बच्चों में bad behaviour होने के 10 कारण!

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अक्सर आपको अपने बच्चों के बुरे बर्ताव की वजह से गुस्सा आ जाता है। और कई बार तो इसकी वहज से आपको सबके सामने शर्मिंदा भी होना पढ़ जाता है। आपकी हर कोशिश के बाद भी बच्चों के बर्ताव में बदलाव न होने की कई वजह हो सकती हैं, आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ कारणों के बारे में।

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सभी बच्चे अटखेलियां करते हैं, उलटा जवाब देते हैं रूल ब्रेक करते हैं , ये सब बड़े होने के प्रोसेस का ही एक हिस्सा है। लेकिन कई बार बच्चे असाधारण रूप से गुस्से में अजीब व्यवहार करते हैं। पेरेंट्स को इन संकेतों को मिस नहीं करना चाहिए। बच्चों में बैड बीहैवियर हमेशा किसी न किसी कारण से ही आता है, और एक पैरेंट होने के नाते आपको इन कारणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए।

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पेरेंट्स और बच्चों में कम्युनिकेशन गैप

आज की तेज़ भागती ज़िंदगी में बच्चे और पेरेंट्स ज्यादा समय साथ में नहीं बिता पाते हैं। इससे उनके बीच एक कम्युनिकेशन गैप बन जाता है जिससे पेरेंट्स बच्चों की ज़िन्दगी में आ रहे बदलावों को अच्छे से नहीं समझ पाते हैं। ऐसे में कई बार बच्चे बुरी संगत में पड़ जाते हैं और पेरेंट्स को जब तक इसकी जानकारी हो, बहुत देर हो जाती है।

 

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पेरेंट्स की ओर से जरूरत से ज्यादा प्रेशर

बच्चों से जरूरत से ज्यादा उम्मीद रखना और उन्हें उन उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए दबाव डालते रहने से बच्चे पर एक मानसिक दबाव बना रहता है जो उनके लिए हानिकारक है। उनके पढ़ाई को लेकर कई बार इतना प्रेशर बनाया जाता है की बच्चे एक्स्ट्रा करीकुलर एक्टिविटी कर ही नहीं पाते हैं। ये बच्चे के डेवलपमेंट पर बुरा असर डाल सकता है।

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गैरजरूरी टीवी कंटेंट देखने से

औसतन बच्चे रोज 3-4 घण्टे टीवी देखते हैं। लेकिन टीवी पर दिखने वाले सभी कंटेंट बच्चों के लिए सही नहीं होते हैं। कई बार बुरी भाषा या सीन के दिखाए जाने से भी बच्चों पर इसका नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ता है। ये उन्हें अग्ग्रेसिव और गुस्सैल भी बना सकता है।

 

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सेक्स एब्यूज

एब्यूज चाहे इमोशनल हो या फिजिकल , इसका असर बच्चों के दिमाग पर बहुत दिनों तक या शायद हमेशा के लिए रहता है। इसके बहुत खतरनाक रिजल्ट हो सकते हैं। बच्चे या तो बिलकुल चुपचाप रहना शुरू कर सकते हैं या वो तोड़ फोड़ करना शुरू कर देते हैं। अगर पेरेंट्स कभी बच्चों में ऐसे संकेत देखें तो उन्हें बात करने के लिए इंस्पायर करें।

 

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घर में सही एनवायरनमेंट न होना

अगर घर में माहौल अच्छा नहीं रहेगा तो इसका सीधा असर बच्चे के बीहैवियर में देखने को मिलता है। अगर पेरेंट्स आपस में ही लड़ते रहते हैं तो बच्चे पर इसका असर पड़ना लाज़मी है।

 

फॅमिली स्ट्रक्चर में बदलाव

कई बार पेरेंट्स का तलाक होना बच्चे के लिए एक इमोशनल डिजास्टर की तरह होता है। ऐसे बच्चे खुद को दोनों के बीच बंटा हुआ महसूस करते हैं। ऐसे में वो अपने इमोशन्स गुस्से में व्यक्त करते हैं।

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अच्छी नींद न आना

बेडटाइम स्टोरी ने अब इलेक्ट्रॉनिक गैजेट की जगह ले ली है। वो टीवी देखने और गेम खेलने में इतने बिजी हो गए हैं की उनके सोने के समय की कमी पड़ गयी है। लेकिन अगर ये आदत लम्बे समय तक रही तो इसका असर उनके बीहैवियर पर भी पड़ सकता है।

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बैड ईटिंग हैबिट

हम सबने सुना है की स्वस्थ खाना ही एक स्वस्थ दिमाग का निर्माण करता है। लेकिन हम आज उस दौर में हैं जहाँ जंक फ़ूड खाने की आदत बहुत ही नार्मल बात हो गयी है। पेरेंट्स भी अपने बच्चों की आदतों पर उतना कंट्रोल नहीं कर पाते हैं ,और नतीजा ये होता है की बच्चे कम उम्र से ही कोला, बर्गर आदि खाना पीना शुरू कर देते हैं। इसका भी इम्पैक्ट उनके बीहैवियर में देखा जा सकता है।

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शिष्टाचार और वैल्यू का अभाव

बच्चों का दिमाग दूसरों से सिख कर की डेवेलप होता है। अगर पेरेंट्स बच्चों को शिष्टाचार और मूल्यों के बारे में नहीं सिखाएंगे तो ज़ाहिर है की बच्चा बड़ा होकर किसी की बात नहीं सुनेगा और न समझेगा।

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इंटरनेट का बहुत ज्यादा इस्तेमाल

जैसे जैसे इंटरनेट की दुनिया तेज़ी से बढ़ी है वैसे-वैसे इसकी नेगेटिविटी भी सामने आती जा रही है। इंटरनेट के ज्यादा इस्तेमाल से ये एक आदत बन जाती है। इसके अलावा पूरी पॉसिबिलिटी है की आपका बच्चा इंटरनेट पर ऐसे कंटेट के सम्पर्क में भी आ जाएगा जो उसके लिए ठीक नहीं है और जिसका असर आपके बच्चे और उसके बीहैवियर पर दूरगामी होगा।

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क्या आप बच्चों के बुरे बर्ताव के पीछे छुपे और भी किसी कारन के बारे में जानते हैं ?

 

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