बदाम का दूध पीने से new born को हुआ skurvy !

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अपने बच्चे की सेहत के साथ कोई भी एक्सपेरिमेंट करने से पहले हमे ये पक्का कर लेना चाहिए कि वो विटामिन 'C' की कमी से जूझ रहे बच्चे के लिए सही है या नहीं !

 

ये फैक्ट, साइंस, नेचर और टाइम, तीनो ने ही साबित किया है, कि एक नवजात शिशु के लिए माँ के दूध से ज़्यादा न्यूट्रीशनल और बेहतर और कुछ नहीं हो सकता । इसलिए अपने बच्चे की सेहत के साथ कोई भी रिस्क लेने से पहले हमे ये पक्का कर लेना चाहिए की हम बिना जानकारी या अधूरी जानकारी के साथ उसे कोई भी खाने पीने की चीज़ न दें ।

 

उदाहरण के लिए स्पेन में जन्में इस बच्चे की कहानी ही ले लीजिये, जिसे उसके जन्म के कुछ महीनो बाद तक सिर्फ बादाम का दूध (आलमंड मिल्क) ही पिलाया गया और इससे बाद उसे 'स्कर्वी' नमक बीमारी हो गयी ।

 

स्कर्वी क्या है ?

 

 

स्कर्वी विटामिन सी की कमी से होने वाली एक बीमारी है, और इसके लक्षणों में शामिल हैं : अस्वस्थता, सुस्ती, सांस की तकलीफ, और हड्डी में दर्द।

हालांकि बच्चे को एक सामान्य शरीर के वजन के साथ पैदा हुआ था, और पहले ढाई महीने के लिए उसे आम फॉर्मूला मिल्क ही पिलाया गया था । लेकिन बाद में उसकी स्किन पर चकत्ते होने के की वजह से डॉक्टर ने उसके माता-पिता से आम दूध को बादाम के दूध के मिश्रण से बदलने की सलहा दी ।

बच्चे ने आसानी से आम दूध की जगह बादाम के दूध को पीना शुरू कर दिया, और अगले कुछ महीनों के लिए सब कुछ ठीक हो रहा था। लेकिन बच्चे के अठारहवें महीने पर, अस्पताल की रिपोर्ट में कहा कि वह बातचीत में कम रुचि दिखता है और बैठने में भी अस्थिर है ।

ग्यारहवें महीने तक आते आते उसके माता- पिता को लगने लगा था की, कुछ गलत था ।

बच्चे को अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हो पा रहा था और हाथ पैर ज़रा सा हिला देने से ही रोने लगता था । कुछ टेस्ट्स के बाद डॉक्टर्स को पता चला की उसकी डॉक्टरों फेमुरस और रीढ़ की हड्डी में फ़्रैकचर थे । और फिर इसके बाद पता चला की उस बचे को स्कर्वी और हड्डियों की कमी की बीमारी है।

माँ के दूध से बेहतर कुछ भी नहीं है ।

बच्चों के स्पेसलिस्ट डॉ. इसिडरो विटोरिया, US  जनरल पेडिअटिरीक्स में छपि अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि, "अगर बच्चे के पहले साल में माँ के दूध कि बजाये उसकी मेजर डाइट प्लांट बेस्ड डाइट बना दी जाये, तो उसके नतीजे घातक हो सकते हैं और नुट्रिशन में बहुत सी समस्या पैदा कर सकते हैं ।

उन्होंने यह भी कहा कि "मनुफैचरेर को ऐसे ड्रिंक्स पर ये ज़रूर लिखना चाहिए कि वो विटामिन C की कमी से जूझ रहे बच्चे के लिए सही है या नहीं।"

 

 

सोर्स: पी एच नल जारेड

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