बच्चों को अलग सुलाए या नहीं..आज कीजिए कन्फ्यूजन खत्म

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बच्चों के साथ सोने के कई सकारात्मक फायदे भी हैं

बच्चों का कैसे सोने का तरीका कैसा होना चाहिए ये एक ऐसा मुद्दा है जिसकी उपर सभी के अलग अलग मत हो सकते हैं। सीधे तौर पर बात करें तो इसके लिए दो आइडिया जो किसी के भी दिमाग में आते हैं वो ये कि एक तो क्या बच्चों को अकेले अपने बेडरुम में सोने की आदत होनी चाहिए और दूसरा ये कि पैरेंट्स या किसी को बच्चों के साथ सोना चाहिए। 

बहरहाल इसमें कौन सा तरीका ज्यादा सही है और कौन सा गलत मुद्दे की बात ये नहीं है बल्कि बात ये है कि ज्यादा सही आदत कौन सी है जो बच्चों के लिए आगे जाकर भी सही साबित हो।  क्लिनकल मनौवैज्ञानिक Michael J. Breus साइकोलॉजी टूडे में पब्लिश हुए आर्टिकल में कहा कि बच्चों के साथ बेड शेयर करने से बच्चों के स्वभाव में नकारात्मक परिवर्तन नहीं आता है। 

अपने फील्ड के इन विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के साथ सोने के कई सकारात्मक फायदे भी हैं। यहां ऐसे 8 तरीके हैं उन्होंने बताए हैं कि बच्चों के साथ सोने से कैसे बच्चों की पर्सनैलिटी के लिए ज्यादा अच्छा होता है। 

1.
आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ता है
हेल्दी चाइल्ड की रिर्पोट की माने तो लड़के जो अपने माता-पिता के साथ 5 साल तक और उसके बाद भी सोते हैं उनका मनोबल ज्यादा बढ़ा होता है। C.Joanne Crawford के अनुसार पैरेंट्स के साथ सोने से बच्चों का आत्मवश्वास बढ़ता है और उन्हें लगता है कि उनके पैरेंट्स हमेशा उनके साथ हैं। 

2. ज्यादा स्नेह और प्यार पाने वाले
हेल्दी चाइल्ड के अनुसार बच्चियां जो बचपन में अपने पैरेंट्स के साथ सोती हैं वो ज्यादा ओपन माइंडेड होती हैं। सीधे शब्दों में कहें तो बच्चे जो माता -पिता के साथ सोते वो ज्यादा ओपन माइंडे़ड होते हैं। 

3. ज्यादा अच्छा व्यवहार
डॉ.विलियम्स की रिर्पोट के अनुसार बच्चे जो साथ में सोने के आदी हैं वो स्कूल में ज्यादा अच्छा व्यवहार करते हैं।J,F Forbes की एक स्टडी जिसे हेल्दी चाइल्ड ने भी माना उसके अनुसार साथ में सोने से बच्चों का व्यवहार ज्यादा अच्छा होता है बजाय के उन बच्चों के जो अकेले सोते हैं।

4.
आत्मनिर्भरता पहले आती है
कई बार विवाद होता है कि बच्चे जो अकेले सोते हैं वो धीरे धीरे आत्मनिर्भर बन जाते हैं। University of Notre Dame's Mother-Baby Behavioral Sleep Lab reports का लेकिन इसके ठीक इसके उलट मानना है कि बच्चे जो साथ में सोते हैं वो आत्मनिर्भर और स्वावलंबी जल्दी बनते हैं।

5.
मनोवैज्ञानिक समस्याएं कम
J.F Forbes की स्टडी के मुताबिक बच्चे जो साथ में सोते हैं उनके मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी कम होती हैं। डॉ विलियम के अनुसार बच्चे जिनमें साइकोलॉजिकल समस्याएं ज्यादा होती हैं वो ज्यादातर अकेले सोने वाले बच्चे होते हैं।

6. सकारात्मकता का प्रवाह
अगर आपको रात में अच्छी नींद आती है तो स्वभाविक है कि आप खुश रहेंगे और आपका व्यक्तित्व में इसकी झलक मिलेगी। जाहिर है ये बच्चों के साथ भी होता है। बच्चे जो साथ में सोते हैं उन्हें जल्दी नींद आती है और ज्यादा देर तक वो सोते हैं।

Dr Sears के अनुसार जो बच्चे अपने पैरेंट्स के साथ सोते हैं उन्हें नींद भी जल्दी आती है और वो ज्यादा शांति से सो पाते हैं बजाय उन बच्चों के जो अकेले सोते हैं क्योंकि उन्हें सोने में काफी समय लगता है। इससे बच्चों में सकारात्मक उर्जा मिलती है जो बच्चों के लिए जरुरी होती है।

7.
खुश और गुस्से से दूर
University of Notre Dame's Mother-Baby Behavioral Sleep Lab ने पी.हेरन की एक स्टडी को कंफर्म किया जिसमें उन्होंने माना था कि बच्चे जो अकेले सोते हैं वो ज्यादा डिंमांड करने वाले और नखरे करने वाले होते हैं और जल्दी डर भी जाते हैं। 

8.
चिंतित रहने की संभावना कम
Lewis and Janda की स्टडी के अनुसार बच्चे जो साथ में सोते हैं उनमें Aniexty का खतरा कम होता है बजाय उन बच्चों जो अकेले सोते हैं। Dr Sears भी इस स्टडी को मानते हैं कि साथ में सोने वाले बच्चे ज्यादा निश्चिंत रहते हैं। ये चिंता बच्चों में डर के कारण होती है और उनके सोने का कोई खास समय नहीं रह जाता क्योंकि वो अकेले सोते हैं।

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Source: theindusparent