क्यों भाई दूज पे जाता है भाई बहन के घर... जानिये कारण

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भाई-बहन के स्नेह की डोर को मजबूत करता है भाईदूज का त्योहार

रक्षा बंधन के अलावा भाईदूज एक ऐसा त्योहार है जो भाई बहन के प्रेम के बंधन को मजबूत करता है । कार्तिक महीने की द्वितिया तिथि को तकरीबन देश के हर हिस्से में यह त्योहार मनाया जाता है ।

इस पर्व में बहन बड़े ही स्नेह से भाई को आमंत्रण देती है और भाई भी बहन के लिए खुशियों की सौगात लेकर उनके घर पहुंचता है । भाई की लंबी उम्र की कामना करते हुए इस पावन पर्व में बहनें रौली, अक्षत से भाई का तिलक करती हैं और उन्हें अपने हाथों से बना व्यंजन परोसती हैं और भाई प्रसन्न होकर बहन को कई उपहार देते हैं । सगी बहन ना हो फिर भी चचेरी या ममेरी बहन के साथ इस त्योहार को प्रेम बाव से मनाना चाहिए ।

हर वर्ष दीवाली के दो दिन बाद यह त्योहार मनाया जाता है । इस बार भाई को टीका लगाने का शुभ मुहुर्त दिन के 1:30 बजे से लेकर 3:30 बजे तक है । यूं तो देश के अलग-अलग राज्यों में इस त्योहार को मनाने की परंपरा है लेकिन तरीके भिन्न हैं ।

हालांकि भाई को तिलक लगाना और मिष्ठान भोजन कराना हर क्षेत्र की रिवाज़ में अनिवार्य रुप से शामिल है । भाई के अच्छे स्वास्थ्य, सफल जीवन और दीर्घायु होने की कामना करते हुए हर बहन इस दिन भाई का स्नेह पाकर धन्य हो जाती है ।

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source: indianexpress

पौराणिक कथा

सूर्यदेव की पत्नी छाया के गर्भ से यमराज और यमुना ने जन्म लिया । दोनों भाई बहन एक दूसरे से अपार प्रेम करते थे । समय के साथ दोनों ही अपने व्यक्तिगत कार्यों में व्यस्त हो गए लेकिन यमुना अपने भाई से मिलने के लिए व्याकुल रहती थी ।

कई बार उन्होंने यमराज को आमंत्रण दिया लेकिन प्राण हरने वाले यमराज अत्यधिक व्यस्तता के कारण बहन का आतिथ्य स्वीकार नहीं कर पाते थे । एक दिन रुष्ट होकर बहन यमुना ने यमराज को घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया ।

यमुना ने बड़े ही आदर से यमराज को तिलक लगाकर उन्हें भोजन कराया बहन के इतने प्रेम को पाकर यमराज द्रवित हो गए और उन्होंने बहन को अनेक वस्त्राभुषण आदि उपहार में दिए । जाते-जाते जब उन्होंने यमुना से कोई भी वरदान मांगने को कहा तो यमुना ने ऐसा वर मांगा जिससे आज भी हर बहन उनकी आभारी हैं ।

जिस दिन यमराज अपनी बहन से मिले उस दिन कार्तिक माह की द्वितिया तिथि थी और यमुना ने यही वरदान मांगा कि जो बहन इस तिथि को अपने भाई को सादर निमंत्रण देकर उन्हें भोजन कराए, उनका तिलक करे तो उनके भाई के जीवन पर कोई भी संकट ना हो और उन्हें मृत्यु के देव यमराज का भय ना सताए ।यमराज ने सहर्ष अपनी बहन की बात स्वीकार कर ली और कह दिया तथास्तु ।

कथा के अनुसार भाई को इस दिन बहन के घर निश्चित रुप से जाना चाहिए और उनका आतिथ्य स्वीकार करना चाहिए लेकिन अगर किसी कारणवश भाई का आना संभव ना हो तो बहन को ही उनके घर टीका की सामग्री और मिष्ठान लेकर जाना चाहिए । टीका लगाने के दौरान एक दोहा भी प्रचलित है…जो दरअसल पूरे कथा का ही सार है ।

जैसे यमुना ने तिलक किया यमराज को, हम करें अपने भाई को, जैसे यम-यमुना का प्यार बढ़े, गंगा-यमुना की धार बहे वैसे ही मेरे भाई की उम्र बढ़े….आप सभी के भाईयों की सेहत और मंगलमय जीवन की कामना के साथ सभी बहनों को भैयादूज की हार्दिक शुभकामनाएं ।