बारहवीं में बेटे के 71 प्रतिशत नंबर आने पर खिन्न पिता ने दी अपनी जान

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सिर्फ अच्छे ग्रेड्स से बेहतर है कि सीखने पर ध्यान दें जो सिर्फ स्कूल नहीं पूरी जिंदगी आपके बच्चों के काम आएगा।

ये काफी डरावना है कि इस डिजिटल युग में भी कुछ पुरानी बातें हैं जो लोगों के दिमाग से हट नहीं पा रही है। हाल में हम एक आश्चर्यचकित कर देनी वाली खबर से रूबरू हुए। पुणे में एक 48 साल के शख्स माधवन पिल्ले ने इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि उनके बेटे को बारहवीं में 71% नंबर आए थे। जी हां आपने बिल्कुल सही पढ़ा।

माधवन पिल्ले पुणे के पिंपरी जिले के रहने वाले थे और वो इस बात से काफी नाराज थे कि उनका बेटा 12th बोर्ड में 71 प्रतिशत नबंर से पास हुआ।

पुलिस के अनुसार माधवन पिल्ले को उम्मीद थी कि उनका बेटा 90 प्रतिशत तक लेकर आएगा क्योंकि वो दसवीं में भी 91% मार्क्स लाया था और क्लास में भी फर्स्ट आया था।

जैसे ही उनके बेटे ने घर आकर मार्क्स बताए वो जाकर खुद को बाथरूम में लॉक किया और फांसी लगाकर जान दे दी।पिल्ले के रिश्तेदारों का कहना है कि वो चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने।

अच्छे ग्रेड्स आना जिंदगी में सफलता की गारंटी नहीं देता

 
exams 1 बारहवीं में बेटे के 71 प्रतिशत नंबर आने पर खिन्न पिता ने दी अपनी जान

आत्महत्या का जो भी कारण रहा हो लेकिन सच्चाई यही है कि उनका बेटा सारी जिंदगी इस अपराधबोध से ग्रसित रहेगा कि उसके पिता ने उसकी वजह से अपनी जान दे दी। ये काफी शॉकिंग है कि कुछ पैरेंट्स जब बच्चों के रिजल्ट की बात होती है तो किसी भी हद तक जा सकते हैं।    

हम पैरेंट्स अक्सर भूल जाते हैं जिंदगी में आगे जाकर नंबर मायने नहीं रखते हैं। ये अनुभव है जो उन्हें आगे लेकर जाता है। सिर्फ अच्छे ग्रेड्स से बेहतर है कि सीखने पर ध्यान दें जो सिर्फ स्कूल नहीं पूरी जिंदगी आपके बच्चों के काम आएगा।

बच्चों की पढ़ाई में उनके सीखने के कौशल पर मेहनत करे। जैसे अटेंशन, मेमोरी, प्रॉब्लम हल करना बच्चों के लिए सिर्फ नंबर रटने से ज्यादा अच्छा है।

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Source: theindusparent