"मेरा ‘वॉटर ब्रेक’ हो चुका था लेकिन मैं समझ नहीं पा रही थी की कि मै प्रसव में हूं!"

lead image

"मैं दिन रात एक बेबी को जन्म देने के ख्याल से ही डर रही थी। मेरी डिलिवरी की तारीख 21 मार्च थी और मैंने उल्टी गिनती 22 फरवरी से ही शुरू कर दी थी।"

मैं दिन रात एक बेबी को जन्म देने के ख्याल से ही डर रही थी। मेरी डिलिवरी की तारीख 21 मार्च थी और मैंने उल्टी गिनती 22 फरवरी से ही शुरू कर दी थी।

दो पतली लाल रेखाएं कैसे एक महिला की जिंदगी बदल देती है ये अकल्पनीय है। पिछले साल जुलाई का महीना था और मुझे लगभग 10 दिनों से शक हो रहा था लेकिन फिर भी प्रेग्नेंसी टेस्ट करने की हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि मैं इतनी बड़ी जिम्मेदारी से डर रही थी।

किसी तरह मैंने हिम्मत की और जब पाया कि मैं वाकई प्रेग्नेंट थी, मेरी आखों में आंसू आ गए। मैं ये खुशखबरी अपने पति को देना चाहती थी लेकिन मैंने शाम तक किसी तरह इंतजार किया।

तीसरे ही महीने में मुझे महिला रोग विशेषज्ञ डॉ सोनी ने पूरी तरह से बेड रेस्ट करने को कहा क्योंकि मुझे बहुत अधिक लाल निशान हो रहे थे। इस वजह से मैं काफी चिड़चिड़ी भी हो गई। मैं घर के बाहर जाना चाहती थी।

गर्भावस्था में योगा वरदान था 

esha-1

चीजें पहले से बेहतर हो गई थी और डॉ सोनी ने मुझे रोली योगा क्लास जाने के लिए कहा।ये मेरे घर के पास था और मेरे कई दोस्तों ने भी सलाह दी थी इसलिए मैंने ट्रायल क्लास लिया और पाया कि उनके योगा सेशन से काफी साकारात्मक ऊर्जा मिलती थी। मैंने पैरेंटल क्लास शुरू कर दी। 

esha2

कहने की जरूरत नहीं है कि उनके सेशन के बाद मैं इतनी साकारात्मक महसूस करती थी कि मैं कोई भी क्लास नहीं छोड़ती थी। उन्होंने मेरे हार्मोनल असंतुलन की समस्या को भी दूर करने में मदद की।

दुर्भाग्यवश, सातवें महीने में मैं गर्भावस्था डायबिटीज की शिकार हुई। इसके बाद डॉ सोनी ने रोली को पूरी गंभीरता के साथ मेरे केस को देखने के लिए कहा। उन्होंने मुझे डाइट और फिटनेस रूटीन पर रखा।

तीसरे तिमाही में वर्कआउट...

इन सब के बीच, मेरा परिवार नहीं स्वीकार कर पा रहा था कि एक गर्भवती महिला को डाइट पर रखा गया था और तीसरे तिमाही में वर्कआउट करने कहा जा रह। उन्हें पता नहीं था कि इसी दिनचर्या की वजह से मैं प्रसव पीड़ा को बर्दाश्त कर पाऊंगी।

मेरे वर्कआउट रूटीन में 50 स्कॉवट्स, डक वॉक शामिल थे जो गर्भावस्था के लिहाज से मुश्किल था। लेकिन मुझे मेरे प्रशिक्षक से काफी सपोर्ट मिला । यहां तक की उन्होंने पापा बनने जा रहे सभी लोगों के लिए भी एक सेशन रखा और आखिरी समय में प्रेग्नेंसी का पूरा महौल बनाया और प्रशिक्षण भी दिया कि इस इमरजेंसी में वो क्या करेंगे।

मैं दिन रात एक बेबी को जन्म देने के ख्याल से ही डर रही थी....

मेरी डिलिवरी की तारीख 21 मार्च थी और मैंने उल्टी गिनती 22 फरवरी से ही शुरू कर दी थी। मेरे पति ने पहले ही भविष्वाणी कर दी थी कि बेबी जन्म की तारीख से पहले 6 मार्च तक आएगा। 5 मार्च को मेरे पति को पुणे जाना था और वो बार बार पूछ रहे थे कि क्या उन्हें मुझे छोड़कर जाना चाहिए ।

 
esha3

मुझे इस बात पर हंसी आ रही थी और मैंने बोला कि कोई संभावना नहीं है मुझे एरियन (मेष राशि) बेबी होगा। मैं मेष राशी की हूं और कुणाल  (मेरे पति) मीन और बेबी की डिलिवरी की तारीफ 21 मार्च दी गई थी।

मेरा वाटर ब्रोक हुआ लेकिन मैं आश्वस्त नहीं थी...

5 मार्च की रात में आराम से नहीं सो पा रही थी। सुबह 6 बजे हल्का रिसाव होने लगा लेकिन मैं आश्वस्त नहीं थी कि मेरा वाटर ब्रोक हुआ था या ये यूरीन था। चूंकि काफी सुबह थी इसलिए 9 बजे तक पूरे धैर्य के साथ थी फिर अपने योगा मास्टर को फोन किया और पूरी बात बताई।

उन्होंने कहा भगवान को मीठा टेको और अस्पताल जाओ..तुम अब तैयार हो। मेरे पति साथ मे नहीं थे इसलिए मैं घबरा गई लेकिन मेरे ससुराल वाले मुझे अस्पताल ले गए। अस्पताल में डॉक्टर ने कहा कि मेरा वॉटर ब्रोक हो गया है और मैं कभी भी डिलिवर कर सकती हूं।

उन्होंने मुझे दवाई दी लेकिन कुछ नहीं हुआ। दूसरी बार दवाई के बाद धीरे धीरे दर्द शुरू हुआ और मैंने कहा ये कहां दर्द हो रहा है..ये केकवॉक है

डॉ सोनी ने कहा कि आगे जो होने वाला है उसका इंतजार करो....

दर्द लगभग 3 बजे के बाद काफी तेजी से बढ़ते जा रहा था लेकिन अच्छी बात ये थी कि तब मेरे पति मेरे साथ थे, मेरी दोनों मां मेरा पीठ रगड़ रही थी जैसा कि योगा सेशन में बताया गया था।

दर्द धीरे धीरे बढ़ते ही जा रहा था। मैं लगातार कभी उठ रही थी कभी बैठ रही थी। मेरी मां ने कहा कि मैं उस दौरान बिल्कुल पागल हो गई थी। उन्होंने मुझे आराम करने के लिए कहा लेकिन मैं भी हार नहीं मानीं और रुम में घूम रही थी।कभी हंसाकर, कभी ध्यान भटकाकर मेरे पति ने पूरी शान्ति के साथ हर पल मेरा साथ दिया।

आखिरी खिंचाव...

लगभग 7:45 बजे तक दर्द बिल्कुल असहनीय हो गया था यहां तक कि हॉट बाथ टब में भी मुझे आराम नहीं था। मैं लगातार एपीड्यूरल के लिए बोल रही थी , लेकिन डॉक्टर का कहना था कि अब तक सिर्फ 1 सेमी का ही खिंचाव हुआ था। मैं काफी दुखी हुई लेकिन शांत रहने के अलावा मैं कर ही क्या सकती थी। दर्द को सहना नामुमकिन हो रहा था।मैं लगातार उनसे एपीड्यूरल लगाने बोल रही थी और फिर डॉक्टर ने बेबी की हार्टबीट चेक करने का निर्णय लिया।

हर खिंचाव के साथ हार्टबीट घट रहा था और फिर असिस्टेंट डॉक्टर ने डॉ सोनी को बुलाया जिन्होंने तुरंत मुझे OT में ले जाने और सी-सेक्शन के लिए तैयार करने को कहा। लेकिन मैं इसके लिए तैयाक नहीं थी। मैंने बहुत व्यायाम करने और स्कॉटिंग सीखने में काफी मेहनत की थी ताकि नॉर्मल डिलिवरी कर सकूं। हर पल दवाब बढ़ता जा रहा था और मैं प्रार्थना करने के साथ लंबी लंबी सांसे ले रही थी।

उसी समय डॉक्टर आई और चेक कर कहा 9सेमी खिंचाव और चिल्लाईं पोजिशन। मुझे और मेरे पति को समझ नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है। मुझे बिल्कुल पोजिशन में बिठाया और अगले तीन मिनट में बेबी आ गया और रोया..डॉक्टर ने भी कहा हो गया!!

Yes इट्स बेबी ब्वॉय, डॉक्टर ने कहा।

वो मेरी जिंदगी का सबसे बेहतरीन पल था। डिलिवरी असल में मेरे लिए केकवॉक ही थी और इसका श्रेय मेरे योगा प्रशिक्षक रोली मैम को जाता है।

मेरा बेबी कृषाय 6 महीने का हो गया है और वो मुख्यरूप से स्तनपान पर रहा। अपने बेबी को स्तनपान कराना किसी भी मां के लिए सबसे बड़ा गिफ्ट है। स्तनपान के दिन कभी लौट कर नहीं आएंगे और मैंने उस दौरान हर पल को जिया है।

theindusparent user ईशा भाटिया ने अपनी प्रसव की अविश्वसनीय कहानी हमारे साथ शेयर कीं। अगर आपके पास भी कोई कहानी हमें बताने या पाठकों के साथ शेयर करने के लिए है तो [email protected] पर जरूर भेजें।

इस आर्टिकल के बारे में अपने सुझाव और विचार कॉमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें | 

Source: theindusparent