बहु बनना क्यों है हमारे देश में सबसे मुश्किल

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पिछले सप्ताह मैं एक आर्टिकल पढ़ रही थी जिसमें अच्छी बहु बनने के कई तरीके दिए गए थे।

पिछले सप्ताह मैं एक आर्टिकल पढ़ रही थी जिसमें अच्छी बहु बनने के कई तरीके दिए गए थे। इसमें महिलाओं को स्थिति के हिसाब से खुद को ढालने, खाना बनाने और उनकी इच्छाओं का ख्याल रखने के बारे में लिखा गया था। एक पढ़ी लिखी महिला की तौर पर मैं चकित थी।

एक ऐसा दौर जिसमें महिलाएं पहले ही अपने हक, सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई लड़ाई रही हैं। जहां सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि बहुओं के साथ कामवाली की तरह सुलुक नहीं करना चाहिए, ये आर्टिकल जले पर नमक की तरह था।

मैं आश्चर्य चकित रह गई थी कि क्या वाकई इंडिया वाकई बहुओं के साथ इतना सख्त हो सकता है।

मैंने अपना मिलाकर कई केस देखे हैं जहां सास काफी केयरिंग होती हैं। लेकिन कई बार ऐसे भी केस होते हैं जहां महिलाओं चाहकर भी एडजस्ट नहीं कर पाती हैं। आखिर मॉडर्न सोसाइटी में ऐसा क्यों होता है।

हमने कुछ ऐसी ही विचारधाराओं को पता करने की कोशिश की जिन वजहों से मानसिक, आर्थिक और शारीरिक प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं।

हमने मुंबई बेस्ड मनोचिकित्सक, काउंसलर और मोटिवेशनल स्पीकर डॉ हेमंत मित्तल जिन्होंने समाज की कई बीमारियों को पता करने की कोशिश की जिसकी वजह से महिलाओं की शादीशुदा जिंदगी नरक बन जाती है।

1.मैं बाहरी हूं का टैग

अगर मम्मी पापा वृद्धा अवस्था में चले जाएं तो उनकी देख रेख की जिम्मेदारी बेटों पर होती है। इसका मतलब ही होता है कि बहुओं पर खुद ब खुद इसकी जिम्मेदारी इस परंपरा को फॉलो करने की आ जाती है भले कि उन्होंने घर के हिसाब खुद को ढाल पाया ना हो।

terrible husbands बहु बनना क्यों है हमारे देश में सबसे मुश्किल

डॉ हेमंत मित्तल, मनोवैज्ञानिक और मोटिवेशनल गुरू ने कहा कि मैंने कई ऐसे कई ऐसे केस देखे हैं जहां पति और उनके परिवार वाले बहुओं के नहीं होने पर कई मुद्दों पर चर्चा करते हैं क्योंकि हो सकता है कि परिवार की बातें वो ना समझे। मैंने जब कई लोगों से ये बात करने की कोशिश की तो जवाब किसी के पास नहीं है।

2.मार्गदर्शन की कमी

ये नॉर्मल है कि कोई घर में नया आएगा तो उसे घर के हिसाब से खुद को ढालने में समय लगेगा। इस वजह से कभी बैचेनी तो कई चिड़चिड़ाहट होना आम बात है।

डॉ. मित्तल का इस मामले में मानना है कि कई लोग इस एडजस्ट नहीं कर पाते हैं। इसे एडजस्टमेंट डिसऑर्डर से ग्रसित होते हैं। “इस डिसऑर्डरकी वजह से लोग काफी दुखी, डरे हुए होते हैं। कई बार इस वजह से दवा देने की भी नौबत आ जाती है।“ उनका कहना है कि भारत में कई ज्यादातर महिलाएं कुछ महिनों में एडजस्ट कर जाती हैं। ज्यादातर समय में उन्हें कोई मार्गदर्शन करने वाला नहीं होता और महिलाओं से उम्मीद की जाती हैं आते हीं वो मां बन जिससे सब कुछ ठीक हो जाएगा।

3.दहेज की मांग

इस आधुनिक भारत में भी कई बुरी प्रथाएं ऐसी हैं जो चली आ रही हैं। चाहे लोग खुलकर या किसी और तरीके से लेकिन कई बार बहुओं को पैसे या संपत्ति के लिए मजबूर करते हैं।

NCRB( National Crime Records Bureau) के अनुसार 24771 केस पिछले चार साल में दहेज के कारण मृत्यु के आ चुके हैं।

डॉ मित्तल का कहना है कि ये मायने नहीं रखता है कि सामने वाला कितना अमीर या पॉवरफुल हो लेकिन इसके खिलाफ बोलने के लिए बहुत ज्यादा हिम्मत और बौद्धिकता की जरुरत होती है जिस रास्ते पर बहुत कम लोग जा पाता है।

4.पैरेंट्स के अंदर असुरक्षता की भावना

कभी कभी बहुओं को अपने ससुराल वालों से काफी इनसिक्योरिटी होती है। इसकी एक सच्चाई ये भी होती है कि लड़कों के माता पिता को अपने बेटे से अलग हो जाने और दूर चले जाने का अंदेशा होता है। डॉ मित्तल का कहना है कि “पैरेंट्स को लगता है कि उन्होंने अपने बेटे में समय, पैसा और प्यार निवेश का है और उन्हें उम्मीद रहती है कि उनका बेटे पांच साल के बेटे की तरह हमेशा व्यवहार करें। चुंकि सभी अपने हिसाब से खुद के जिंदगी में नियम कायदे बनाते हैं तो ये बातें पैरेंट्स को हमेशा निराश करते हैं।

5.अपने ही बच्चों के साथ अलग अलग व्यवहार

बहुओं के साथ हमेशा अपने बेटे और बेटियों के मुकाबले अलग व्यवहार किया जाता है। खासकर अगर बेटियों की शादी हो चुकी हो तो खासकर और भी ज्यादा अलग व्यवहार हो जाता है।

“दामाद और बहु के केस में ये वही बात हो जाती है कि खून ज्यादा गाढ़ा है या पानी। अगर दामाद की बात की जाए तो तो हर कोई बैकफुट पर आ जाता है। कई बार उनकी तुलना भी की जाती है जो प्रेशर बढ़ाती है।“

6. दखल ना देने वाला पति

डॉ मित्तल की माने तो कई बार कई केस में पुरुषों को शादी की उलझन और समस्या के बारे में समझने में देर लगती है। “कई बार पुरुष अपनी परिपक्वता और समझदारी नहीं अपनी पत्नी की तरफ नही दिखा पाते। वो अपनी जिंदगी में शादी के बाद जो बदलाव आते हैं उसे नहीं स्वीकार कर पाते हैं और अपनी सही चीजों में अपनी का पक्ष नहीं ले पाते और साथ नहीं दे पाते।“ अगर वो चाहें तो कई चीजें संभाल सकते हैं।

 

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डॉ मित्तल के अनुसार कई ऐसे रास्ते हैं जिसे अपनाकर बहु और नए घर के बीच एक अच्छा रिस्ता कायम हो सकता है

1.शादी के पहले काउंसलिंग- आजकल के शादीशुदा जोड़े ज्यादातर काउंसलर से मिलते हैं खासकर मैटरिमोनियल साइट भी के जरिये खासकर काउंसलिंग करते हैं। ये काउंसलिंग कोई आंटी नहीं बल्कि प्रोफेशनल काउंलर होते हैं। वो आपको एक से बढ़कर अच्छे सुझाव देंगे कि कैसे रिस्ता अच्छे से निभाया जाए। इससे आपके मन में कोई भी नकारात्मक बातें होंगी तो भी खत्म होगा।

2.अधिक परिपक्वता की जरुरत- पतियों को जरुरत होती है कि वो इस सच्चाई को समझें कि मां या पत्नी के बीच कोई अंतर नहीं करना है और लड़कियों को भी समझना चाहिए किसी पूर्वाग्रह विचार के जाएं।               

3. लंबा एडजस्टमेट फेज- एडजस्टमेंट बहु और ससुराल वालों दोनों को करना पड़ता है। ये ऐसा फेज होता है जिसमें सिर्फ बहुओं को नहीं बल्कि परिवार वालों को भी अपने परिवार के नए मेंबर को समझना होता है। डॉ मित्तल की माने तो हमेशा एक दूसरे के साथ समय बिताना और सबकुछ एक दूसरे के बारे में पता होना चाहे वो कोई नियम हो या कुछ और जरुरी है। उसे खुद को आपके हिसाब से ढालने का मौका दीजिए।

4. परिवार के बीच आपसी संवाद जरुरी- दो परिवार के बीच में प्यार और सौहार्द बनाने के लिए सबसे जरुरी है कि परिवार के सदस्य आपस में बैठकर खूब बातें करें।डॉ मित्तल के अनुसार “इसका आसान तरीका है कि दोनों परिवार के सदस्य जितना हो सके एक दूसरे के साथ समय बिता सकें। इसके लिए कुछ फन एक्टिविटी पसंद ना पसंद को जाने ताकि एक दूसरे को अच्छे से समझ सकें।

5. भावनाएं जाहिर करें- अपनी भावनाओं को जाहिर करने के लिए अलग अलग तरीके निकालें चाहे वो पति हो या सास। “अगर आप ज्वाइंट फैमिली में रहते हैं और अपने पति के साथ समय बिताना चाहती हैं तो आउटिंग प्लान करें और बातें करें। इससे आप एक दूसरे से अपनी भावनाएं जाहिर कर पाएंगे और अपने पार्टनर को भी समझ पाएंगे।

ये कुछ ऐसे मुद्दे होते हैं जो हर किसी के जिंदगी में आते हैं लेकिन हमें ये भी भूलना चाहिए कि आज भी कई ऐसे लोग हैं जो अपनी बहु को बेटी मानते हैं। वो अपनी बहुओं के किसी तरह का अंतर नहीं करते हैं।

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Source: theindusparent