मैं एक 34 साल की मां हूं और ‘बड़ा होना’ पसंद नहीं!

मैं एक 34 साल की मां हूं और ‘बड़ा होना’ पसंद नहीं!

“तुम शादी शुदा नहीं लगती” जैसी लाइन तो मैं पहले अक्सर सुनती थी और अब ‘तुम मां जैसा व्यवहार नहीं करती’ कॉमन है।

मैं जब भी को सोशल इवेंट में जाती हूं, मेरी मुलाकात एक दो ऐसी आंटी से हो जाती है जो ये जानने में दिलचस्पी लेती हैं कि मैं सिंदूर नहीं लगाती और चुड़ियां नहीं पहनती फिर वो मैं कैसी हूं या हाल चाल लेती हैं।

“तुम शादी शुदा नहीं लगती” जैसी लाइन तो मैं पहले अक्सर सुनती थी और अब ‘तुम मां जैसा व्यवहार नहीं करती’ कॉमन है।

मुझे समझ नहीं आता कि हर कोई ये उम्मीद क्यों रखता है कि शादी करने के बाद शादी शुदा दिखना जरूरी है। एक बार अगर आपके बच्चे हो गए तो आपको अपने बच्चों के सामने परिपक्व दिखना जरूरी है।

क्यों? क्यों हम अपने बच्चों के सामने बिंदास नहीं रह सकते? क्यों शादी या उम्र बढ़ जाने के बाद जो चाहें वो कपड़े नहीं पहन सकते?

मैं सबको बताना चाहूंगी कि मैं एक लाइन खींचना चाहती हूं और कहना चाहती हूं कि मैं ये चीजें नहीं करने वाली जो समाज मुझसे करने कहते हैं।

1. मैं शादी शुदा दिखने से इंकार करती हूं

दिवाली पूजा पर मैं तैयार हुई थी, एक आंटी ने तुरंत कहा कि मेरा गला खाली था। उन्होंने कहा कि मैं शादी शुदा हूं “गला क्यों खाली रखा है”। 
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बार बार ये सुनना काफी इरिटेटिंग है। क्यों हर वक्त शादी शुदा दिखना जरूरी है? इसलिए मैंने फैसला लिया कि सिंदूर नहीं लगाउंगी और चुड़ियां सिर्फ ये दिखाने के लिए नहीं पहनूंगी कि मैं शादी शुदा हूं। मैं इन्हें पहनती भी हूं या तैयार होती हूं तो ये मेरा मेरे पति के लिए प्यार होगा।

2. अपनी बेटी के सामने हमेश परिपक्व नहीं दिखना

कई बार ऐसे पल आते हैं जब खुद पर काबू पाना होता है और थोड़ी सख्ती बरतनी पडती है। लेकिन 60% केस में मैं उसके साथ वो चीजें करती हूं जिससे मेरे अंदर का बचपना खत्म ना हो। चाहे वो उसे गोद में लेकर बिस्तर पर खेलना हो, उसके साथ छुपम छुपाई खेलना हो या उसे पूरे एक्शन के साथ कहानी सुनानी हो। मुझे समझ नहीं बच्चों के सामने अच्छा व्यवहार से क्या मतलब होता है।अगर मुझे लगेगा कि पार्क में मैं अपनी बेटी के साथ दौड़ लगाऊ मैं एक बार भी ऐसा करने से पहले नहीं सोचने वाली।

3. मुझे जो अच्छा लगता है पहनती हूं

मुझे कपड़ो के साथ एक्सपेरीमेंट करना पसंद है चाहे वो साड़ी से लेकर शॉर्ट ड्रेस ही क्यों ना हो। शुरूआत में कई लोगों को इससे दिक्कत थी लेकिन अब सभी समझ गए हैं कि बाहरी रूप से आपका पहनावा कैसा है ये मायने नहीं रखता बल्कि अंदर से आप कैसे हैं ये मायने रखता है।मैं अपनी बेटी को भी यही सिखाती हूं।

4. मुझे हमेशा बेफिक्र होकर डांस करना पसंद है

हां, मैं ऐसा करती हूं जबकि कई बार ऐसा हुई कि मेरे ससुराल वाले और रिश्तेदारों को मेरी डांस करने से समस्या हुई। लेकिन मुझे डांस करना पसंद है और इतना पसंद है कि मैं किसी की नहीं सुनती।

 
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5. अपने उम्र के मुताबिक व्यवहार हमेशा नहीं कर सकती!

प्लीज...मुझसे उम्मीद ना रखें कि मैं एक कोने में बैठकर अपने पड़ोसियों या सोसाइटी की बाकी औरतों के मेकअप, कपड़े और रेसिपी के बारे में बातें करूं। बिल्कुल भी नहीं।

6. मैं अपना आधा दिन किचन में नहीं बिता सकती

मुझे पता है कि कैसे एक भारतीय महिला को खाने बनाने में दिलचस्पी नहीं है। मैं मिनटों में कई अच्छे पकवान बना सकती हैं, मैं अपना आधा दिन किचन में नहीं बिताना चाहती। अब समय आ गया है कि हम महिलाएं ये समझें कि जिंदगी किचन में जिंदगी बिताने के इतर भी है।

7. आखें बंद कर हर परंपरा को नहीं मानती

पिछले साल दिवाली के दिन मेरा पीरियड्स आया, लेकिन मैं फिर भी पूजा की और सारे नियम निभाए। मुझे आज तक पीरियड्स के दौरान पूजा स्थान पर ना जाने का कॉन्सेप्ट समझ नहीं आया।

ना ही इसका आज तक कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। अब समय आ गया है कि आप आगे बढ़ें और सोच समझकर परंपराओं को निभाएं ना की बच्चों के लिए निभाए।क्या आप ऐसा नहीं सोचते?

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Source: theindusparent

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