“आपकी बेटी को तो खाने में नमक डालना भी नहीं आता”

“आपकी बेटी को तो खाने में नमक डालना भी नहीं आता”

जब मैं सुनी की मेरी सास मेरे बारे में ऐसी बातें करती हैं फिर भी मैंने कुछ नहीं बोला। मैं ट्रिप में खाना बनाती रही लेकिन सच बताऊं तो मेरा उत्साह खत्म हो चुका था।

आपकी लव मैरिज हो या अरेंज मैरिज लेकिन एक बात जो दोनों शादियों में कॉमन है हम बहुओं को शादी के बाद नए घर वालों को अपनाने में समय लगता है। खासकर सास-ससुर को।

मुझे पता था कि मुझे काफी समस्याएं होने वाली है क्योंकि मेरे होने वाले ससुराल वाले थे कि उनका इकलौता बेटा लव मैरिज कर रहा है। लेकिन मेरे पार्टनर ने सुनिश्चित किया था कि वो हर हाल में मेरे साथ रहेंगे और इसलिए उन्होंने नए शहर में नौकरी तलाशी और हमने अपनी शादी शुदा जिंदगी शुरुआत वहीं की। 

इकलौती बेटी होने के कारण मुझे हमेशा घर में काफी प्यार दुलार में रखा गया। मेरी मां कभी मुझे खाना बनाने नहीं देती थी लेकिन मुझे हमेशा देखने देती थी कि मैं बनाती कैसे हूं इसलिए मुझे पता था कि चीजें कैसे करनी है। मुझे धीरे-धीरे खाना बनाने में रूचि भी आने लगी और इसका श्रेय मेरी मां को जाता है। मैं नए घर में किचन में नॉर्मल खाना तो बना ही लेती थी। 

हम काफी खुश थे...

मुझे पता था कि मेरी सास अपने बेटे से हर दिन पूछती थी कि उन्होंने लंच या डिनर में क्या खाया। मैंने खाना बनाया था या ऑर्डर किया था, कैसे हमें बाहर जाने से बचना चाहिए। मुझे हमेशा खाना बनाना चाहिए जैसी बातें वो मेरे पति को बताती रहती थी। वो ये भी पूछती थी कि कहीं उनके बेटे का वजन तो नहीं कम हो गया या वो मेरे हाथ के खाने में खुश है या नहीं। 

इन सब बातों के बाद मेरे पति हमेशा यही कहते थे कि वो खुश हैं। 

जल्द ही उन्होंने हमारे यहां आने का फैसला किया

“आपकी बेटी को तो खाने में नमक डालना भी नहीं आता”

मैं काफी एक्साइटेड थी क्योंकि मैं उन्हें दिखाना चाहती थी कि हां मैं चीजों की देखभाल अच्छे से कर सकती हूं। मुझे लगता है कि मुझे इस बात में उनकी सहमति की आवश्यकता थी। मैं नए शहर में अपने पैरेंट्स को मिस करती थी।

ज्यादातर मेरे पति को जॉब की वजह से काफी यात्राएं करनी पड़ती थी जो।मैंने हर तरह के व्यंजन के बारे में प्लान करना शुरु कया जो मैं अपने सास ससुर के लिए बनाना चाहती थी क्योंकि वो खाने को लेकर काफी एक्साइटेड हो जाते थे। 

मैं तैयार थी और काफी चीजें प्लान कर रही थी

जिस दिन वो आए मैंने सभी उनके पसंदीदा डिश बनाए। जब खाना खाने की बात आई तो मेरी सास ने टेबल पर एक बार नजर घुमाया और कहा.."इतना खाना कौन बनाता है, लगता है मेरे बेटे का सारा पैसा डस्टबीन में जाता है।"

मुझे सच में बुरा लग रहा था लेकिन मैंने कहा कि हम खाना बरबाद नहीं करते लेकिन फिर भी मैं खाना बनाने के मामले में नई थी, कभी-कभी कितना बनाना है इसे लेकर कन्फ्यूज हो जाती थी।

इस तरह की स्थिति में भी मैं बचा हुआ खाना खा लेती थी लेकिन बरबाद नहीं करती थी। जब मैंने उन्हें ये बात बताई तो उन्होंने कहा कि "क्या पता मेरा बेटा भी बासी खाना खाता है।"

खैर, हम खाने बैठे और सबकुछ ठीक था

अगले दिन जब मेरे पति ऑफिस गए तो मेरी सास ने मेरी मां को फोन कर बोला कि "एक ही तो बेटी है आपकी, उसे भी खाना बनाना नहीं सिखाया? नमक डालना बी नहीं आता । वो मेरा बेटा है जो चुपचाप खा लेता है।" 

मैं आश्चर्यचकित थी क्योंकि खाना काफी अच्छा बना था। मेरे पति ने मुझे बताया था कि क्या-क्या उन्हें सबसे अच्छा लगा था। जब मैं सुनी की मेरी सास मेरे बारे में ऐसी बातें करती हैं फिर भी मैंने कुछ नहीं बोला। मैं ट्रिप में खाना बनाती रही लेकिन सच बताऊं तो मेरा उत्साह खत्म हो चुका था।मैं शॉक्ड थी। 

आज मेरे बच्चे मेरा खाना पसंद करते हैं और उनके दोस्त भी कई खास डिश की मांग करते हैं। मैं खुश हूं कि मैं सास के ताने मारने के बाद भी अपने ऊपर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने दिया लेकिन हां किसी और की नकारात्मक बातों की वजह से कमजोर ना पड़ने की मैंने कसम खा ली।

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theIndusparent