मेरे रिश्ते मेरे सास-ससुर से भले अच्छे ना हो लेकिन मेरी बेटी के हैं...

मेरी बेटी के लिए वो झटका था कि जिन दो लोगों को वो बहुत चाहती है उसकी मम्मी उन दो लोगों को पसंद नहीं करती

मैंने हमेशा कोशिश की मेरे रिश्ते मेरे सास ससुर से जैसे भी रहें लेकिन इसका असर मैं अपने बच्चों और उनके दादा-दादी के रिश्ते पर नहीं पड़ने दूंगी।

एक नई बहु के तौर पर मैंने बहुत कोशिश की रिश्ते अच्छे बने रहें लेकिन लगभग 1 दशक की कोशिश के बाद मैंने फैसला किया कि अब बस बहुत हो गया और बस सबकुछ खत्म। वो दिन जब मुझे बेइज्जती और नफरत का एहसास हुआ, ऐसा लग जैसे मेरे अंदर कुछ भी नहीं बचा हो।

मैंने सबको अपनी भावनाओं के बारे में बताया। मैंने अपने ससुराल वालों और पति को बोला अगर अगली बार उन्होंने कुछ ऐसा किया तो मैं पड़ोसियों की मदद या पुलिस के पास जाने से पहले एक बार भी नहीं सोचूंगी। जाहिर है ये स्थिति नॉर्मल नहीं थी।
 कोई भी खुश नहीं था।लेकिन उस समय या आज भी मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

एक मैच्योर बच्चा होने के कारण मेरी बेटी को समझ आ गया कुछ गलत हुआ। उसकी मम्मा खुश नहीं थी। उसे पता था कि उसकी मां कभी गलत या कठोर व्यवहार नहीं करती, उसे दिख रहा था कि सबकुछ सही नहीं है। कुछ दिनों बाद ही उसने मुझसे पूछा कि क्या हुआ है। उसने पूछा कि क्या दादा-दादी से मेरा झगड़ा हुआ है या मैं अब उनसे प्यार नहीं करती।

मैंने कहा कि मैं उसके दादा-दादी से प्यार नहीं करती..

ऐसा कहकर मुझे बहुत गर्व नहीं हो रहा था लेकिन मुझे लगा कि यही समय है कि उसे सच्चाई दिखाई जानी चाहिए। कुछ भावनाएं ऐसी होती हैं जिन्हें आप झुठला नहीं सकते। मैंने उसे सारी सच्चाई बता दी कि और कहा कि उसके दादा दादी भी उसकी मम्मी के बारे में कुछ ऐसा ही सोचते हैं।

वो मुझसे ना तो प्यार करते हैं और ना मुझे पसंद करते हैं। ये कड़वा था लेकिन मैंने उसे ये भी बताया कि भले हम किसी से प्यार ना करते हैं लेकिन उनकी आदर करनी चाहिए और उनकी जरुरतों का ध्यान रखना चाहिए।

मैंने हमेशा ख्याल रखा कि वो समय से खा लें, आराम करें और मैंने उनसे जब भी बात कि पूरे आदर के साथ की। मेरा ससुराल वालों से जो भी इश्यू रहा हो मैंने हमेशा कोशिश की मैं कभी उनके साथ गलत व्यवहार ना करुं। उस एक घटना के बाद ना तो मैंने कभी उनके साथ गलत व्यवहार किया और ना ही कुछ गलत बोला।

बेशक मेरी बेटी के लिए वो झटका था। उसे टेंशन थी कि जिन दो लोगों को वो बहुत चाहती है उसकी मम्मी उन दो लोगों को पसंद नहीं करती जो उसकी जिंदगी में बहुत मायने रखते हैं उसके दादा और दादी।

उसने मुझसे पूछा...

मैंने उससे समझाया कि ये जरुरी नहीं कि आप हमेशा सामने वाले की बातों से वास्ता रखते हों।हो सकता है कोई ऐसी बात कर दे जो आपको इतना दुख पहुंचाए कि आप उस इंसान से बात नहीं करना चाहते हों।

मैंने उसे अपना पक्ष बताया लेकिन साथ मैंने ये भी समझाया कि वो जैसे रिश्ते चाहे अपने दादा दादी से रख सकती है। वो जितना चाहे अपने दादा दादी से प्यार कर सकती है मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगेगा। मुझे नहीं पता कि आप कैसे इस तरह की अपने ससुराल वालों और बच्चों के बीच की स्थितियों को संभालते हो। मैं चाहुंगी कि आप मुझे जरुर बताएं।

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Source: theindusparent