बेटे का नहीं हो पाया टॉप स्कूल में दाखिला..पिता ने खुद को लगाई आग

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इस शख्स ने बहुत ही बड़ा कदम उठाया और आदित्य बजाज नाम के आदमी को 6 लाख रूपए दिए जो छोटे बच्चों बड़े-बड़े स्कूल में दाखिले की तैयारी करना के नाम पर इंस्टिट्यूट चलाता है।

आप इसे सहमत हों या ना हों लेकिन आप भी मानेंगे कि भारतीय पैरेंट्स अंदर ही अंदर सही लेकिन चाहते हैं कि बच्चे शहर के सबसे अच्छे स्कूल में पढ़ें। आप बच्चे का नाम कट ऑफ लिस्ट में देखने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं।

लेकिन सवाल ये उठता है कि इसे पूरा करने के लिए आप बड़े से बड़ा क्या कदम उठा सकते हैं? अगर आपका प्लान असफल हो गया तो आप क्या करेंगे?

आप में से कई लोग बोलेंगे दुनिया यहीं पर खत्म नहीं हो जाती है, आप दूसरे स्कूलों के लिए भी कोशिश कर सकते हैं।लेकिन हाल में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसके बारे में जानकर आपका  दिल दहल जाएगा। दरअसल बैंगलुरु का यह पिता स्कूल की नाबर्दाश्त नहीं कर पाया और खुद को आग लगा ली।

ये सबकुछ स्कूल के सीट के लिए

बेटे का नहीं हो पाया टॉप स्कूल में दाखिला..पिता ने खुद को लगाई आग

बहुत ही शॉकिंग घटना में ये शख्स जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर होने के साथ-साथ दो बच्चों का पिता भी है, उसने खुद को ही आग लगा लिया क्योंकि उसका बेटा नंबर 1 स्कूल में एडमिशन पाने में सफल नहीं हो पाया।

रिपोर्ट की माने तो 25 वर्षीय रमेश कुमार ने आदित्य बजाज नाम के शख्स को 6 लाख रूपए दिए थे जो दिए जो छोटे बच्चों बड़े-बड़े स्कूल में दाखिले की तैयारी करना के नाम पर इंस्टिट्यूट चलाता है।

हालांकि पैसे देने के बाद भी रमेश का बेटा स्कूल में सीट नहीं दिलवा पाया और और जब रमेश ने आदित्य से पैसे मांगे तो उसने 1.5 लाख लौटाते हुए कहा कि अगले साल वो जरुर बच्चे का दाखिला करवा देगा।

पुलिस के अनुसार इस घटना से नाराज पिता को आदित्य की बातों पर विश्वास नहीं हुआ और कोचिंग सेंटर के ऑफिस पर एक पेट्रोल की बोतल के साथ पहुंचा। इसके बाद उसने खुद पर पेट्रोल डाला और आदित्य बजाज से पैसे मांगने लगा वरना आग लगाने की बात करने लगा।

इसके बाद उसने आदित्य को धमकी देने के लिए माचिस जलाया लेकिन कपड़ों में आग लग गई।

आदित्य ने कहा कि उसने रमेश कुमार को रोकने की कोशिश की लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। पुलिस ने उसके ऊपर भारतीय दंड संहिता के अंर्तगत धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), और धारा 420 (धोखाधड़ी) का केस दर्ज कर गिरफ्तार किया है।

पैरेंट्स के लिए संदेश..

ये सच है कि भारत में बच्चों के ऊपर परफॉर्म करने का बहुत अधिक दबाब होता है। उन्हें अपने मैरिट को साबित करना होता है ताकि वो एक प्रतिष्ठित स्कूल और कॉलेज में पढ सकें जिससे सुनिश्चित होगा कि वो अपनी जिंदगी में सफल होंग। आप खुद से पूछिए क्या अच्छा स्कूल या कॉलेज सफलता की गारंटी देता है? नहीं कम से कम गूगल सीईओ सुंदर पिचाई का तो यही मानना है।

उन्होंने कहा कि भारत की एक बात बहुत अच्छी है कि यहां सभी शिक्षा में दिलचस्पी लेते हैं – चाहे वो पैरेंट्स हो या छात्र। लेकिन मैंने ऐसा केस भी देखा है जहां आठवीं कक्षा से बच्चे आईआईटी की तैयारी करते हैं। मैं आश्चर्यचकित हूं। हमारी शिक्षा पद्धती बहुत ही किताबी है जबकि हमें बच्चों के ऑल-राउंड विकास पर ध्यान देने की जरुरत है। अभी भी कॉलेज या करियर में तय रास्तों को फॉलो को करने का प्रेशर है।

हम भी पिचाई की इस बात से सहमत है और कहना चाहेंगे इस बदलते वक्त में फोकस बच्चों के ऑल-राउंड विकास पर होना चाहिए ना कि किस स्कूल या कॉलेज में आपका बच्चा पढ़ता है इसपर।

 

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