“मेरी सासू मां हमेशा मेरी परवरिश के तरीकों में गलतियां निकालती हैं..मैं चिढ़ जाती हूं”

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मैं समझ गई हूं कि उनका मिशन पोते की चिंता कम और मुझे गलत साबित करना अधिक है और इसके लिए वो मेरे बेटे का इस्तेमाल करती हैं।

कल मैं अपने तीन साल के बेटे पर हाथ उठाई और उसके बाद आधे घंटे तक रोते रही। ये पहली बार था जब मैंने इतनी जोर से उसे पीटा था लेकिन सच्चाई ये है कि गलती उसकी कम थी और मेरा कुंठाग्रस्त होना अधिक बड़ा कारण है जिस वजह से मैं उसके ऊपर हाथ उठाई।

मेरी सासू मां भी मेरे साथ रहती हैं और ऐसा लगता है कि उनकी जिंदगी का एक ही मकसद है -  मेरे बेटे की परवरिश के तरीकों में मीन मेख निकालना। इसकी शुरूआत तभी हो गई थी जब उसका जन्म हुआ था।

हमारे घर ऐसा रिवाज नहीं है

मैं उसके लिए कुछ भी करना चाहती थी तो यही बोलती हैं कि हमारे घर ऐसा रिवाज नहीं है

जब वो कुछ महीनों का था तो वो चाहती थीं कि मैं उसे एक चम्मच शहद रात में दूं। मैं हमेशा कहती थी कि डॉक्टर ने एक साल के पहले शहद देने को नहीं कहा है। शहद एक तरह का बोटुलिज्म होता है अर्थात एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए टॉक्सिक हो सकता है। लेकिन उनका जवाब हमेशा यही होता था कि मुझे साइंस मत बता, चार बच्चे पाले हैं

ये हर रोज बहस का मुद्दा बन गया और मैं और मेरे पति उनसे झूठ बोलने लगे कि हम उसे रोज शहद देते हैं। मैं ज्यादातर अपने बच्चे का स्तनपान कराती थी और बाहर का दूध भी देती थी। मेरे इस फैसले की वजह से उन्हें लगता है कि उसकी हड्डियां कमजोर हैं। वो जब भी घर में दौड़ता है वो मुझे ताने मारती हैं कि वो धीरे दौड़ता है क्योंकि मैं नकली दूध देती थी।

जब मैं उसे स्कूल जाने के लिए समय से पहले उठाती हूं ताकि वो अच्छे से समय लेकर खा सके लेकिन वो मुझे कहती हैं कि मैं बच्चे को आराम करते भी नही देख सकती। मैं अगर उसे पार्क खेलने के लिए जाती हूं तो उन्हें लगता है कि मैं उसके बहाने पड़ोसियो से बात करने जाती हूं। 

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वो मुझे हमेशा गलत साबित करने की कोशिश करती हैं

जब बच्चे को दाल देती हूं तो उन्हें लगता है कि मुझे अधिक सब्जी देनी चाहिए और जब मैं सब्जी देती हूं तो उन्हें लगता है कि वो दूध कम पी रहा है। कुल मिलाकर मैं समझ गई हूं कि उनका मिशन पोते की चिंता कम और मुझे गलत साबित करना अधिक है और इसके लिए वो मेरे बेटे का इस्तेमाल करती हैं।

वो कभी कभी मेरे पति के सामने रोती भी हैं कि वो अपने पोते को इतना प्यार करती हैं कि उसके प्रति किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं कर सकती। वो शायद ही कभी घर में खाना बनाती हो लेकिन अगर वीकेंड पर हमलोग डिनर के लिए जाएं तो वो अपने बेटे की पसंदीदा व्यंजन बनाती हैं ताकि वो घर में रहें।

इन वजहों से मेरी खुशियां बर्बाद हो रही है और मैं अपना गुस्सा अपने बेटे पर निकालने लगी हूं जो गलत है। मेरे पति कहते हैं कि मुझे इन बातों को नजरअंदाज करना चाहिए लेकिन जब मैं उनके साथ 24 घंटे रहती हूं और मैं कामकाजी महिला भी नहीं हूं तो मैं चाहकर भी नजरअंदाज नहीं कर सकती हूं।

मेरे साथ बाकी माएं मेरी मदद करें और सही उपाय बताएं। मैं अपने बच्चे को इस सास-बहू के झगड़ों की वजह से प्रभावित होने नहीं दे सकती हूं।