बच्चों में घबराहट से कैसे निपटें..उन्हें उलझाएं नहीं..कुछ यूं सुलझाएं

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बच्चों की घबराहट से निपटने के लिए कुछ रणनीति अपनाएं। लेकिन पहले उन्हें हर चीज में शामिल करना बंद करें।

बतौर पैरेंट्स आप अपने बच्चों को हर तरह के तनाव से बचाना होगा। आप उन्हें उनका बचपन इंज्वॉय करते देखना चाहेंगे, जिसमें संघर्ष की कोई जगह नहीं हो। लेकिन कभी-कभी बच्चों की घबराहट और उत्सुकता दोनों से निपटने में समस्याएं आती है।

अगर आपके अपने रास्ते होंगे, तो उन्हें बचपन और यौवन अवस्था में दर्द से राहत मिलेगी। लेकिन समस्याएं जिंदगी का हिस्सा है और इन समस्याओं को डील करने का सबसे अच्छा तरीका है बच्चों को इसके बारे में सीखाना

सिर्फ इतना ही नहीं बचपन में बच्चों में घबराहट की समस्या होती है, ये उनके लिए अच्छी तरह से व्यस्क के रूप में विकसित होने में समस्या खड़ा करती है।

घबराहट के साथ डील करें लेकिन बच्चों की तरह सलूक ना करें

src=https://sg.theasianparent.com/wp content/uploads/2017/12/anxiety kid 3.jpg बच्चों में घबराहट से कैसे निपटें..उन्हें उलझाएं नहीं..कुछ यूं सुलझाएं

आज के युवा एक चिंतित पीढ़ी के रूप में बढ़ रहे हैं

अमेरिका में 3 में से 1 टीन एज बच्चे सीरियस anxiety से जूझ रहे होते हैं। इसके लक्षण नींद की समस्या से लेकर अधिक भारी भावनाओं को लंबे समय तक महसूस करने तक होते हैं।

CNN की रिपोर्ट के अनुसार बच्चों में घबराहट आसानी से नहीं पता चल पाता है।

रिपोर्ट के अनुसारबच्चे जितने छोटे होंगे उनके लक्षण जानने में उतनी अधिक समस्या होगी।वो आसानी से दुखी होते हैं। वो अधिक रोते हैं। रात में अकेले सोने से डरते हैं। वो अधिक चिड़चिड़े हो जाते हैं।

इसलिए अगर आपको लगे कि बच्चे में घबराहट या अवसाद के लक्षण हैं तो बच्चों पर अधिक ध्यान दें।

बच्चों में घबराहट से निपटना: 9 रणनीति

Inc.com के अनुसार पैरेंट्स हमेशा अपने बच्चों को घबराहट से बचाना चाहते हैं क्योंकि इसके फायदे से अधिक नुकसान हैं।

उनकी चिंताओं को समझें और इसे हल्के में ना लें।

ये सच है कि आप नहीं चाहते कि उन्हें संघर्ष करना पड़े। लेकिन हल्का टेंशन हेल्दी है। इससे वो अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलते हैं और अपने असली डर का सामना दूसरों के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के साथ करते हैं।

हां, विशेषज्ञ यह देख रहे हैं कि कैसे पैरेंटिंग शैलियों और भावनात्मक पोषण में एक अह्म भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन माता-पिता को अपने बच्चे की चिंता के लिए खुद को दोष नहीं देना चाहिए।

सभी बच्चे खास होते हैं। उनकी अपनी अलग पर्सनैलिटी होती है जो जिस वजह से वो चिंतित भावनाओं को विकसित करते हैं।

उन्हें शारीरिक तौर पर सामना करना सिखाएं

जैसे अपनी उंगलियों को अपने होठों पर चलाना या अधिक खुश होने पर 10 तक गिनना।

उन्हें बुनियादी दिमागी शिक्षा दें

कुछ सेकेंड लें और दिन शुरु करने से पहले उन्हें गहरी सांस लेने को कहें।

जिंदगी में आने वाले बदलाव में मदद करें

ये मायने नहीं रखता कि आप कितने सिंपल और कैसा रूटीन उनका रखते हैं, जैसे जब उन्हें नए डे केयर में जाना है तो वो बदलाव से कैसे निपटें इसके बारे में बताएं।

बच्चों को सिखाएं कि सभी भावनाएं सामान हैं

सकारात्मक हो या कुछ और लेकिन उन्हें समझाएं कि सभी भावनाएं बराबर मायने रखती है। लेकिन बच्चे जो जल्दी घबराते हैं उन्हें अधिक सकारात्मक भावनाएं पर फोकस देने के लिए कहें।

उज्जवल पक्ष को देखने के लिए प्रोत्साहित करें

उनसे हमेशा पूछें कि दिन भर में उनके साथ क्या एक बात अच्छी हुई. इससे वो अधिक खुलेंगे और आशावादी रहेंगे।

बच्चों के सोचने के तरीके का सम्मान करें

अगर बच्चा कम बोलता है तो अधिक बातचीत करने के लिए मजबूर ना करें।

बच्चों की मनोदशा को समझें और जानें कि उनका दिमाग कैसे चलता है।

क्या आपका बच्चा बहुत सारे निर्देशों से खुश हो जाता है? अगर हां तो इसे धीमा करें।

अपनी दिनचर्या में गतिविधियों को शामिल करें

शारीरिक गतिविधियां बहुत अधिक फायदा देती हैं जिससे बच्चों को मानसिक और भावनात्मक शांति मिलती है।

बच्चों की फायदा पहुंचाने वाली गतिविधियों को अपने रूटीन में शामिल करें।

उन्हें गलतियों से निपटने की क्षमता से लैस करें

उन्हें समझाएं कि आत्म-संवेदना भी एक तरीका है जिससे उन्हें गलतियों या संघर्ष से निपटने में मदद मिलेगी।

गले लगाएं

गले लगाना और आश्वासन देने से उनके शरीर में अच्छे हार्मोन बढ़ते हैं और इसका उनके मूड और स्वास्थ्य पर पड़ता है।