“मैंने लव मैरिज की थी...लेकिन मुझे अफसोस है”

मुझे चिंता अपने पति के दब्बू स्वभाव की होती है जिस वजह से मेरी नजरों में उनकी इज्जत कम हो गई है।

मेरी कहानी क्लासिक हैहम कॉलेज के समय से एक दूसरे के साथ थे। मैं पहली बार उन्हें यूनिवर्सिटी फेस्ट में देखी थीएक साल सीनियर थे। हम एक दूसरे से मिलेदोनों को कुछ अलग एहसास हुआ और उन्होंने मुझे कॉफी डेट के लिए पूछा। हम पहले दोस्त थे फिर एक दूसरे से प्यार करने लगे और हमेशा साथ-साथ रहते थे।

कॉलेज खत्म होने के बाद पहली जॉब मिलते ही हम अपनी जिंदगी साथ साथ बिताने के सपने देखने लगे। इसलिए हमने कम उम्र में शादी करने का फैसला किया और हां हमारी शादी में भी फैमिली ड्रामा हुआ था।

मेरे पैरेंट्स को कई आशंकाएं थी लेकिन हमने हर तरह की बाधाओं को पार किया और अपनी जिंदगी साथ बिताने के लिए तैयार थे।

 

एक जिंदगी जिसका सपना हमने पांच सालों तक देखा था। जब तक हनीमून पर नहीं गए हम दोनों को लग रहा था हम जन्नत में हैं। लेकिन मैंने अपने पति में कुछ बातें नोटिस की जो मैंने पहले नहीं देखा था।

हर बात पर मम्मी..मम्मी

मुझे एहसास हुआ कि वो अपनी मम्मी से चिपके रहने वाले हैं। उनकी मां ने बोला था कि हम जहां भी रहें बताते रहे क्योंकि उन्हें सुरक्षा की चिंता हो रही थी। वो हनीमून पर हर 2-3 घंटे में अपनी मां को फोन करते रहते थे।

मैं कुछ बढ़ा चढ़ा कर नहीं बोल रही लेकिन हमारे हनीमून पर सबसे जरूरी मम्मी को बार बार कॉल करना था। हमलोगों ने जो भी किया उसकी सूचना पहले मम्मी को दी गई।

'मम्मी अब खाने जा रहे हैं;' 'मम्मी अब हम वॉटरफॉल देखने जा रहे हैं; ' 'मम्मी अब हम प्यार करने जा रहे हैं;' ..हां आखिरी लाइन तक हालात नहीं आए थे (भगवान का शुक्र है वरना मम्मी जी आकर हनीमून से वापस ले जातीं)

मैं थोड़ी शॉक्ड थी कि ये क्यों हो रहा है। हमारे वापस आ जाने के बाद भी ये चीज लगातार कायम रही। हम अलग अलग शहरों में थे लेकिन मम्मी जी हर दिन फोन पर मेरे पति से घंटो बातें करती थीं।

अगर आप ये सोच रहे हैं कि मैं चुगली करने वाली बहू हूं जो शादी होते ही ससुराल वालों को अपने हिसाब से चलाना चाहती है तो मैं आपको कुछ उदाहरण दे रही हूं कि ज्यादातर बातें कैसी होती थी।

मम्मी जी हैलो बेटातुम इतनी कमजोर आवाज में बोल रहे होक्या ठीक से खाना नहीं खा रहे। मैं समझ सकती हूं कि तुम्हारी पत्नी को अच्छा खाना बनाने नहीं आता लेकिन झेल लो। जब मैं आऊंगी तो सिर्फ तुम्हारी फेवरिट डिश बनाऊंगी।

पति:  'नहीं मम्मी मैं ठीक से खा रहा हूं लेकिन आपके हाथ का खाना खाने में बहुत मजा आएगा।'

 
husband's earnings

मम्मी जी:  'हैलो बेटातुम्हारी बुआ की बेटी की शादी हुई लेकिन तुम्हारे ससुराल वालों ने फोन करके तुम्हारे पापा से बात करना भी उचित नहीं समझा। अगर तुम्हारे सास ससुर हमारी इज्जत नहीं करते तो पता नहीं बेटी को क्या सिखाया होगा।

पति: 'ओहचिंता मत कीजिए मम्मीमैं आरती (हां मैंको बोलूंगा कि उन्हें कॉल कर ले।

वो मुझे बोलती थीं कि "चूंकि तुम कामकाजी महिला हो इसलिए तुम्हें पता नहीं कि घर कैसे संभालते हैं।" "तुम्हारे मम्मी-पापा को कितना गर्व होता होगा कि तुमने मेरे बेटे को शादी करने के लिए राजी कर लिया।"

ये बदस्तूर जारी रहा और बढ़ते ही गया। जब उन्हें पता चला कि हम एक और कार खरीद रहे हैं वो भी मेरे लिए, तो उन्होंने ताना मारते हुए कहा कि ये मेहनत की कमाई की बरबादी है। लेकिन मेरे पति में इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वो अपनी मां को बोलें कि ये मेहनत की कमाई उनकी पत्नी की है।

पति के इस विनम्र स्वभाव के कारण चिंता होती है...

अगर पूरी कहानी को कम शब्दों में बताया जाए तो बाहर से देखने पर लग सकता है कि मेरी शादी में सबकुछ ठीक है। मेरे कहने का अर्थ है कि परेशान करने वाले ससुराल वालों की तो वैसे भी भारत में कोई बात ही नहीं करता। मुझे चिंता अपने पति के दब्बू स्वभाव की होती है जिस वजह से मेरी नजरों में उनकी इज्जत कम हो गई है।

जब मैं अस्पताल में प्रसव पीड़ा में थी और पति की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वो अपनी मां को फोन कर पल पल का हाल बताने में व्यस्त थे। जब हमने घर खरीदा तो एक पल बैठकर इस उपलब्धि को इंज्वॉय करने की जगह वो अपने घरवालों का टिकट बुक करने में व्यस्त थे ताकि वो घर आकर देख लें।

मेरे ससुराल वालों को मुझमें या मेरे बच्चों में कोई दिलचस्पी नहीं है और शायद ही कभी वो उनका हाल चाल लेते हैं। मेरे जन्मदिन पर या कोई खास मौके पर कोई मुझे फोन कर शुभकामना देना भी जरूरी नहीं समझते लेकिन मेरे पति उन्हें कॉल करने वाले पहले शख्स होते हैं।

इस रिश्ते में उन्होंने कभी कुछ गलत नहीं किया लेकिन वो कभी मेरे लिए खड़े नहीं हुए।मेरे पति मुझे वो स्थान और इज्जत परिवार में नहीं दिला सके जो एक बहू की होनी चाहिए। ज्यादातर पारिवारिक मसलों में मुझे नजरअंदाज किया जाता है।

यहां तक कि मेरे ससुर मुझे कहते हैं कि तुम दूसरे रूम में जाओ मुझे अपने बेटे से कुछ जरूरी बात करनी है। मेरे पति बस मुझे देखकर मुस्कुराते हैं और पलक झपकाते हैं। मैं बस नौकरों जैसा महसूस करके रह जाती हूं।

 

ऐसा नहीं है कि मैंने अपने पति से इस बारे में बात नहीं की लेकिन उन्होंने हमेशा यही कहा कि ये चीजें नुकसान नहीं पहुंचाती है। हां ये सच है कि ये बातें नुकसान नहीं पहुंचाती।मेरे ससुराल वाले मुझे आकर प्रताड़ित नहीं करते लेकिन जो गलत है उसे भी देखना चाहिए खासकर जब बात बहुत आगे बढ़ जाए।

क्या नए सदस्य को परिवार में नहीं अपनाना उत्पीड़न नहीं है? क्या अपने बेटे की पत्नी का उपहास उड़ाना गलत नहीं है? क्या बहू के पैरेंट्स की बार बार बेइजज्ती करना उत्पीड़न नहीं है? मेरे पति को ऐसा नहीं लगता और यही कारण है कि मुझे पछतावा है कि मैंने उनसे शादी की।

जब हमारी शादी हुई थी, ये लव मैरिज था, मुझे आशा थी कि उनके परिवार वाले मुझे अपनाएंगे और मेरे पति मुझे वो घर में वो जगह दिलाएंगे जो मेरी होनी चाहिए।

वो ये सब करने में नाकामयाब रहे। अगर ये अरेंज मैरिज होता है तो बात अलग थी लेकिन एक शख्स जिसने मुझसे वादा किया था और बड़े बड़े दावे किए थे वो मुझे चार दिवारी में इज्जत नहीं दिला सका। अगर लव मैरिज ऐसी होती है तो मुझे लगता है कि ऐसी लव मैरिज के बिना शायद मेरी जिंदगी ज्यादा बेहतर होती।

Source: theindusparent.com