मां के साथ सोना शिशु के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक क्यूं...

मां और शिशु में एक अनमोल कनेक्शन होता है जो मां के साथ होने से नन्हे शिशु को आनंद की अनुभूति प्रदान करता है और वो एक सुकुन भरी नींद ले पाता है।

अगर आप अभी-अभी मां बनी हैं या जल्द ही इस खुशी को महसूस करने वाली हैं तो आपके लिए ये जानना बड़ा ही दिलचस्प होगा कि 9 महीने तक गर्भ में पलने वाला शिशु जब आपके करीब सो रहा होता है तब वो सबसे अधिक सहज और सुरक्षित महसूस करता है। मां और शिशु में एक अनमोल कनेक्शन होता है जो मां के साथ होने से नन्हे शिशु को आनंद की अनुभूति प्रदान करता है और वो एक सुकुन भरी नींद ले पाता है।

कई मांऐ तो शिशु को पालने में ही सुलाती हैं और कई जगह तो पारंपरिक तौर पर ऐसा किया जाता है। हलांकि हम में से कितनी ही यंग मॉम्स ऐसी होंगी जिन्हें अपने प्राईवेट स्पेस से बच्चे को हटाने की जल्दी होती है। लेकिन ये भी सच्चाई है कि जितनी आदत बच्चे को होती है अपनी मां के साथ लिपट कर सोने की, शायद आपको भी उसे अपने आस-पास महसूस करने की उतनी ही आदत हो गई होगी।

यकींन मानिए तो को-स्लीपिंग मां और बच्चे दोनों के लिए ही ज़रुरी होता है। जब तक बच्चे ठीक से बोलना और चलना ना सीख जाएं तब तक उसे आपकी देखभाल 24 7 चाहिए। हां अगर बच्चा तकरीबन 3 साल का होने वाला हो तब उसमें आप धीरे-धीरे अलग सोने की आदत डाल सकती हैं। लेकिन ये काम उतना आसान नहीं होगा बच्चों को कई तरह के प्रलोभन देने पड़ेंगे उनके कमरे को खास रुप से तैयार करना पड़ेगा।

  • उसके फेवरेट कार्टून से वॉल की सजावट कराएं
  • कई तरह के खिलौने, नई किताबें आदि भी रख सकती हैं
  • हो सके तो अपने बेडरुम से अटैच कमरा ही बच्चे को दें 
  • इसके लिए आप पहले से ही प्रयास जारी रखेंगी सुविधा होगी 

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शिशु को अपने साथ सुलाएं क्योंकि…

  • कई शिशु अक्सर रात में चौकते हैं या अचानक उनकी नींद खुलती है और वो रोने लग जाते हैं ।
  • शिशु को मां का स्पर्श मिलता रहेगा तो वो चैन की नींद लेगा ।
  • करीब रहने से आप उसकी बेहतर देखरेख कर पाएंगी ।
  • उसके स्लीपींग पैटर्न से परिचित हो जाएंगी ।
  • छोटे बच्चे अधिक डायपर गीले करते हैं इसलिए रात में उससे बदलना भी होगा ।
  • इससे शिशु का ब्लडप्रेशर और हार्ट बीट सामान्य रहेगा
  • शिशु बड़ा होकर भावानात्मक रुप से कमजोर नहीं रहेगा
  • अकारण या अचानक मृत्यु सिंड्रोम खतरा कम होगा ।
  • आपको भी तो उसके कोमल ऐहसास और उसकी खुशबू को महसूस करने की आदत है…आपका शिशु आपकी जरुरत भी है और जिम्मेदारी भी ।

को-स्लीपिंग तब और भी ज़रुरी हो जाता है जब आप उसे स्तनपान करवा रही हों ।नींद खुलते ही शिशु दूध पीने की चेष्टा करने लगता है और अपने करीब मां को पाने से वह स्वंय ही स्तनपान करने लग जाता है ऐसे में उसमें भूख से होने वाला चिड़चिड़ापन कम देखने को मिलता है ।