ATTENTION - बच्चों के फेफड़ों में संक्रमण (Bronchiolitis ): सिर्फ मूल बातें नहीं जानें सबकुछ

क्या आपके बच्चे को सांस लेने में समस्या होती है? क्या जब वो सांस छोड़ते हैं तो एक अजीब सी आवाज आती है? क्या पांच दिनों से अधिक समय से ऐसा हो रहा है?

अगर ऐसा है तो हो सकता है वो फेफड़े के संक्रमण (Bronochiolitis) भी हो सकता है। फेफड़ों में संक्रमण 2 साल से कम उम्र के बच्चों को अधिक प्रभावित करता है और ये वायुमार्ग में आंशिक या पूर्ण रुकावट का कारण बन सकता है।

बच्चों में फेफड़े का संक्रमण: जानिए इसके बारे में सबकुछ

फेफड़ों में संक्रमण असल में वायरस की वजह से होता है जिसे Respiratory Syncytial Virus (RSV) या rhinovirus कहा जाता है।

वायरस शुरुआत में ब्रांकोइओल्स (फेफड़े और मुंह को नाक से जोड़ने वाला मार्ग ) में रुकावट लाती है और इसके बाद सांसे छोड़ते समय एक अलग सी आवाज आती है। चूंकि बच्चों के फेफड़ों में कम ऑक्सीजन जाता है इसलिए शरीर में खून का स्तर कम होता है।

कई केस में अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टर सुनिश्चित करते हैं कि बच्चे तरल पदार्था लें और सांस बिना किसी परेशानी के लें। कई बच्चे एक सप्ताह के इलाज में भी ठीक हो जाते हैं।  

दुर्भाग्य से कई केस में फेफड़े में संक्रमण बच्चों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। नवजात शिशुओं में वायरल इंफेक्शन बहुत तेजी से बढ़ता है और बच्चों का इम्यून सिस्टम अच्छे से विकसित नहीं होता है। इसलिए पैरेंट्स के लिए इसके बारे में अधिक जानना बेहद जरुरी है। जानिए इसके लक्षण और इलाज के बारे में सबकुछ।

बच्चों में फेफड़ों का संक्रमण

जैसा कि हमने आपको बताया कि बच्चों के फेफड़ों में संक्रमण वायरस के कारण होता है और अलग अलग हेमिस्फेयर में होता है।

उदाहरण के लिए उत्तरी गोलार्ध में फेफड़े का संक्रमण ज्यादातर नवंबर से अप्रैल के बीच होता है और जनवरी और फरवरी के बीच में खासकर ये  और अधिक होता है । दक्षिणी गोलार्ध में ये मई और सितंबर में अधिक होता है।

भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों में फेफड़ों में संक्रमण ज्यादातर मॉनसून में होता है।

फेफड़े का संक्रमण दो साल से कम उम्र के बच्चों को अधिक होता है लेकिन ये बड़े बच्चों में भी हो सकता है।

असल में उन्हें फेफड़े में संक्रमण नहीं बल्कि उनके शरीर में RSV रह जाता है और इसमें घरघराहट और कफ हो जाता है। लेकिन ये लक्षण आपको देखने होंगे।

फेफड़े में संक्रमण में लक्षण

आप नोटिस करेंगे कि फेफड़े में संक्रमण की शुरुआत में खांसी जैसा हो सकता है इसलिए शुरुआती दिनों में आपको ऐसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

  • हल्का कफ
  • लगातार नाक का बहना
  • 100.4°F से अधिक बुखार
  • भूख ना लगना

जैसे-जैसे समय के साथ संक्रमण बढ़ता है वैसे-वैसे निचले श्वसन तंत्र में सूजन अधिक बढ़ जाता है और आपको बच्चों में निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकता है।

  • एपीना (सांस लेने में 15 सेकेंड का ब्रेक )
  • घरघराहट अगर एक सप्ताह से अधिक हो
  • तेजी से सांस लेना, एक मिनट में 60-70 बार मुश्किल से सांस लेना।
  • तेजी से सांस लेने के कारण डिहाइड्रेशन होना।
  • अगर कफ दो सप्ताह से अधिक समय में ठीक ना हो।
  • तेजी से सांस लेने के कारण नाक का फूलना ताकि सांस लेने में परेशानी ना हो।
  • सांस लेने की कोशिश करते वक्त किसी तरह का आवाज निकलना।

ऊपर दिए गए बातों को देखने के बाद आप गौर करेंगे कि अगर संक्रमण बढ़ता है तो बहुत सारे केस में त्वचा नीली हो जाती है। इस तरह के केस में तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं।

दुर्भाग्य से किसी भी वायरल इंफेक्शन में अन्य शिशुओं में भी संक्रमण बढ़ने का खतरा होगा।

RSV और राइनोवायरस ड्रॉपलेट से भी फैल सकता है। ये आसानी से सांस लेने के साथ, कफ, छींक,  आदि के साथ शरीर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए अगर बड़ों में ये वायरस हो तो उन्हें बच्चों से दूर रखें क्योंकि उनकी इम्यूनिटी  कमजोर होती है।

इसी तरह से एक नवजात शिशु जिसे फेफड़े में संक्रमण हैं उन्हें दूसरों बच्चों से अलग रखा चाहिए खासकर जिन्हें फेफड़े में समस्या या हृद्य से जुड़ी समस्या है।

यहां हम आपको बताना चाहेंगे कि बच्चे जब तक ठीक ना हो जाएं तब तक क्या सावधानी आपको बरतनी चाहिए।

बच्चों में फेफड़े का संक्रमण में होने वाले खतरे?

Bronchiolitis in kids

दुर्भाग्य से जो नवजात शिशु में संक्रमण होने का सबसे अधिक खतरा होता है। चूंकि उनका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत नहीं होता इसलिए उनका शरीर वायरस से लड़ने के लिए मजबूत भी नहीं होता है।

लेकिन नवजात शिशुओं को फेफड़े में संक्रमण होने का खतरा इन वजहों से होता है:

  • समय से पहले जन्म
  • भाई/बहन जिन्हें पहले से फेफड़े में संक्रमण की समस्या है
  • अधिक भीड़ या अस्वच्छ तरीके से रहना।
  • बच्चे हमेशा तंबाकू या सिगरेट के संपर्क में रहते हों (आसपास कोई बार-बार इस्तेमाल करता हो)
  • बेबी ने कभी भी स्तनपान नहीं किया हो

बच्चों में कैसे फेफड़े के संक्रमण को पहचानें?

बच्चों के फेफड़े में संक्रमण कुछ टेस्ट के बाद पता चल जाता है। वहीं बड़े बच्चों में ब्लड टेस्ट या एक्स-रे से संक्रमण का कारण पता चल जाता है। ये बच्चों के बीमारी के लेवल और उम्र से पता चल जाता है।

इन टेस्ट में शामिल हैं..

  • व्हाइट ब्लड सेल की संख्या
  • पल्स ओक्सिमेट्री
  • मूत्र परीक्षण
  • ब्लड कल्चर
  • सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट

इन सब के बीच आप कुछ उपायों का पालन करके इसे रोकने की कोशिश कर सकती हैं।

फेफड़े के संक्रमण से बचने के कुछ उपाय

चूंकि सभी वायरस वायु-जनित होते हैं और एक से दूसरे शख्स तक फैल सकते हैं इसलिए हमेशा सुनिश्चित कर लें कि आप साफ रहें और बेबी को छूने से पहले अपने हाथों को सेनेटाइज कर लें। जो लोग पहले से संक्रमित हैं उन्हें बेबी के मुंह, आंख और नाक को नहीं छूना चाहिए।

अगर संभव हो तो आप भी फेस मास्क पहनें और संक्रमण फैलने से बचाएं। आप इन तरीकों को भी अपना सकती हैं।

  • जिन्हें सर्दी या खांसी हो उनसे बच्चों को दूर रखें।
  • अपने घर को साफ और संक्रमण से दूर रखें।
  • आप अपना पानी पीने का ग्लास अलग रखें
  • घर में भी फेस मास्क का इस्तेमाल करें।
  • अपने  हाथों को एल्कोहल बेस्ड क्लिंजर से साफ करें।
  • बेबी को अधिक से अधिक स्तनपान कराएं ताकि इम्यूनिटी अच्छी हो।

जहां तक टीकाकरण की बात है तो सुनिश्चित कर लें कि आप डॉक्टर से दिख रहे लक्षणों के बारे में बात करें और सही इलाज कराएं।

फेफड़े के संक्रमण का इलाज?

Bronchiolitis in kids

हालांकि बच्चों में संक्रमण का कोई स्पेशल टीका नहीं होता  है लेकिन 6 महीने से कम के बच्चों को हर साल फ्लू शॉट दिया जा सकता है। कई गंभीर स्थिति में बच्चों को palivizumab (Synagis) भी दिया जाता है ताकि RSV का खतरा कम हो सके।

जिन्हें अस्पताल में अधिक गंभीर स्थिति में भर्ती किया गया है उन्हें ऑक्सीजन के लिए  nasal cannula दिया जाता है। कुछ नवजात शिशुओं को ऑक्सीजन बॉक्स भी दिया जाता है ताकि खून और ऑक्सीजन का लेवल बना रहे।

कभी-कभी बच्चों की अधिक गंभीर स्थिति में वेंटिलेटर पर भी डाला जाता है। हमेशा ये याद रखें कि फेफड़े में संक्रमण वायरस की वजह से होता है इसलिए गंदे जगहों से बच्चों को दूर रखें।