मैं बहुत Strict माँ हूँ : मारिया गोरेट्टी

मारिया कई रूप में एक सशक्त महिला हैं. वो एक फ़ूड ब्लॉगर हैं, कुक शो की होस्ट हैं, और एक लेखिका भी हैं .और इन सबसे बड़ी बात ये की पिछले 15 साल से वो अरशद वारसी की पत्नी हैं .

लेकिन वो हमेशा एक माँ के रोल को सबसे ऊपर रखती हैं . 12 साल के जेके वारसी और 8 साल की जेने जोए वारसी की माँ मारिया बताती हैं की वो घर में कुछ ख़ास नियम नहीं बनाती हैं . वो कहती हैं “सच्चाई ये है की बच्चे के साथ-साथ आप भी बहुत कुछ सीखती हैं . एक माँ के तौर पर आप कई चीजें ट्राय करके देखती हैं की सही है या नहीं .”

इंडसपैरेंट के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने अपनी शादी, बच्चे और फॅमिली लाइफ के बारे में हमें बताया .

एक लेखिका, फ़ूड ब्लॉगर और कुक शो की होस्ट होने के नाते आप बच्चों के लिए समय कैसे निकाल पाती हैं ?

“ये आसान नहीं है और मैं इस बात को अच्छे से समझती हूँ की बच्चों को पूरा 100% नहीं मिल पाता है . कई बार ये मुश्किल हो जाता है क्योंकि आपके बच्चे को भी आपकी बहुत जरूरत होती है .लकिन आपको हर काम के लिए एक समय निर्धारित करना पड़ता है और हर काम में बैलेंस बनाकर चलना पड़ता है .लकिन ये हर बार इतना स्मूथ नहीं होता है .

आपके दो बच्चे हैं एक बेटा और एक बेटी. क्या फर्क होता है लड़के और लड़की को बड़ा करने में ?

“ये बहुत मुश्किल है लेकिन मुख्य बात यही है की दोनों ही बच्चे हैं . लड़के बचपन में बहुत कुछ शो करना पसंद करते हैं लेकिन जब वो बड़े होते हैं तो ये कम बहुत कम करते हैं . दूसरी ओर लड़कियां इमोशनल होती हैं . दोनों कार्ड्स बनाते हैं उनपर कुछ कोट्स लिखते हैं .जैसे मेरी बेटी हमेशा लिखती है की लड़कियां बहुत क्यूट होती हैं .

मेरा बेटा भी ऐसा करता था, हालांकि अब वो बड़ा हो गया है और मुझसे गले लगने में या हाथ पकड़ने में उसे संकोच होता है, खास करके तब जब हम कहीं बाहर जा रहे हों .लेकिन मेरी बेटी ऐसी नहीं है वो बाहर भी मुझसे गले लगती है हम साथ में शौपिंग करते हैं खाते हैं घूमते हैं . मेरे बेटे को शौपिंग से नफरत है . वो कपड़े खरीदने से पहले ट्राय भी नहीं करता है . वो बस बोल देगा की ये फिट हो जाएगी .

वो तीन कौन सी बातें हैं जो आपने अपनी माँ से सीखा और अब आप अपने बच्चों को सिखाना चाहती हैं ?

मैं  हमेशा से उन्हें अच्छे बच्चे बनाना चाहती हूँ , अच्छे मैनर्स और दूसरों का आदर करने की भावना रखने वाले बच्चे के तौर पर मैं उन्हें बड़ा होते देखना चाहती हूँ .कोई फर्क नहीं पड़ता की आपके सामने कौन है आपको हमेशा उनसे आदर से बात करनी चाहिए . मेरे लिए यही सबसे ज्यादा जरुरी है .

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वो तीन कौन सी चीजें है जो उन्होंने आपको सिखाई हैं ?

यही की मुझे और पेशेंस की जरूरत है , मुझे थोड़ी और समझदारी दिखाने की जरूरत है और मुझे तुरंत किसी बात को लेकर रियेक्ट नहीं करना चाहिए .

आप किस तरह की माँ हैं ? क्या आप अपने बच्चों को पनिशमेंट देती हैं या नहीं ?

मैं बहुत स्ट्रिक्ट माँ हूँ , शायद मुझे थोडा कम स्ट्रिक्ट होना चाहिए . कई बार मैं जाने देती हूँ . लकिन अगर ये उनके लिए साधारण बात हो जाए और वो बात मानना बंद कर दें तो फिर मुझे फिर से अपने उस रूप में आना पड़ता है .एक पेरेंट्स का तौर पर आप भी उनके साथ बढती हैं और अपना बेस्ट देती हैं . बच्चों से हमें यही सिखने को मिलता है . मैं अपनी बेटी के साथ बहुत कूल हूँ लेकिन बेटे के साथ ये कुछ फिक्स नहीं है .

एक और मुद्दा जो आजकल बहुत ज्यादा चर्चा में है और जो आजकल पेरेंट्स की नींद हराम कर रहा है वो है चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज .एक माँ के तौर पर क्या आपको इस बात की चिंता सताती है जब आप ऐसी खबरें देखती और सुनती हैं ? क्या आप इस बारे में बच्चों से बात करती हैं ?

हाँ मैं उनसे बात करती हूँ लेकिन इतना भी नहीं की वो डर जाएँ . इसीलिए मैं उन्हें सावधान रहने के लिए बताती जरुर हूँ और ये भी उम्मीद करती हूँ की वो इस बारे में अपने बाकी दोस्तों को भी बताएंगे . मैं उनसे हमेशा कहती हूँ की मैं और अरशद हमेशा उनके साठव रहेंगे चाहे ख़ुशी की बात हो या दुःख की .

वो कौन सी चीजें हैं जो एक फॅमिली के तौर पर आप करते हैं , इतना तो पता है की आप उनके लिए खाना जरुर बनाती होंगी .

हाँ हम सब साथ में मिलकर खाना बनाना पसंद करते हैं लेकिन उसके अलावा हम साथ में घुमना भी उतना ही पसंद करते हैं .. हम बहुत ज्यादा ट्रेवल करते हैं अगर अरशद कहीं काम कर रहे हैं तो हम उन्हें ज्वाइन कर लेते हैं और अगर अरशद हमें ज्वाइन नहीं कर पाते हैं तो मै और बच्चे घुमने निकल पड़ते हैं .

आप उनके लिए खाने में क्या बनाना पसंद करती हैं ?

देखिये घर पर तो वो खुद ही खाना बनाते हैं क्योंकि उन्हें ये काम बहुत पसंद है . यहाँ तक की अब तो मैं उनसे पूछती हूँ की वो क्या बनाने जा रहे हैं ?लेकिन हम ये ज्यादातर नहीं करते हैं क्योंकि स्कूल के भी काम होते हैं और ज्यादातर वीकेंड में मैं उनके होमवर्क करवाने के लिए उनपर चिल्लाती रहती हूँ .मै ऐसा चाहती नहीं हूँ लेकिन लाइफ कुछ ऐसे ही बढती है .

अरशद और आप दोनों के धर्म अलग अलग हैं . आप कैसे तय करती हैं की आपके बच्चे का भरोसा दोनों ही धर्मों में हो ?

दरअसल अरशद बहुत ज्यादा धार्मिक नहीं है इसीलिए बच्चे मेरे साथ चर्च में जाते हैं . लेकिन वो सभी धर्मों का आदर करते हैं . एक परिवार के तौर पर हम इसी में विश्वास रखते हैं . इसीलिए चाहे गणपति हों या गुरुद्वारा या कोई पंडाल हमें हर धर्म को बराबर नज़र से देखना चाहिए .

क्या आप कोई पेरेंटिंग रूल को फॉलो करती हैं ?

मैं ज्यादातर बच्चों के साथ ही घर पर रहती हूँ , जब तक अचानक बाहर कोई काम न आ जाए .मेरे माता पिता भी मेरे साथ हैं इसीलिए अगर मई कहीं जाती हूँ और अरशद भी नहीं हैं तो वो बच्चों की देखभाल करते हैं .

आपकी मैरिड लाइफ के बारे माँ बात करें तो आजकल कई कपल के ब्रेकअप हो रहे हैं . आपने 15 साल कैसे साथ बिताएं ?

मेरे पास इसका जवाब नहीं है क्योंकि कुछ भी गलत या सही नहीं होता है . मुझे हमेशा लगता है की अगर एक कपल आपस में खुश नहीं हैं तो उन्हें अलग हो जाना चाहिए नहीं तो बच्चों को लगता है की शादी के बाद ज़िन्दगी ऐसी ही उदासीन हो जाती है .मै ये बात नहीं मानती की रिश्ते में खुश न होने के बावजूद आप साथ रहें इससे बच्चों पर भी असर पड़ता है . मैं ट्रेडिशनल एप्रोच वाली महिला नहीं हूँ इसीलिए अगर आप अब्युजिव रिलेशनशिप में हैं तो बेहतर है की आप अलग हो जाएँ .

पर्सनल लेवल पर आप एक कुकरी शो कर रही हैं और साथ ही आपने एक किताब भी पूरी कर ली है . तो अब 2016 में आपके लिए क्या नया है ?

मुझे इसकी ख़ुशी है की मैंने 10 एपिसोड साइन कर लिए हैं .खाने की फील्ड में और भी कोई काम हो तो मई उसके लिए भी तैयार हूँ .इसके अलावा होम इंटीरियर और ट्रेवल का भी शौक है .ये मेरे इंटरेस्ट के फील्ड हैं . मैं अपनी किताब का प्रमोशन भी कर रही हूँ . लेकिन अभी मैंने अपने काम से थोड़ी छुट्टी ले ली है और मई खाली समय को एन्जॉय कर रही हूँ .

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दो बच्चों की माँ होने के नाते एक सलाह जो आप हमारे रीडर्स को देना चाहेंगी जो पहली बार माँ बनी हैं या माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं .

सबसे पहले अगर आपको अभी बच्चे नहीं चाहिए तो गर्भवती न हों . एक महिला के तौर पर सबसे पहला काम आपको यही करना चाहिए . बच्चे तभी हों जब आपको लगे क्योंकि आपके बच्चे हमेशा आपके बच्चे बनकर ही रहेंगे .माँ बनना आसान नहीं है इसीलिए ये फैसला सोच समझ कर लें .

सिर्फ सोसाइटी के वजह से या उम्र बढ़ने के कारण बच्चे को जन्म न दें . आपको माँ तभी बनना चाहिए जब आप उसके लिए बिलकुल तैयार हों क्योंकि आप इस कदम को वापस नहीं ले सकती हैं .ये आपके चेहरे पर एक टैटू कराने जैसा है , इसीलिए बेबी तभी हों जब आप चाहती हों ,