवल करने से पहले ज़रुर जाने ये सब

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सफर में ऐसा कई बार मैंने भी महसूस किया है कि शिशु अचानक ही खूब रोने लग जाते हैं और तब रोने के सही कारण का पता लगाना कठिन हो जाता है । ऐसी परिस्थिति में आप हौसला रखें और घबराऐं बिल्कुल भी नहीं ।

नन्हे से शिशु को लेकर सफर करने के दौरान मांओ के लिए कई सारी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं । लेकिन रास्ता आसान लगने लगता है जब आपके साथी को बेबी का ख्याल रखने में महारत हासिल हो । कभी कभार कुछ असामान्य सी स्थिति भी बन जाती है जिसके लिए हम तैयार नहीं होते जैसे आपका शिशु फ्लाईट, ट्रेन या फिर कार में घर जैसा आराम नहीं पा रहा होता है और इसी वजह से उसकी सेहत में बदलाव आ जाए या उसकी दिनचर्या में फेरबदल करने के कारण वो तंग हो रहा हो...कुछ पल के लिए तो इन परिस्थितियों में आप खुद को दुनिया के सबसे हेल्पलेस पैरेंट्स मान लेते हैं ।   

जी हां सफर करने का माध्यम चाहे जो कुछ भी हो पर सुकोमल से शिशु के साथ ट्रेवल करना नऐ पैरेंट्स के लिए धड़कनें बढ़ाने वाला अनुभव होता है । इसलिए मैं अपने अनुभवों के आधार पर आप सभी यंग मॉम्स के लिए कुछ बेहद ही उपयोगी टिप्स लेकर आई हूं जो निश्चित तौर पर बेबी के साथ आपकी पहली आउटिंग को टेंशन फ्री बनाने में मददगार साबित होगी ।

आखिरी समय में पैकिंग करने से बचें  

जी हां, माना कि आपके पास अन्य कई काम हैं लेकिन फिर भी शिशु के लिए सभी आवश्यक चीजें 2 दिन पहले से ही पैक कर लें ।

सर्दी-खांसी, बुखार, लूज मोशन आदि जैनेरल प्रॉबल्म के लिए दवाओं का अलग से एक किट पैक कर के रखें । जगह बदलने से छोटे बच्चों में ज़ुखाम होना आम बात है इसलिए नोज़ ड्राप, विक्स, सिरप वगैरह रखें । उसके खास डॉक्टर का मोबाईल नम्बर, प्रेसक्रिप्शन या चिट्ठा रखना कतई ना भूलें ।

सैनिटरी किट बना लें जिसमें हैंडवॉश, हैंड सैनिटाईज़र, पेपर सोप, और बेबी के उपयोग में आने वाला हर बाथिंग प्रोडक्ट आप इसी में रख सकती हैं साथ ही अपने यूज़ के लिए भी शैंपू पाउचेज़, सोप वगैरह रखना सही होगा ।

संभव हो तो बेबी का बैग ही अलग से रखें ताकि सामान ढूंढने में आसानी हो ।                                                                            

अगर दांत आ रहा हो या आने वाला हो तो उसके लिए भी अपने डॉक्टर से सलाह लेकर शिशु को होमियोपैथी दवा पहले से पिलाऐं । इस तरह आप सफर के दौरान लूज़ मोशन या दांत निकलने के कारण होने वाली समस्या से शिशु को बचा सकती हैं ।  

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शिशु की रुटीन में कोई बाधा ना हो  

आपको कोशिश यही करनी चाहिए कि समय से शिशु को फीड कराऐं और उसे सोने लायक माहौल दें । ट्रेन में सफर लंबी होनी तय है इसलिए शिशु के खान-पान (6 माह से अधिक उम्र के बच्चे) का भी ध्यान रखें । घर से मूंग दाल खिचड़ी, दलिया बना कर ले जाने से कम से कम एक बार बेबी सॉलिड फूड खा सकेगा । रास्ते में आप सेरेलेक से काम चला सकती हैं । गर्म पानी या दूध रखने के लिए थर्मस पहले से ही साफ कर के धूप में रख दें ताकि वो कीटाणु रहित हो सके ।

छोटे बच्चों को मालिश करवाने की आदत होती है । इसलिए रोजाना की तरह ट्रेन में भी मालिश जरुर करें । प्लाईट से आप कम समय में ही  अपनी मंजिल तक पहुंच जाती हैं इसलिए आप शिशु को इन सब के लिए थोड़ा इंतज़ार करवा सकती हैं । हालांकि उसके आराम का ध्यान आपको अधिक रखना होगा ।

उसके पसंदीदा खिलौने को भी सफर में साथ ले कर चलें ताकि शिशु ऐन्जॉय कर सके ।

शिशु के अधिक रोने पर क्या करें

सफर में ऐसा कई बार मैंने भी महसूस किया है कि शिशु अचानक ही खूब रोने लग जाते हैं और तब रोने के सही कारण का पता लगाना कठिन हो जाता है । ऐसी परिस्थिति में आप हौसला रखें और घबराऐं बिल्कुल भी नहीं । हो सकता है शिशु भूख से रो रहा हो या कच्ची नींद जाग गया हो । याद करें कि कहीं उसकी दिनचर्या या रोज़ की आदतों में से कोई काम आपसे छूट तो नहीं गया है ।पुचकारने या प्यार करने की कोशिश करें । गोद में अपने करीब रखकर पीठ पर थपकी दें । उसका ध्यान भटकाने की कोशिश करें । फीड कराने के दौरान उसके सर पर तेल की मालिश करें । कई बार गर्मी या कपड़े से भी शिशु को ईरिटेशन होने लगता है । यकींन कीजिऐ जब आप अपने शिशु को चुप कराने का अथक प्रयास कर रही होती हैं तो साथ में ट्रेवेल करने वाली यात्रियों को आप पर या शिशु पर गुस्सा नहीं आता बल्कि उन्हें भी आपसे सुहानुभूति रहती है इसलिए दूसरे क्या सोच रहे होंगे इसकी फिक्र ना करें ।  

आपके हैंड बैग में क्या होना चाहिए

यूं तो लड़कियों के पर्स में पूरा ब्रम्हाण्ड समाहित होने की बात अक्सर की जाती है लेकिन मां बनने के बाद आपके हैंडबैग पर आपके ब्युटी प्रोडक्ट्स से ज्यादा हक़ शिशु के ऐंटी रैशेज क्रीम का हो जाता है । जी हां ट्रेवल के दौरान पर्स का सही उपयोग करने के लिए उसे व्यवस्थित कर के रखना जरुरी है ।

  • शिशु के डाईपर, लोशन, सबसे जरुरी खिलौना पर्स में रखें
  • ऐक्सट्रा क्लोथ भी शिशु के लिए कैरी करें
  • हैंकी, वेट वाईप्स भरपूर मात्रा में हो ।
  • शिशु को लिटाने या चेंज कराने के लिए टॉवेल
  • तुरंत चुप कराने के लिए कोई खिलाने या दिखा कर खुश करने वाला सामान
  • बेबी पाउडर के अलावा टीथर भी अगर शिशु को दांत आ रहा हो ।
  • सफर में काम आने वाले चम्मच, कटोरी, छोटा गिलास आदि ।
  • होम मेड फ्रूट जूस, फार्मूला या जो भी आपको जरुरी लगे ।

अब इन सब चीजों को रखने के बाद हैंडबैग में जितनी जगह बचे वो सारी आपकी ।

हैप्पी पैरेंटिंग....