बच्चों को अनुशासन में रखना है मुश्किल? ये आठ टिप्स आएँगे आपके काम

ये जरूरी है कि बच्चो के लिहाज से हमेशा उन्हें एक ही विचार मम्मी और पापा में दिखाई दे

जैसे जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं ये नॉर्मल है कि वो थोड़े नखरे दिखाते हैं, एट्टिट्यूड में रहते हैं ,आपकी बातों को जबरदस्ती मानते हैं और आपके लिए उन्हें समझाना या काबू में करना काफी मुश्किल हो जाता है।

छोटे बच्चों को भी संभालना मुश्किल हो जाता है। यंग पैरेंट्स का हम आपके लिए लाए है एक अंश जिसमें कुछ साधारण और कारगर नियम हैं कि आप कैसे बच्चों को अनुशासन में रख सकते हैं।

1. अनुशासन लेकिन प्यार से

याद रखिए कि आप जब भी अपने बच्चों को अनुशासित करने की कोशिश कीजिए लेकिन प्यार से। अनुशासन का मतलब ये नहीं होता कि आप बच्चों को किसी तरह से व्यवहार करने के लिए कहें। इसका मतलब होता है कि आप बच्चे का भला चाहते हैं। उन्हें जब भी अनुशासन या नियम कायदों के बारे में बताएं ये जरूर बताएं कि आप उनसे कितना प्यार करती हैं।

2. हमेशा एकमत रहे

ये जरूरी है कि बच्चो के लिहाज से हमेशा उन्हें एक ही विचार मम्मी और पापा में दिखाई दे।ऐसा नहीं कि आप कुछ बोलें और कोई और उससे अलग इससे उसे समझ आ जाएगा कि कब किसके पास किस स्थिति में जाना है और ऐसे में बच्चों को समझाना तो दूर उनके व्यवहार पर कंट्रोल और भी मुश्किल हो जाएगा।

3. ‘नटखट बच्चों’ जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं

बच्चों में Impulse Control कम होता है इसलिए उनमें सोचने समझने की शक्ति नहीं होती कि उनका इरादा सही या गलत है। इसलिए यहां ये समझना जरूरी है कि वो कुछ गलत करें उसे नटखटहोने का तमगा ना दें। अगर आप भी अपने बच्चे को नटखट बोलते हैं आपको ऐसा करना बंद करना चाहिए। गलत आचरण पर हमेशा टोकिए, समझाइए ना कि नटखट या शैतान होने कहकर उसे इग्नोर करें।

4. बच्चों को समझिए

अगर पैरेंट्स का व्यहार गलत है या असंवेदनशील है तो बच्चों के इसका नकारात्मक असर पड़ेगा ही पड़ेगा। आपका बच्चा अभी काफी छोटा है और उसे नहीं पता कि भूख, बोरियत, थकावट ऐसी चीजों से कैसे निपटा जाए। कभी हमे बस धैर्य रखने की जरुरत।

5. नियम बनाएं

कई पैरेंट्स बच्चों को काफी छूट देते हैं और गलत व्यवहार को भी बर्दाश्त करते हैं। आपका बच्चा जितना छोटा है उसे उतनी सीमा में रखने की जरुरत होती है। बाद में आप चाहकर भी उन्हें नहीं बदल पाएंगी।

6. पिटाई या थप्पड़ करें या ना करें

हमलोग में कई ऐसे बचपन में थे जिन्होंने पिटाई खाई होगी लेकिन इसका गलत असर हमपर नहीं हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि शारीरिक दंड बच्चों को मानसिक रुप से डिप्रेशन, गुस्सा, बेअदबी जैसी चीजों को ओर ले जा सकता है।कोशिश कीजिए कि बच्चों के लिए पहले कुछ उपाय खोज लें लेकिन फिर भी आपको लगता है कि कभी कभी पिटाई जरुरी है तो भी गुस्से में ये कदम ना उठाएं।

7. बच्चों के लिए टाइमआउट जरूरी

दो साल से अधिक के बच्चों के लिए टाइमआउट जरूरी है और बहुत ही सही तकनीक है। एक्सपर्ट का भी मानना है कि बच्चों के लिए टाइमआउट जरूरी है।हम आपको बता दें कि टाइमआउट का मतलब है कि कुछ देर के लिए बच्चों को अकेला छोड़ दें और उन्हें खुद सही और गलत समझने दें और आप देखें कि उनके अंदर सकारात्म या नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जैसे दो साल के बच्चों को दो मिनट का समय दें, 4 साल के बच्चों को चार मिनट का।

8. बच्चों का ध्यान भटकाएं

यंग बच्चों के लिए या छोटे बच्चों के लिए जब भी वो दुखी, अशान्त या बेचैन हो तो कुछ मजेदार तरीके अपनाएं जिससे उनका ध्यान भटके।जैसे को गेम या कोई गाना गाएं, कहीं लेकर जाएं ताकि उनक मूड अच्छा हो जाए।

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Source: theindusparent