मॉम्स ...जानिए क्यों आपके बच्चों में समय से पहले आ रही है प्यूबर्टी

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अगर आप अपने बच्चों को रोज एक ग्लास दूध देती हैं तो अब समय आ गया है कि इसे बंद करें। क्योंकि शायद आपको पता नहीं दूध में ऑक्सिटोसिन नाम का हार्मोन गुप्त तरीके से मिलाया जाता है।

अगर आप अपने बच्चों को रोज एक ग्लास दूध देती हैं तो अब समय आ गया है कि इसे बंद करें। क्योंकि शायद आपको पता नहीं दूध में ऑक्सिटोसिन नाम का हार्मोन गुप्त तरीके से मिलाया जाता है।

जी हां आपने बिल्कुल सही पढ़ा।

आप हमारे देश में सिर्फ दूध की मिलावट की चिंता मत कीजिए बल्कि ऑक्सिटोसिन हार्मोन की भी चिंता करें जो गाय-भैंस को इसलिए दिया जाता है ताकि वो अधिक मात्रा में दूध दें।

ये हार्मोन ना सिर्फ जानवरों को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि बच्चों में कम उम्र में प्यूबर्टी का भी कारण बन जाते हैं। एक दैनिक अखबार के अनुसार भारत के कई दूधवाले अपनी दुधारू पशुओं में ऑक्सिटोसिन देते हैं। इससे उनकी प्रजनन क्षमता भी कम होती है।

भारतीय बच्चों में कम उम्र में आ रही प्यूबर्टी

सबसे ज्यादा खतरनाक बात ये है कि इस हार्मोन की वजह से बच्चों में असामयिक प्यूबर्टी आ रही है। इसका मतलब है कि बच्चियों को काफी कम उम्र में पीरियड्स आती है और लड़कों के चेहरे पर महज 10 साल की उम्र में बाल आने लगते हैं।

 
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मिड डे की रिर्पोट के अनुसार अप्राकृतिक रूप से जानवरों में ऑक्सिटोसिन देना गैरकानूनी है लेकिन फिर भी चोरी छिपे ये काम किया जा रहा है।

वेटनरी विश्वविद्यालय के अनुसंधान के डायरेक्टर डॉ वी एल देवपुरकर ने दैनिक अखबार से बातचीत के दौरान कहा कि ऑक्सिटोसिन और पिक्टोसिन एक ऐसा इंजेक्शन होता है जो महिलाओं को प्रसव कराने के लिए दिया जाता है।"

व्यवसाय के मकसद से जो तबेले बनाए जाते हैं वो एक दिन में लगभग दो बार ऑक्सिटोसिन का इंजेक्शन लगाते हैं। इसे देने के बाद उनके थन में बछड़ा/बछड़ी के लिए दूध जमा होता है वो भी निकल जाता है।

डॉ राहुल कुमार,छत्रपति साहुजी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी के औषध विज्ञानी हैं, उन्होंने एक लीडिंग डेली से बातचीत के दौरान कहा कि ऑक्सीटोसिन का हार्मोन के विकास पर प्रभाव पड़ता है इसलिए छोटी बच्चियों में कम उम्र में प्यूबर्टी आ जाती है।

डॉ परमिंदर सिंह, लुधियाना में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने मिड डे से बातचीत में कहा कि “1990 में बच्चियों में 16 साल में पीरियड्स शुरू होता है। ये उम्र धीरे धीरे आश्चर्यजनक रूप से घटती जा रही है। अब 9-10 साल की बच्चियों में पीरियड्स आता है तो पैरेंट्स चिंतित होकर हमारे पास आते हैं। लड़कों में गाइनेकोमैस्टिया (अंगो का विकास) होता है।"

उन्होंने आगे बताया कि ये हार्मोनल असंतुलन की वजह से होता है जो डेयरी प्रोड्क्ट में ऑक्सीटोसिन मिलाने की वजह से होते हैं। स्वास्थ्य मंत्री और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को इसके गलत इस्तेमाल पर ध्यान देने की जरूरत है। लैब में भी डेयरी प्रोड्क्ट में दिए जाने वाले हार्मोन के लेवल की जांच होनी चाहिए।

भारत में बैन क्यों नहीं किया गया?

अभी आपने जो पढ़ा इसे पढ़ने के बाद अगर आपके दिमाग में भी यही सवाल आता है तो सबसे पहले हम आपको बता दें कि ये हार्मोन असल में बेचने से मना किए गए हैं। पशुओं के प्रति क्रूरता रोकथाम अधिनियम के सेक्शन 12 में कहा गया है कि जिस दवा में इस हार्मोन का इस्तेमाल हो उसे बिना डॉक्टर के आदेश और पर्चे के नहीं ले सकते। 

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बदकिस्मती से ये अभी भी भारत में बेचा जा रहा है और कई डेयरी मालिक दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं। लेकिन ये जघन्य व्यवसाय फायदे से अधिक नुकसान पहुंचा रहा है और सबसे ज्यादा इसकी गिरफ्त में छोटे बच्चे आ रहे हैं।

क्या है उपाय?

अगर संभव हो तो हमेशा ध्यान दें कि दूध कहां से आ रहा है और सैंपल लेकर लैब में टेस्ट करवाएं। दूसरा रास्ता ये है कि हमेशा ध्यान दें कि कहीं दूध में मिलावट तो नहीं की गई है। यहां जानिए आप ये कैसे कर सकती हैं।

  • पानी – बिल्कुल चिकने जगह पर एक बूंद दूध गिराएं और अगर दूध में मिलावट होगी तो दूध अलग और पानी अलग हो जाएगा।
  • डिटर्जेंट 5-10 ml दूध इतने ही पानी में हिलाएं। अगर आपको झाग नजर आए तो मतलब साफ है कि आपके दूध में डिटर्जेंट मिला हुआ है।
  • सिन्थेटिक दूध: सिन्थेटिक दूध स्वाद में थोड़ा कड़वा होता है और गर्म करने के बाद हल्का पीला हो जाता है। सिन्थेटिक दूध को आप ऊंगलियों के बीच भी रगड़ कर देख सकते हैं। ये साबुन की तरह अगर चिकने लगते हैं तो ये सिन्थेटिक दूध है।
  • स्टार्च : दूध में थोड़ा सा आयोडिन सॉल्युशन मिलाएं और अगर आपको नीला रंग नजर आए तो दूध में स्टार्च है।

Source: theindusparent.com

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