बेबी प्लान करने से पहले महिलाएं अपने पति से ये बातें ज़रूर कर लें

आपमें से बेबी की कौन कितनी जिम्मेदारी उठाएगा और आने वाली समस्याएं कौन सी हो सकती हैं जैसी बातों पर पहले विचार किया जाता है।

अगर हमें कुछ भी नई चीज़ शुरू करनी हो और चाहते हों कि उसका बेस्ट रिज़ल्ट सामने आए तो वो काम आपको पूरी प्लानिंग के साथ करना चाहिए, और लोग ऐसा करते भी हैं। फिर चाहे वो शादी का फैसला हो, करियर का फैसला हो या कोई और।

हर काम अगर आप योजनाबद्ध तरीके से करेंगे तो उसकी सफलता के चांस ज्यादा बढ़ जाते हैं। वहीं अगर आप शादीशुदा हैं और अपने पार्टनर के साथ परिवार आगे बढ़ाना चाहते हैं तो भी आपको पूरी प्लानिंग के साथ चलना पड़ता है।

आज के समय में पति-पत्नी दोनों ही कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं और पत्नी के वर्किंग होने के चलते दोनों को ही यह अहसास रहता है कि आपको जो भी काम करना होगा वो आपसी सहमति से और प्लानिंग के साथ करना होगा।

मसलन, अगर आप दोनों बेबी प्लान कर रहे हैं तो बच्चे की परवरिश, उसकी देखभाल की ज़िम्मेदारी को सहमति से बांटना चाहिए।

आपमें से बेबी की कौन कितनी जिम्मेदारी उठाएगा और आने वाली समस्याएं कौन सी हो सकती हैं जैसी बातों पर पहले विचार किया जाता है। आज इस आर्टिकल में ऐसी ही कुछ बातें हम आपको बताने जा रहे हैं...

बच्‍चें को कहां सुलाएं ?

आपको इस बात पर पहले ही आपसी सहमति से विचार करना होगा कि बच्चे को कहां सुलाना है। उन्हें अपने साथ सुलाना है या अलग कमरे में। इन दोनों ही विकल्पों के अपने फायदे और नुकसान दोनों ही हैं। इसलिए आप अपनी सुविधा और बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बात का फैसला करें।

कैसी होगी परवरिश !

अपने बच्चे को आप जैसी परवरिश देंगे वैसा ही उसका भविष्य बनेगा। और अगर आप कामकाजी महिला हैं तो बच्चे की ज़िम्मेदारी कौन उठाएगा इस पर पहले ही विचार करना होगा। यह ज़िम्मेदारी आप दोनों मिलकर उठाने के लिए तैयार हैं या परिवार के किसी तीसरे व्यक्ति की मदद लेनी चाहिए। इसका फैसला आप दोनों मिलकर करें।

क्या नौकरी छोड़नी पड़ेगी?

जब आप दो से तीन हो जाते हैं तो आप दोनों पर ही ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है, और बच्चे के लिए आपको हर समय मौजूद रहना पड़ता है। ऐसे में अगर आप एक वर्किंग वुमन हैं तो आपको फैसला लेना पड़ेगा कि क्या आप अपनी नौकरी को बेबी होने के बाद भी जारी रखेंगी या छोड़नी पड़ेगी।

ब्रेस्टफीडिंग

बच्चे के जन्म के  बाद उसे छह महीने तक मां का दूध दिया जाता है। लेकिन जो महिलाएं जॉब करती हैं वो हर समय बच्चे के साथ नहीं रह सकतीं। और ऐसे में पैकेट वाले या डिब्बे वाले दूध से बच्चा बीमार पड़ सकता है।

ऐसी में आप पंपिंग या फार्मुला जैसे विकल्पों को आज़मा सकते हैं। इनसे मां की गैरमौजूदगी में बच्चा मां का दूध पी पाएगा।

कौन बदलेगा डायपर

आपको बेबी होने से पहले उन सभी बातों पर आपस में बैठकर विचार करना होगा कि उसके छोटे छोटे काम कौन करेगा। जैसे उसके डायपर कौन बदलेगा, उसे डॉक्टर के पास कौन लेकर जाएगा और बड़ा होने पर उसे स्कूल लाने, ले जाने की ज़िम्मेदारी कौन निभाएगा।

आपको इन सभी बातों का फैसला मिलकर करना चाहिए। ऐसा करने से आप दोनों के लिए ही बच्चे की ज़िम्मेदारी निभाना आसान हो जाएगा।