बच्चों के behaviour से जुड़े problems को ठीक करने के 10 उपाय

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वैकल्पिक चिकित्सा को कुछ इस तरह बनाया गया है की जिससे बच्चों के व्यवहार से लेकर उनके स्वास्थ समेत समग्र विकास को बढ़ावा मिलता है।

पिछले साल अगस्त में 10 साल की एक लड़की समया असलम रोते रोते घर आई क्योंकि उसके शिक्षक असलम के पढ़ाई में ध्यान ना देने से नाराज़ रहते थे और नोट लिख दिया करते थे ।जब उसके माता पिता शिक्षकों के कहने पर मनोचिकित्सक के पास गए तो पता लगा की समया अटेंशन हाइपरेक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) से जूझ रही थी ।

मनोचिकित्सक के कहने पर उन्होंने ध्यान करना आरम्भ किया जो की दवाई खिलाने से बेहतर विकल्प था । 3 महीने के बाद समया स्कूल में बेहतर करने लगी । उसके नंबर अच्छे आने लगे और उसके कई दोस्त भी बन गए |

बच्चों के लिए वैकल्पिक थेरेपी का इस्तेमाल क्यों करें ?

ADHD जैसे मनोवैज्ञानिक समस्याओं के लिए विशेषज्ञ अब वैकल्पिक त्रिकोण पर ज्यादा जोर दे रहे हैं । डॉ मृगया सिन्हा जो दिल्ली के ePsyClinic.com  एक वरिष्ठ मनोचिकित्सक हैं समझाती हैं की वैकल्पिक उपचार जैसे योगा, ध्यान, होमियोपैथी, आयुर्वेद और कला थेरेपी आजकल बहुत आम बात होने लगी है ।

इन सबके अलावा वैकल्पिक उपचारों के प्रचलित होने के कई और कारण वो बताती हैं।

  • ज्यादातर वैकल्पिक उपचार अभी के तरीकों से बहुत पहले के हैं इसीलिए उनका विकास ज्यादा हुआ है।
  • ज्यादातर माता पिता प्रकिर्तिक उपचार को बेहतर मानते हैं।
  • ज्यादातर पेशेवर लोग अब वैकल्पिक उपचार के बारे में ना सिर्फ विश्वास करने लगे हैं वल्कि अब वो माता पिता से इस इलाज़ के बारे में खुल के सलाह भी देने लगे हैं।

हमारे विशेषज्ञ ADHD तथा अन्य शारीरिक तथा मानसिक समस्याओं के लिए इस्तेमाल होनेवाले 10 वैकल्पिक उपचारों के  बारे में बात कर रहे हैं।

1.आर्ट थेरेपी :

क्या : एक पारंपरिक चिकित्सा में खुद को व्यक्त करने में जिन बच्चों को डर लगता है वो सफलतापूर्वक कला के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त कर सकते हैं। कला चिकित्सा बच्चों में व्यवहार की समस्याओं का पता लगाने में मदद करने के लिए रचनात्मक माध्यम का उपयोग करता ।

कैसे : विशेषज्ञों के अनुसार कला उपचार इन समस्याओं के इलाज़ में लाभकारी सकती है :

कला थेरेपी से बचपन के आघात , मृत्यु या हानि, भय और परित्याग के डर की तरह भावना यहां तक ​​कि मधुमेह और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज़ किया जा सकता है। व्यवहारों में आक्रामकता जैसी हालत में कला चिकित्सा एक माध्यम जरूर बन सकता है।

बच्चे  में तनाव से छुटकारा पाने  के लिए, आत्म जागरूकता बढ़ाने के लिए, स्वास्थ और प्रभावी कौशल विकसित करने के लिए कला के माध्यम का उपयोग कर सकते हैं। कला चिकित्सा भावनाओं और चिंताओं पर प्रकाश डालती है अपनी अपनी छवि अपने ही मन में सुधारने का है।

2.संगीत चिकित्सा :

क्या : संगीत चिकित्सा का बातचीत में घबराने आदि पर काबू पाने और गैर मौखिक संचार की सुविधा के लिए बच्चों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है ।

कैसे : डॉ सिन्हा के अनुसार संगीत चिकित्सा ने सामाजिक कार्य में सुधार और सहयोग बढ़ाने तथा विघटनकारी व्यवहार को कम करने में सकारात्मक परिणाम दिखाई है। बच्चों के लिए वैकल्पिक चिकित्सा की इस विधि का उनके चिंता, अवसाद और दर्द को कम करने में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है ।बच्चे स्वाभाविक रूप से संगीत का आनंद उठाते हैं और एक बार उन्हें इसके सभी पहलुओं की पहचान हो जाए तो आत्म अभिव्यक्ति के एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

3.नृत्य (डांस) या चाल चिकित्सा

क्या : चलते हुए एक बच्चे के लिए चलना महसूस करने जैसा है।  डांस थेरेपी में रचनात्मकता और भावनाओं का उपयोग होता है और साथ ही भावनात्मक, मानसिक , शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए उनके चाल या उनके शरीर की गतिविधिओं का भी चिकित्सा में इस्तेमाल होता है।

कैसे : डॉ सिन्हा बताते हैं की डांस थेरेपी बच्चों को मदद कैसे करती है।

डांस थेरेपी अवसाद , चिंता, दर्द के लक्षणों में सुधार और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में कारगर साबित होता है । कैंसर के रोगियों में इस थेरेपी ने दर्द कम किया है साथ ही यह कैंसर के रोगीओं के मन में ऊर्जा भरने  करती है।

“डांस थेरेपी की तकनीक कुछ इस तरह बनाई गयी है की बच्चे अपने मन की अभिव्यक्त और अपनी भावनाओं पर नियंत्रण पाने के लिए उनके शरीर की चाल का उपयोग कर सकते हैं" I नृत्य और शरीर की चाल नियंत्रित घुमाव आदि से संज्ञानतक विकास को बढ़ावा देता है।

डॉ. कपूर कहते हैं की शरीर की चाल के द्वारा उपचार बच्चों में किसी भी चीज़ पर महारथ हासिल करने की प्रवृत्ति को है, इसके अलावा शरीर की चिंता  को भी बाहर करने में मदद करती हैं।

4.आहार पूरक

क्या : पोषक तत्वों की कमी , शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए प्रमुख कारण हैं और इस वजह से पूरक आहार बहुत जरुरी हो गया है। वे अन्यथा नियमित भोजन में आसानी से उपलब्ध नहीं हो सकने वाले पोषक तत्वों को प्रदान करते हैं।

कैसे : डॉ. सिन्हा कहते हैं माता-पिता अपने बच्चों के समग्र विकास  लिए उसके खाने तथा पूरक आहार पर पूरा ध्यान दें।  माता पिता को अपने बच्चों के याददाश्त और सीखने की क्षमता बढ़ाने तथा उसमे आने वाली कठिनाइयों से निपटने के लिए उनका ध्यान रखना चाहिए।

बच्चे के विकास के लिए खुराक की सूची:

विटामिन, खनिज , जड़ी बूटी, प्रोबायोटिक्स , अमीनो एसिड, और अन्य पूरक आहार प्राकृतिक रूप से पाचन शक्ति बढ़ाने का काम करती है। इसका उपयोग नींद न आने , मनोदशा में बदलाव और थकान की विभिन्न समस्याओं के इलाज के लिए भी किया जाता है ।

अश्वगंधा की खुराक आमतौर पर चिंता, ADHD और नींद की कठिनाइयों को दूर करने में काम आता है। कैमोमाइल, जिन्को बाइलोबा , वेलेरियन और ओमेगा -3 फैटी एसिड होता है जो अवसाद और संज्ञानात्मक कार्यों के लिए लोकप्रिय विकल्पों में से हैं।

5. आहार में परिवर्तन

क्या : ऐसे कई सबूत हैं जिनके अनुसार  जो भोजन दिमाग के लिए लाभकारी है वो ADHD जैसी समस्याओं के लिए भी फायदेमंद साबित होते हैं।

कैसे : विशेषज्ञों का मानना है की प्रसंस्कृत खाद्य पर बच्चों की निर्भरता बढ़ती जा रही है इसीलिए इसे नियंत्रित करना जरूरी है।  वो अपने आहार में बदलाव करके निम्नलिखित आहार अपनाने की सलाह देते हैं-: अंडे, मांस , सेम, और नट सहित उच्च प्रोटीन खाद्य पदार्थ, आदि से एकाग्रता में सुधार हो सकता है।सोडा पेय में कैफीन के साथ साथ बहुत चीनी होती है इसीलिए उसे बंद कर दें ।जटिल कार्बोहाइड्रेट , फल, सब्जियां , फलियां, और प्रोटीन की स्वस्थ स्रोतों में अनाज खाद्य पदार्थ पर जोर दें ।

6. होमियोपैथी

क्या : डॉ सिन्हा कहते हैं की " होम्योपैथी उपचार मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रियाओं को पैदा करने पर निर्भर करता है। "

कैसे: मनोचिकित्सा के विपरीत, एक होम्योपैथिक चिकित्सक बच्चे की बीमारियों को अपने जीवन के संदर्भ में रख के देखता है और पूरी तरह से उन्हें समझने की कोशिश करता है। डॉ सिन्हा ने बच्चों के लिए लोकप्रिय होमेओपेथिक चिकित्साओं की एक सूची बनाई है जो बच्चों के समग्र विकास में मदद करता है।

होम्योपैथिक चिकित्सा समस्या का जड़ से इलाज करता है और बच्चे के व्यक्तित्व को सकारात्मक रूप से बदलने में शक्तिशाली भूमिका निभाता है। कई बच्चों को दमा, एक्जिमा आदि की समस्या होती है जिससे उनके व्यवहार तथा  की प्रक्रिया में परेशानी होती है।  इसका इलाज़ भी होम्योपैथी के साथ किया जा सकता है। यह ADHD तथा अस्पेर्गेर्स जैसी समस्याओं से निपटने में भी मदद कर सकता है।

Rhomeopathy-17.योग

क्या: योग का मुख्य लक्ष्य मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने के साथ साथ उसे एक दिशा प्रदान करना है । बच्चों को उनके शानदार लचीलेपन के साथ प्राकृतिक योगी माना जाता है जिससे यह आसानी से उनकी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

कैसे : बच्चों के लिए योगा अलग अलग तरीकों के काम आता है।  डॉ सिन्हा ने इस प्राचीन तकनीक के उपयोगों की निम्नलिखित सूची बनाई है।

गहरी सांस लेने और एकाग्रता से क्रोध, चिंता और भय के सामान्य प्रतिक्रियाओं को बदला जा सकता  हैं।योग खेल में उत्कृष्टता प्राप्त न कर पाने वाले बच्चों के लिए जो वजन की समस्या के साथ संघर्ष कर रहे हैं, लाभकारी व्यायाम साबित हो सकता है। संयम, आभार और गैर न्यायिक दृष्टिकोण के साथ, योग, एक स्वस्थ शरीर की छवि का निर्माण तथा सहिष्णुता बढ़ाने के लिए और विश्वास की भावना को बढ़ा सकता हैं।

योग सभी उम्र के बच्चों के लिए फायदेमंद है, लेकिन यह विशेष रूप से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक पाया गया है।एक दैनिक योग कार्यक्रम आक्रामक व्यवहार काम करने के साथ साथ , सामाजिक वापसी, और सक्रियता बढ़ा देता है जिससे जीवन में नयी सामजिक ऊर्जा का प्रवाह होता है। ।

8.आयुर्वेद

क्या: डॉ सिन्हा कहते हैं "प्रत्येक बच्चा वात, पित्त, और कफ के अपना अनूठा अनुपात के साथ पैदा होता है। एक आयुर्वेदिक डॉक्टर को एक स्वास्थ्य के दोष को समझ सकते हैं और कुछ दवाओं और जीवन शैली में परिवर्तन के साथ उसका इलाज़ कर सकते हैं।

कैसे: डॉ सिन्हा आमतौर पर प्रोत्साहक चाइल्डकैअर के लिए आयुर्वेद की सलाह देती हैं। समय पर जागना और समय पर सोना, सही भोजन करना तथा एक सुसंगत दैनिक दिनचर्या का पालन करना आदि घरेलू उपचार के तौर पर इस्तेमाल होते हैं।

घरेलु उपचारों में अदरक, हल्दी और शहद जैसी चीज़ीं जुकाम और एलर्जी के खिलाफ जबरदस्त रूप से काम करती हैं।

कुछ चिकित्सा जैसे स्वर्ण बिन्दू प्रशाना बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता में सुधार करते हैं। डॉ सिन्हा के मुताबिक बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता, शक्ति, स्मृति और खुफिया सुधार करने के लिए बहुत कम मात्रा में स्वर्ण भस्म का उपयोग किया जाता है।

अमृत गोलियों की तरह अन्य उपचार पर्यावरण विषाक्त पदार्थों के प्रभाव को कम करते हैं ।

9.मसाज थैरेपी

क्या: मालिश भारतीय संस्कृति में चाइल्डकैअर के दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा है।  हर रोज एक मालिश दिनचर्या दर्द और भी भावनात्मक दर्द को कम करती है।

कैसे करें: डॉ सिन्हा बताते हैं, "स्पर्श मानव में विकसित होने वाली पहली भावना होती है और मालिश का अभ्यास हमारे बच्चों के साथ एक करीबी रिश्ते की पुष्टि करते हुए एक विश्वास और सुरक्षा की भावना को प्रबल बनाता है। जो बच्चे स्पर्श की एक स्वस्थ भावना के साथ बड़े होते हैं, उनमे आत्मसम्मान, उचित सीमाओं और लंबे समय से स्थायी संबंधों की भावना प्रवाहित होती रहती है।

डॉ कपूर बताते हैं की  "मालिश से मांसपेशियों में तनाव या व्यथा कम हो जाती है और आराम की अनुभूति बढ़ जाती है।

10.समाधि या ध्यान

क्या: ध्यान के माध्यम से विभिन्न मानसिक और शारीरिक गतिविधिओं  पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकता है और साथ की इससे ध्यान को केंद्रित करने में मदद मिलती है  । विशेषज्ञों का कहना है की ध्यान को बढ़ाने के लिए सरल प्रथाओं का उपयोग करके बच्चों को सिखाया जा सकता है।

कैसे : ध्यान ऊँचे रक्तचाप, चिंता, तनाव, दर्द और अनिद्रा जैसे लक्षणों की एक किस्म का इलाज करने के लिए, साथ ही समग्र स्वास्थ्य और भलाई को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।ध्यान करने तथा सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया से बच्चों में वर्तमान पर अपना ध्यान केंद्रित करने में आसानी हो जाती है। ध्यान दर्द या चिंता आदि से मन हटाने का भी सफल तरिका है।

डॉ सिन्हा बताते हैं की  "अध्ययनों के मुताबिक़ ध्यान या समाधि सीखने से  स्मृतिशक्ति को बढ़ाने और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन में मदद मिलती है।  समाधि बच्चों में शारीरिक स्वास्थ्य में वृद्धि के साथ-साथ जीवन के लिए एक, महत्वपूर्ण उत्सुक लेकिन गैर अनुमान दृष्टिकोण विकसित करने में मदद कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है की ध्यान करने से मूड, दर्द, खुजली, नींद, मतली, और एकाग्रता में सुधार किया जा सकता है । डॉ सिन्हा बताते हैं की "बादलों पर ध्यान केंद्रित करने और उनका आकार बदलने का निरीक्षण करने से या किसी एक घंटी के बजने पर ध्यान केंद्रित करने आदि से भी समाधि या ध्यान की प्रक्रिया का लाभ लिया जा सकता है।

वैकल्पिक  चिकित्सा को कुछ इस तरह बनाया गया है की जिससे बच्चों के व्यवहार से लेकर उनके स्वास्थ समेत समग्र विकास को  बढ़ावा मिलता है।

यह सिर्फ एक जानकारीपूर्ण लेख है। हम एक योग्य चिकित्सक या पर्यवेक्षण के बिना इन उपचारों के उपयोग करने की सलाह नहीं देते हैं।