बच्चों में कैसे विकसित करें गुड मैनर्स, जानिए कब शुरु करें अपने लिटिल स्टार की ग्रुमिंग

पैरेन्ट्स अपने बच्चे को सबसे अच्छी परवरिश देना चाहते हैं लेकिन फिर भी कहीं ना कहीं कुछ कमी रह जाती है जिससे बच्चों के स्वभाव पर बुरा असर पड़ने लगता है और फिर सारा दोष मां की सर पर ही आ जाता है ।

इसलिए लवली मॉम्स ध्यान दीजिए... अगर आपका बेबी डेढ साल की उम्र पार कर रहा है तो यही सबसे सही समय है उसकी सोच और उसकी भावनाओं को सही दिशा देने की लेकिन किसी प्रकार की सख़्ती से नहीं बल्कि पूरी मासूमियत से ।

डेढ से दो साल के बच्चों में बड़ी जिज्ञासा होती है । यूं तो इस उम्र में कई बच्चे बोलना शुरु भी नहीं करते हैं लेकिन इशारों की भाषा का उन्हें पूरा ज्ञान हो जाता है । इसलिए जानिऐ कि आपको क्या करना चाहिए ....

  • प्यार से साफ शब्दों में उससे बातें करें, ताकि वो उच्चारण सीख सके
  • बेसिक मैनर्स सीखाना शुरु करें जैसे-खिलौने को सही जगह रखना आदि
  • जब बेबी कोई सामान जान बूझ कर फेंके तो तुरंत उसे समझाएं कि ये बुरी बात है
  • बेबी को सुलाते वक्त उसे दिन भर की अच्छी बातें याद दिलाएं इससे पॉजिटिव ऐनर्जी बनेगी
  • टीवी या गेम देखने की बजाए उसे फीजिकल ऐक्टिविटी के लिए प्रोत्साहित करें
  • रंगों की पहचान, सब्जी की पहचान, अपने अंगों की पहचान आदि भी खेल-खेल में सिखाएं

यकींन मानिए जब आप अपने नन्हे उस्ताद को सीखते हुए आगे बढ़ते देखेंगी आपका दिल आनंदित हो उठेगा । बातों-बातों में ही उसे ट्रेनिंग देने की लगातार कोशिश करें । बच्चा भले ही तुरंत अपनी प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहा हो लेकिन वो अपनी मां की सारी बातें सुन कर समझ रहा है आखिर सही सीख देने का कुछ तो असर उसके दिमाग पर पड़ना ही है ।

मेरा एक सुझाव है...

मेरा एक सुझाव है, बच्चे वक्त आने पर सब कुछ स्वंय ही सीख लेते हैं इसलिए उन्हें उनके हिस्से की गलती कर लेने दें बच्चों को ट्रेनिंग देने की प्रक्रिया लंबी हो सकती है, हो सकता है कि आपका बच्चा जल्दी सीखने का आदी ना हो । ये सारी बातें नार्मल हैं आपको धैर्य से काम लेना होगा ।

सिखायी गई बातें या एक्टिविटी भुलाकर बच्चे अगर गलत जवाब दें तो आप बस उसके भोलेपन को रिकार्ड कर के हमेशा के लिए सहेज़ लें जैसा कि मैं अक्सर करती हूं...मुझे तो तब बड़ा मज़ा आता है जब मेरा डेढ साल का बेटा मेरे पूछने पर मासूमियत से उल्टा बताता है जैसे नाक पूछने पर कान की तरफ इशारा करता है या कभी माउथ की जगह अपने गालों की तरफ इशारा करता है ।

सच कहूं तो वो पल बेहद ही खास होते हैं...उसकी ये गलतियां हमें हर तरह की टेंशन से मुक्त करा देती हैं और हम उसकी नादानी पर ठहाके लगाते हैं....। जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़ने लगती है उसमें खुद-बखुद कई आदतें विकसित होने लगती हैं । जिसका सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव उसके नजदीकी भविष्य में देखने को मिल सकता है ।

छोटे बच्चे ज्यादातर अपने पैरेन्ट्स के बर्ताव को ही अपनाते हैं लेकिन बाहर आने जाने या दूसरे बच्चों के साथ खेलने के क्रम में वो कई ऐसी बातें या शैतानियां सीख लेते हैं जिन्हें देखकर मांओं का ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है  ।

अगर आप भी इन दिनों ऐसी ही किसी परेशानियों से जूझ रही हैं तो घबराने की कोई बात ही...वो कहते हैं ना कि ‘इट्स नेवर टू लेट’ !

ढाई से तीन साल के बाद ही बच्चे प्ले स्कूल के लिए तैयार होते हैं...

ढाई से तीन साल के बाद ही बच्चे प्ले स्कूल के लिए तैयार होते हैं । इस बीच आपके द्वारा किया गया प्रयास ही उसमें अच्छी आदतें विकसित कर सकता है । जानिए उन्हें क्या-क्या सिखाना है ज़रुरी.....

  • सॉरी कहना और थैक्यू का इस्तेमाल करना सिखाएं
  • बड़ों की इज़ज्त करना सिखाएं
  • अनावश्यक रुप से जिद्द ना करना
  • उनमें प्राइवेट पार्ट्स की समझ विकसित करें
  • परमिशन लेने की आदत डालें
  • अपने बुक्स और कपड़ों को संभालकर रखने की आदत उनमें विकसित करें
  • अच्छी कहानियां सुनाएं और उससे मिली सीख के विषय में जरुर पूछें
  • मोबाईल गेम्स की लत ना पड़ने दें
  • आउटडोर गेम्स को बढ़ावा दें