क्यों मैं अपनी बेटी को हिंदी सिरियल और रिएलिटी टीवी शो नहीं देखने देती

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रिएलिटी टीवी शो और हिंदी सीरियल का बच्चों पर खतरनाक असर पड़ता है।जानिए क्यों आपको बच्चों को ये सब नहीं देखने देना चाहिए।

मैंने आपको पहले भी बताया है कि मैं अपनी बेटी को टीवी नहीं देखने देती हूं। खासकर कार्टून जिनका प्लॉट अर्थहीन होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मैं अपनी बेटी को टीवी शो और कार्टून के बुरे प्रभावों से बचाना चाहती हूं।

ये तब हुआ था जब मेरी बेटी तीन से चार साल की थी और हमेशा अपनी मां की बात मानती थी। अब वो 6 साल की है और अब वो वही देखना चाहती है जो पूरा परिवार देखता है।

अब वो हम जो भी करते हैं उसमें वो दिलचस्पी लेते हैं। इसके अलावा और कोई तरीका नहीं था जिससे मैं उसकी आदतों को कंट्रोल कर सकती थी।

टीवी शो और हिंदी सीरियल के प्रभाव

इसके पहले की हम बुरे प्वाइंट पर जाएं मैं आपको बता दूं कि मैं एंटी टीवी नहीं हूं और मैं मानती हूं कि टीवी पर भी काफी सूचनात्मक कंटेट मिलता है और बच्चों को ये कई मायनों में फायदा पहुंचाते हैं।

उदाहरण के लिए कुछ वाइल्ड लाइफ शो भी हैं जिससे काफी कुछ सीखने को मिलता है और आपके बच्चों को सोचने पर मजबूर करता है। कई गेम शो और स्पोर्ट्स गेम भी होते हैं जो बच्चों को दूसरी दुनिया में लेकर जाते है। वो अपने बाल मन में कई कल्पनाएं और क्रिएटिविटी करते हैं।

लेकिन भारत में चीजें ऐसी नहीं की जाती है।हमें ये नहीं भूलना चाहिए बच्चे वही देखेंगे जो हम देखते हैं। इस प्रक्रिया में कई बार एडल्ट कंटेट आ जाते हैं जो बड़ों के लिए होता है ना कि बच्चों के लिए। जी हां हम खासकर हिंदी सीरियल की बातें कर रहे हैं। यहां तक कि नेटफ्लिक्स और वेब सीरिज के जमाने में भी टेलीविजन सबसे मनोरंजन का सबसे प्रधान साधन है।  

रील और रियल

A scene from the popular reality show Bigg Boss

जो लोग देखते हैं मैं उनका बिल्कुल भी अनादर नहीं कर रही हूं लेकिन आप भी मानेंगे कि उनमें से ज्यादातर कंटेट बच्चों के लिए नहीं हैं। हम कई बार बच्चों  कहते हैं ये सच नहीं अवास्तविक है। छोटे बच्चे रियल और रील में अंतर नहीं समझ पाते हैं।

यहां जानिए कैसे हिंदी सीरियल और टीवी शो आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

1.परिवार में नकारात्मकता दिखाते हैं: हिंदी सीरियल में खासकर परिवार का कोई एक सदस्य हमेशा दूसरे के खिलाफ षड्यंत्र करता नजर आता है।

आप हमेशा बच्चों से बोलते हैं कि वो एक्टिंग कर रहे हैं लेकिन अपने दिमाग में कहीं ना कहीं वो जो देखते हैं वो आत्मसात कर लेते हैं। कई सास बहू के सीरियल ऐसे कंटेट से भरे हुए हैं।

    कई शो ऐसे भी होते हैं जिनमें परिवार के सदस्य के मर्डर तक की प्लॉटिंग और प्लानिंग दिखाई जाती है जो बहुत ही गलत है। आप ही सोचिए कि आपके बच्चे इससे क्या सीखेंगे।

2.सेक्स और दुराचार का प्रर्दशन: पारिवारिक शो आजकल फर्स्ट नाइट और इंटिमेट सीन की भरमार होती है जो बच्चों को कम उम्र में सेक्स से रूबरू कराती है। हालांकि इसे देखने में कोई बुराई नहीं है लेकिन जिस तरह से इसे फिल्माया जाता है और बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जाता है ये गलत है।

कई सीन होते हैं जिसमें शराब या गंदी भाषा दिखाई जाता है। जैसे बिग बॉस देखकर बच्चे सोच में पड़ जाएंगे कि क्या असल जिंदगी में भी हम ऐसे बर्ताव कर सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ एडवेंचर या एक्शन स्पोर्ट्स वाले रियेलिटी शो को देखकर बच्चे भी खतरनाक स्टंट कर सकते हैं। हालांकि उसमें चेतावनी लिखी हुई थी लेकिन बच्चे ये पढ़ने के लिए काफी छोटे हैं।

3.उन्हें नकली दुनिया से रूबरू करवाते हैं : आधा से ज्यादा टीवी सीरियल आज पुनर्जन्म बेस्ड होते हैं, मृत्यु के बाद जन्म लेना, भूत, नागिन दिखाए जाते हैं जो असल में नकली है। इससे सिर्फ बच्चों को ना इस पर विश्वास होता है बल्कि इसकी वजह से वो दुनिया का विकृत दृष्य पेश करता है। इससे वो अधिक डर सकते हैं।

4. अनचाहे विज्ञापन और कॉर्मशियल से सामना: ये टेलीविजन का बिजनस होता है लेकिन बच्चों के लिए एक बिस्किट का एक विज्ञापन देखकर उन्हें लग सकता है कि ये खाना हेल्दी है। इससे उन्हें ऐसी चीजों को खाने के लिए बढ़ावा मिलता है।

आगे आप जानते हैं कि वो दुकान या स्टोर में ऐसी चीजों की मांग भी कर सकते हैं। इसके अलावा कई और भी विज्ञापन होते हैं जैसे कंडोम या पीरियड के बारे में पूछ सकते हैं जो उनके लिए सही नहीं है।

5. ये पीछे ले जाने वाला है: आप इसे मानेंगे कि ज्यादातर हिंदी टीवी सीरियल आज भी भारतीय महिलाओं को बुरी तरह दिखाते हैं। कोई जो आपका केयरटेकर है वो ताने सुनती हैं जिसमें ससुराल वाले भी शामिल होते हैं और महिलाओं को 24X7 काम करती रहती हैं।

कई ऐसे भी शो होते हैं जिसमें रुढ़िवादी विचार को तोड़ते दिखाया जाता है। ईमानदारी से बोला जाए तो ऐसे शो बहुत कम हैं।ये मुझे पूरी तरह अस्वीकार्य है फिर चाहे वो एक महिला के तौर पर हो या कामकाजी महिला के तौर पर।

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