मेरी माँ के नाम एक खत ...

Mother's Day के अवसर पर किरण मनराल और रुचिता दार शाह की तरफ से अपनी माँ के नाम एक प्यार भरा पत्र

लेखिका किरण मनराल की तरफ से उनकी मां के लिए ख़त

प्रिय मां,

मुझे आज कुछ एक बात कुबूल करनी है। मैं बिल्कुल आप जैसी हो गई हूं। इस बात का आभास मुझे जब हुआ तो वो बाकी सारी बातों के अहसास जैसा नहीं था। इस बात का आभास होते ही मैं शांत चित्त नहीं हो पाई। ये आभास, हर बात की तरह सामान्य नहीं था। ये एहसास इतना प्रभावशाली था मानो किसी ने दिमाग पर हथौड़े मार दिए हों। एकदम अचानक से। और फिर आपको सब कुछ बिल्कुल साफ दिखाई देने लग जाए।

ये उस शाम हुआ जब जॉडिंस पीड़ित आपकी आखों का तारा खुद का मन लगाने के लिएं पूरे घर मे इधर उधर कर रहा था । वो आगे होने वाले खतरों से अनजान अपने धुन में था और ताली के साथ आवाज आती है तुम ये करना अभी बंद करो और थोड़ा रुककर एक और शब्दवरनाजो उसके ही अच्छे के लिए था बस उसी क्षण वो मेरी भी आवाज बन गई थी। लेकिन मेरे बच्चे में  उस वरना..का डर नहीं है बल्कि वो पीछे पलटकर पूछता हैवरना...क्या’?

mother's day

ये पीढ़ी सुपरहीरो को देखकर बड़ी हो रही है जो दानव एलियन से लड़ते हैं और WWE रेसलर जो एक दूसरे को मारने के लिए जी जान लगा देते हैं। ये सब देखने के बाद उनके मन में वरनाका डर नहीं रह जाता है। आपको कुछ और दमदार धमकाने वाले शब्दों को खोजना पड़ेगा जो मैं भी इस्तेमाल कर सकूं।

मैं जब बोलती हूंजो भी प्लेट में है खत्म करो, कई बच्चे हैं जो भूखे रह जाते हैं, केला खाने के बाद पानी मत पियो पेट दर्द होगातो ऐसा लगता है आपकी आवाज सुन रही हूं। छींक आने पर गॉड ब्लेस यू कहना, सीधा बैठो वरना जोर का लगाऊंगीमैं यही सब सुनते हुए बड़ी हुई थी। और इनके अलावा जल्दी सोएं और जल्दी जागें का पाठ और इन सब के बाद वो क्लासिक लाइन तुम्हें कुछ नहीं हुआ है जाओ पानी पियो सब ठीक हो जाएगा। ये मेरे काफी काम आया ।

मॉम आपको पता नहीं मुझे हैंडल करना आपके लिए आसान था। मैं कहावतों में रहने वाले लोगों में विश्वास करने वाली बच्ची थी। अंधेरे के बाद मैं कभी नहीं खेलती थी क्योंकि मुझे डर था कि बोगीमैन मुझे आकर  खा लेगा। आज के बच्चे बोगीमैन पर हसेंगे।मुझे जितना पढ़ना चाहिए था मैं उतनी पढ़ाई नहीं कर ती थी, स्कूल भी मैं लगातार नहीं जाती थी।

mother's day

मैं आपकी शुक्रगुजार हूं कि आपने मैं आधी भी आपके जैसी मां अपने बच्चे के लिए बन पाई। मैं आशा करती हूं कि उसकी भी वैसी परवरिश कर सकूं जैसी आपने मेरी की।

ढेर सारा प्यार

K


किरण मनराल फुल टाइम मॉम बनने से पहले एक पत्रकार थीं। उनके ब्लॉग भारत के सबसे टॉप ब्लॉग में आते थे और लैंगिक मुद्दों पर वो तहलका ब्लॉगर स्तम्भ लेखिका थीं।


रूचिता डार शाह का अपनी मां के नाम खत

हैलो मां..

याद कीजिए जब मैं 5, 6, 7,8 या 9 साल की थी और आपको सॉरी कॉर्ड्स देती थी। जैसे ही मुझे एहसास होता कि कुछ गलत हुआ है और आपसे डांट पड़ सकती है तो मैं “मम्मी आई एम सॉरी, आई लव यू” लिखती थी। मैं अपनी टीनएज के दिनों तक सॉरी नोट्स लिखा करती थी बस हर साल भाषा सुधर जाती है और नोट्स अधिक अर्थपूर्ण हो जाते थे।

अब मैं आपके बारे में सोचती हूं तो लगता है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि मैं काफी नटखट बच्ची हुआ करती थी। सच बताऊं तो मैं सिर्फ सॉरी कार्ड्स नहीं बहुत ही खूबसूरत बर्थडे कार्ड भी बनाती थी। और एक बात बताऊं तो मै सच में काफी क्षमाप्रार्थी हूं कि मैंने इतनी सारी शैतानियां की हैं।मुझे वो कार्ड्स बनाना बहुत अच्छा लगता था और मैं अपनी कलात्मक इंटरेस्ट को निखारती थी। एक और बात जो मुझे बहुत अच्छी लगती थी कि आप सभी मेरे बनाए कार्ड्स को अपनी सिल्क साड़ियों के बीच में रखती थीं जिनमें से हमेशा आपके फेवरिट परफ्यूम L’air Du Temps  की खुशबू आती थी। आज भी मुझे जब वो खुशबू आती है तो आपके आसपास होने का एहसास होता है।

Mother's dat

बदकिस्मती से मेरे नटखट बच्चों को शैतानी उन्हें मां से विरासत में मिली है लेकिन कार्ड्स बनाने की कला मुझसे विरासत में नहीं मिली है जिसमें इंग्लिश गलत लिखी हो लेकिन इमोशन बहुत सारा होता था। ज्यादा से ज्यादा मैं सॉरी या आई लव यू मैसेज की उम्मीद कर सकती हूं। सिल्क साड़ी को मैं मिस करती हूं। मेरे पास कई साड़ियां जिन्हें मैंने संभाल के रखा है कि शायद एक दिन मुझे भी कुछ मिले।

मैं तो फिलहाल इंतजार कर रही हूं कि कब मेरे बेटे मुझे कार्ड्स बना कर देंगे लेकिन मैं ये भी याद करने की कोशिश कर रही हूं कि आखिरी बार मैंने कब आपके लिए सॉरी,बर्थडे या मदर्स डे कार्ड बनाया था। मैं याद करने की बहुत कोशिश कर रही हूं लेकिन मुझे कुछ भी याद नहीं आ रहा है और मुझे इससे काफी दुख हो रहा है।

सिर्फ इसलिए कि मैं खुद भी एक मां बन गई हूं इसका ये मतलब नहीं कि मैं अब आपकी बेटी बनकर रहना छोड़ दूंगी।बचपन की मेरी शैतानियां बड़े होने के बाद होने वाली लड़ाईयों से ज्यादा अच्छी थी। मैं एक मजबूत मां की मजबूत बेटी हूं। हमारा रिश्ता काफी अच्छा है।

mother's day

आज मदर्स डे है और मैं ये ख़त आपको सॉरी बोलने के लिए लिख रही हूं जो मैं खुद एक मम्मी बनने के बाद नहीं लिखी हूं। मैं आज आपको सॉरी बोल रही रहूं उन दिनों के लिए जब मैं अपने बच्चों की मां बनकर रह गई, आपकी बेटी हूं ये भूल गई। मुझे नहीं पता कि मुझे अपने बच्चों से कभी हाथों का बना सॉरी कार्ड मिलेगा या नहीं लेकिन मुझे ये पता है कि आपको ये ख़त साड़ियों के बीच ही मिलेगा।

ढेर सारा प्यार

रूचि

रूचिता डार शाह फर्स्ट मॉम क्लब की संस्थापक और दो बेटों की मां हैं। वो विज्ञापन इंडस्ट्री में काम करती हैं और हमेशा खुश रहने वाली मां है। वो बिल्कुल रूढ़िवादी विचारों से हटकर हैं जिन्हें खाना बनाना पसंद नहीं है।

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Source: theindusparent