Mums Beware! भारत सरकार ने इन Generally इस्तेमाल की जानेवाली दवाओं पर Ban लगा दिया गया है

 

भारत सरकार ने 344 फिक्स डोज कॉम्बिनेशन दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है- एक प्रतिबंध जो  फाइजर, अबोट ,ग्लेनमार्क फार्मा जैसी कंपनियों पर सीधे तौर पर असर डालेगा क्योंकि इनके प्रोडक्ट्स भारतीय बच्चों को संभावित जोखिम में दाल देते हैं .

फिक्स डोज कॉम्बिनेशन दवा क्या हैं ?

फिक्स डोज कॉम्बिनेशन दवाइयां दो या दो से अधिक दवाओं का एक मिश्रण होता है जिसमे दोनों एक निश्चित अनुपात में सम्मिलित होते हैं पर उनकी खुराक एक ही होती है । हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेषज्ञ समिति ने शक के दायरे में आनेवाले 6,000 से अधिक दवाओं की समीक्षा की थी.इसके अलावा कुछ दवाइयों को इसीलिए भी बन कर दिया गया क्योंकि वो एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पैदा करते थे . सरकार 500 और दवाओं को बैन करने की तैयारी कर रही है . टॉप की 5 केटेगरी की दवाइयां जो शक के दायरे में है वो है एंटी-डायबिटिक ड्रग्स, रेस्पिरेटरी ड्रग्स, अनाल्गेसिच्स, एंटीइन्फेक्टिव और गस्त्रो - इन्तेस्टिनल ड्रग्स .

इस लिस्ट में सबसे सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाइयां हैं :

  • विच्क्स एक्शन 50
  • क्रोसिं कोल्ड एंड फ्लू
  • कोरेक्स
  • चेरिकोफ़
  • नासिविओं
  • निमुलिड
  • डोलो
  • देकॉफ्फ़
  • ओ2
  • ओफ्लोक्स
  • कोफ्निल
  • डोलो कोल्ड
  • पेडियेट्रिक सिरप टी-98
  • टेडीकोफ्फ़

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को काउंटर कैसे करें ?

हालांकि इतने सारे बैन भारतीय दवाई उद्द्योग के लिए तो बहुत बड़ा नुकसां करेंगी लेकिन सच्चाई यही है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस आज के बच्चों में एक बहुत बड़ी समस्या बन गया है  ब्रिस्टल और इम्पीरियल यूनिवर्सिटी, लन्दन के शोध के मुताबिक आज के समय में आधे बच्चों की आबादी किस न किसी एंटीबायोटिक के लिए प्रतिरोधक है जिस वजह से भविष्य में उनपर कई तरह के इलाजों का कोई असर नहीं होगा .
दुनियाभर से लिए गये 80000 सैंपल में यही पाया गया की अधिकतर लोगों में एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा है .नई दिल्ली के पीएसआरआई हॉस्पिटल के स्त्री रोग विशेषज्ञ और इंडोस्कोपिक सर्जन और एमडी डॉ राहुल मनचंदा बताते हैं की " एंटीबायोटिक के अंधे इस्तेमाल ने एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बना ली है. भारत में इसका उपयोग व्यापक पैमाने पर होता है"
मनचंदा कुछ टिप्स बताते हैं जो हर माता पिता को बच्चे को एंटीबायोटिक्स देते समय ध्यान रखना चाहिए .
  • भारत में बच्चों को एंटीबायोटिक्स देने से पहले लोगों को पूरा एंटीबायोटिक कोर्स पूरा करने की आदत ही नहीं है जो की बहुत खतरनाक है .इसीलिए हमेशा डॉक्टर से सलाह के बाद ही दवाई लेनी चाहिए . उदाहरण  के लिए अगर डॉक्टर ने कहा है कोई दवाई पुरे 5 दिन तक लेनी है तो उसे पूरा करना चाहिए ना की 2-3 दिन में भूल जाना चाहिए . इससे एंटीबायोटिक्स के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ें लगती है .
  • दवाई की दूकान से बिना डॉक्टर के सलाह के कोई दवाई केमिस्ट के कह देने भर से नहीं ले लेनी चाहिए .
  • हमेशा ध्यान दें की छोटे मोटे इन्फेक्शन के लिए आप लो ग्रेड के एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करें .सीधे हाई डोज  लेना शुरू न करें .
बच्चों को खुला छोडें, उनके पार्क में, मिटटी में , कीचड़ में खेलने दें . प्राकृतिक रूप से उसकी इम्युनिटी बढायें .पेरेंट्स के तौर पर सजग रहें लेकिन ज्यादा ओवरप्रोटेक्टिव भी न हों ." - डॉ . मनचंदा

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