बच्चों के लिए मैंने अपनाया देसी खाना..जानिए कितना कारगर हुए साबित

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यहां कुछ देसी खाने हैं जो मैंने बच्चों के भोजन में शामिल किया और मेरा विश्वास कीजिए इससे मुझे काफी मदद मिली

मैं उन माओं में से हूं जो बच्चों को खास खाना देने की बात आए तो एक्साइटेड नहीं होती। मेरे लिए बच्चों के भोजन का अर्थ होता है उन्हें पौष्टिक खाना देना और इस बात का ध्यान रखना कि वो दिखने में अच्छे हो और साथ ही फायदेमंद भी।

वहीं दूसरी ओर मेरे पति और बच्चे खाने के शौकीन हैं, उन्हें अलग अलग कुकरी शो देखना और नई नई चीजें बनाना पसंद है। मैं हमेशा सब्जी मंडी जाने वाली और सब्जियां खरीदने वाली औरत हूं और मौसम के अनुसार खाने पर अधिक ध्यान देती हैं। लेकिन धीरे धीरे कब खाने के शौकीन घर के सदस्यों ने इसकी जिम्मेदारी ले ली पता भी नहीं चला। मैं जिस तरह से खाना बनाती थी उसमें बदलाव आ गया, यहां तक कि सामान खरीदने के तरीके में भी।

एक समय आ गया जब खाने की सभी चीजें हम मॉल जाकर खरीदने लगे। मैं ये नहीं कह सकती कि वहां सामान खरीदना आसान नहीं था। अगर आप सिर्फ घर के राशन का सामान खरीद रही हैं तो भी ये काफी मस्ती भरा काम होता है।

वहां तरह-तरह के प्रोडक्ट मिल जाते जिसमें अपने काम की चीज चुनना काफी आसान होता है। इसके अलावा कई और भी चीजें बड़े आराम से मिल जाती है और कई चीजों को तो बस ट्राई करने के लिए भी हम सभी उठा लाते हैं।

बंद खाने की चीजों पर निर्भर..
packaged goods बच्चों के लिए मैंने अपनाया देसी खाना..जानिए कितना कारगर हुए साबित

बिना महसूस किए हुए हम कई अलग अलग तरह के पैकेज्ड फूड पर निर्भर हो जाते हैं। जिसमें पहले से कटे फल के डब्बे तक मौजूद होते हैं।हालांकि बहुत आसानी से तो नहीं लेकिन कई जगहों पर मिलते जरूर हैं। साधारण फल मंडी से जाकर फल खरीदने से कहीं ज्यादा आसान होता है। आप सोचकर देखिए कि फलों को धोने काटने में कितना समय बच जाता है।

ये सब देखने और सुनने में काफी सुविधाजनक लगता है लेकिन धीरे धीरे मैंने महसूस किया कि मैं अपने बच्चों को आसानी से मिलने वाला इंटरनेशनल खाना दे रही थी जो हमारे देसी खानों के आसपास भी नहीं था।

ऐसा नहीं है कि इसका एहसास मुझे एक दिन में हो गया । कभी कभी मेरे बच्चे बीमार पड़ जाते थे और उन्हें एंटिबायोटिक रूटीन पर रहना पड़ता था। मैंने खुद को कहा कि ये सही नहीं है। मैं किचन को वापस भारतीय और देसी बनाना चाहती थी।

हां, हमारे देसी खाने कई पौष्टिक तत्वों से भरा होता है जिससे बेमौसम खाने की चीजें कभी मुकाबला नहीं कर सकती।

यहां कुछ देसी खाने हैं जो मैंने बच्चों के भोजन में शामिल किया और मेरा विश्वास कीजिए इससे मुझे काफी मदद मिली

 

  • मैं हमेशा बच्चों को दूध में एक चुटकी हल्दी या इलायची मिलाकर देने लगी। हल्दी में एंटी-बैक्टिरियल और एंटी ऑक्सिडेंट दोनों पाए जाते हैं जो बच्चों को खांसी, एसिडिटी, कब्ज या भूख मरने की शिकायत नहीं होने देती।
  • मैं बच्चों को पालक खूब खिलाती हूं। मुझे पता है कि सिर्फ इसकी सब्जी बनाने से वो खाना पसंद नहीं करेंगे इसलिए इसे मैंने और भी खाने की चीजों में मिलाना शुरू किया। मैं पालक को चिकन करी, पराठा, चीला, दाल, डोसा, इडली, वेजिटेबल दलिया और सूप में डालना शुरू किया। पालक आखों के लिए, कैंसर से बचाव, मजबूत हड्डियां, स्वस्थ्य मस्तिष्क और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
  • रागी भी काफी जादुई चीज होती है जो भारत में पाई जाती है। मैंने इसे खिचड़ी, डोसा, पराठा, चीजा, केक के मिश्रण में मिलाना शुरू किया। ये पाचन तंत्र के लिए भी काफी अच्छा है। इसमें प्रोटीन और अमीनो एसिड पाया जाता है जो त्वचा के लिए काफी हेल्दी है।
  • मैं ये सुनिश्चित कर लेती हूं कि दिन में दो बार हेल्दी मक्खन या घी खाने में शामिल करूं। हालांकि मक्खन या घी हम बड़ों के लिए फायदेमंद नहीं है लेकिन बड़े हो रहे बच्चों के लिए ये काफी जरूरी है। इसमें विटामिन A, D, E और K पाया जाता है। साथ ही इसमें जिंक, मैगनीज, कॉपर, क्रोमियम जैसे मिनरल भी पाए जाते हैं। ये इम्यून सिस्टम मजबूत करते हैं और मस्तिष्क के लिए भी काफी अच्छा होता है क्योंकि इसमें ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड पाया जाता है।
  • घी में सही मात्रा में कैलोरी पाई जाती है जो एनर्जी देती है। साथ ही इसमें वसा होती है जो बच्चों के लिए लाभकारी है। इसमें एंटी वायरल गुण भी होते हैं।

आप अपने भी देसी खाने के टिप्स जरूर शेयर करें जो बच्चों के लिए और माओं के लिए काफी फायदेमंद होता है और माओं को सहायता भी मिले। और क्या पता हम उस टिप्स को अपने आर्टिकल में शामिल करें।

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Source: theindusparent