इन तीन तरीकों को अपनाएं और बच्चों को टीवी से दूर करें

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भले हमलोग चाहते हो कि हमारे बच्चे टेलीविजन से दिनभर ना चिपके रहे लेकिन आखिरकार वो अपनी उम्र के मुकाबले जितना देखना चाहिए उससे ज्यादा ही हमेशा देखने में कामयाब होते हैं।

मां होने का मतलब ही है कि आप व्यस्त रहेंगी फिर चाहे आप कामकाजी महिला हो या हाउस वाइफ हम टीवी जरुरत के समय ही खोलते हैं फिर चाहे वो किसी अनचाहे गेस्ट के लिए खाना बनाना हो या किसी प्रोजेक्ट को समय पर खत्म करना हो। ऐसे समय में आखिर कौन जिम्मेदारी लेगा।

एक साधारण परिवार की तरह हमें भी इन समस्याओं से गुजरना पड़ा और फिर हमने टीवी को घर में नहीं रखने का फैसला किया और घर एक टीवी मुक्त घर बनाने का सोचा। लेकिन ये कहना जितना आसान है करना उतना ही मुश्किल।

आजकल टीवी स्क्रीन के अलावा भी कई स्क्रीन घर में मौजूद रहते हैं (जी हां हम आई पैड, स्मार्ट फोन की बात कर रहे) और जब हम टीवी बंद करते हैं तो बच्चे घर के बाकी स्क्रीन में खुद को व्यस्त कर लेते हैं।

child watching TV इन तीन तरीकों को अपनाएं और बच्चों को टीवी से दूर करें

लेकिन इसका ये मतलब ये नहीं है कि आप बच्चों को टीवी से दूर रखने के तरीके नहीं अख्तियार कर सकते। यहां कुछ तरीके हैं जिसे मैनें अपनाया। आप भी डालिए एक नजर।

1. अचानक हमेशा के लिए ना हटाएं

किसी भी चीज की अति हमेशा नुकसान करती है।ये सच्चाई है कि आप कोई भी आदत एक बार में नहीं छुड़ा सकते।आप धीरे धीरे अपने बच्चे के टीवी देखने के समय को कम करें।

इसे ऐसे समझिए कि अगर आपका बच्चा दिन भर में तीन घंटे टीवी देखता है तो इसे धीरे-धीरे कुछ समय कम करें। लगभग दो-तीन सप्ताह के बाद इसे 40 मिनट तक ले जाएं। इसके बद आपकी मर्जी है कि पूरी तरह आप टीवी हटाना चाहते हैं या 30 मिनट तक समय जो बच्चों के लिए विशेषज्ञ बताते हैं वो रखना चाहते हैं।

2. कोई और विकल्प की तलाश

आप कभी बच्चों से टीवी बंद कर कुछ और करने कहेंगे तो बच्चे नहीं मानेंगे क्योंकि वो टीवी देखना छोड़ कुछ और नहीं करते।उनके व्यवहार को समझते हुए आप और भी विकल्प तलाशें जो उन्हें बिजी रख सकता है। आप कोशिश कीजिए कि उनके साथ बैठें औऱ उनसे बातें करें।उनकी पसंद-नापसंद से लेकर उऩ्हें जितना हो सके बातों में उलझाए रखें। उन्हे समझने की कोशिश करें कि कैसी बातों को वो ध्यान से सुन रहे हैं और दिलचस्पी ले रहे हैं।

3.जो कहा उसपर अमल करें

आप अपने बच्चे से ये नहीं कह सकते कि वो जाकर पढ़ाई करें और फिर टीवी देखने मिलेगा। इस स्थिति में बच्चें इसे किसी दंड से कम नहीं समझेंगे। पढ़ाई छोड़ उनका ध्यान टीवी पर ही रहेगा।

इसलिए बेहतर यही होगा कि आप अपने टीवी देखें जब बच्चे आसपास ना हों। वो सो रहे हों ,खेलने में व्यस्त हों, स्कूल में हो या कहीं और।

मैं खुद अपनी बेटी के साथ घंटो बैठती थी चाहे वो पढ़ाई कर रही हो या खिलौने से खेल रही हो मैं भी उसके साथ खिलौनो से खेलती थी। ये बच्चों के लिए काफी मुश्किल भरा समय होता है।उनके लिए कोई भी आदत छोड़ देना आसान नहीं होता। आप ही सोचिए अगर आपसे सबसे फेवरिट फूड छोड़ने बोला जाए या फिर आपकी रोज की एक कप चाय। आप ही सोचिए आपके लिए ये बच्चों के लिए कितना मुश्किल होगा।

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