मैं ‘ठीक-ठाक’ मम्मी हूं और मुझे इससे कोई समस्या नहीं है

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मैं एक साधारण मध्यम-वर्गीय परिवार में पली बढ़ी जहां सीमित संसाधन होते थे और बजट भी बंधा हुआ होता था

मैं बिल्कुल इस बात को स्वीकार करती हूं कि मैं ठीक ठाक पैरेंट हूं। मैं कई पैरेंट्स की तरह अच्छे माता-पिता के कॉम्पिटिशन को नहीं मानती जो हम अक्सर स्कूल इवेंट, पैरेंट-टीचर मीट, हॉबी क्लास या सोसाइटी कंपाउंड में देखते हैं।

मैं एक साधारण नॉर्मल मां हूं जो सारा दिन काम और बच्चों की देख रेख में गुजारती है और जिंदगी में जैसे हो जाता है उसे स्वीकार करती हूं।

मेरा अभी जिंदगी को एक कॉम्पिटिशन की तरह देखना बाकी है। सच्चाई ये है कि ये चीजें कैसे चेहरे पर मुस्कुराहट लाती है ये भी समझना बाकी है। मैं एक साधारण मध्यम-वर्गीय परिवार में पली बढ़ी जहां सीमित संसाधन होते थे और बजट भी बंधा हुआ होता था। लेकिन इनसब के बाद भी मेरे पैरेंट्स मुझे ये सही संस्कार और मूल्य देने में कामयाब रहे जिसपर मुझे गर्व है और मैं अपने बच्चों को भी दे रही हूं।

मैं बिल्कुल निश्चिंत रहती हूं...

मैं कई खुशियों पलों के देखते हुए बड़ी हुई हूं, हमने बहुत सारा समय साथ बिताया है। छोटी छोटी बातें हमें परिवार के तौर पर जोड़ती थी। मुझे आप एहसास होता है कि मेरे पैरेंट्स ने कभी मुझे या मेरे भाई को अच्छे नंबर लाने का दवाब नहीं डाला और ना तो हमें किसी हॉबी क्लास में डाला। उन्होंने हमें ऐसे तैयार किया था कि हम पढाई करना और आगे बढ़ना चाहते थे।

हम खुद को प्रूव करना कहना चाहते थे कि हमारी क्या क्षमता है और हम जीतने के लिए कितनी मेहनत कर सकते थे।

आज मैं दो बच्चों की मां हूं और मेरे बाकी दोस्त जो पैरेंट्स हैं उन्हें देखने के बाद लगता है कि मैं बिल्कुल रिलैक्स हूं। कई बार मैं अपनी बच्चों की प्रोजेक्ट में मदद करना भूल जाती हू। मैं उनके स्कूल ड्रेस अगले दिन के लिए सेट करना भूल जाती हूं। कभी कभी जरूरी कागज भी इधर उधर हो जाते हैं, स्कूल मेल भी चेक नहीं करती हूं। कभी कभी उन्हें थोड़ ज्यादा टीवी भी देखने देती हूं, कभी कभी जंक फुड भी खाने देती हूं, कभी अगर वो ना नहाना चाहें तो जोर नहीं देती (आप मुझे आंक रहे होंगे...है ना) और तो और उन्हें बिना ब्रश किए सोने भी देती हूं।

लेकिन मैं ये कभी नहीं भूलती...            

हां मैं ये सब कई बार भूल जाती हूं या इग्नोर करती हूं लेकिन कई बातें हैं जो मैं कभी नहीं भूलती हूं और वैल्यू/मूल्य हैं।

  1. टेंशन नहीं : ये सबसे पहली चीज है जो मैं करती हूं और अपने बच्चों को भी सिखाती हूं। किसी भी चीज को इस तरह से नहीं लेना चाहिए कि स्वास्थ्य पर असर पड़े या अवसाद की ओर ले जाए। जिंदगी चलते रहती है और अगले दिन फिर से अवसर आएंगे।
  2. पढ़ाई : मुझे हमेशा से अपने दादा/दादी, मम्मी की तरह पढ़ना पसंद है और अब मेरे बच्चों को भी बच्चों को भी। ये बहुत महत्वपूर्ण काम है जो मुझे मेरे बच्चों से जोड़ती है और हम ढेर सारी बेहतरीन यादें बनाते हैं।
  3. धन्यवाद और सॉरी : ये दो शब्द कभी फैशन से बाहर नहीं हो सकते। मेहनत की तारीफ करना या उन्हें एहसास दिलाना कि उन्होंने क्या किया है, गलतियों को स्वीकार करना कुछ बातें है जो जिंदगी के बहुत जरूरी मुल्य हैं।
  4. बातचीत : आप जिससे बहुत प्यार करते हैं उनसे कितनी भी बातें कर लें कम ही लगेगा और ये मेरे और मेरे बच्चों पर सटीक बैठती है। हम हमेशा बात करते हैं कि हमें कैसा लगा, हम क्या करना चाहते हैं और क्या नहीं।

मैं हमेशा उनसे कहती हूं कि मैं उनपर कितना गर्व महसूस करती हूं। वो बहुत जल्दी बड़े हो जाएंगे और टीन एज में चले जाएंगे।

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Source: theindusparent

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