बच्चों का खर्राटा लेना हो सकता है खतरनाक...

बच्चों का खर्राटा लेना हो सकता है खतरनाक...

हवा का बहाव अगर सांस लेने के दौरान अच्छे से ना हो तो सांस लेने में समस्या होती है और ये गंभीर स्वास्थ समस्या मानी जाती है। 

कुछ दिनों पहले मैं अपने एक दोस्त से मिली और वो किसी कारण से काफी से दुखी थी। जब मैंने पूछा तो उसने बताया कि उसके बेटे की तबियत अच्छी नहीं थी और वो और उसके पति किसी तरह के लक्षण को पहचानने में फेल हो गए।

जब मैंने इस बारे में विस्तार से पूछा तो उसने कहा कि इसकी शुरुआत खर्राटे से हुई थी जो उसे छोटे बच्चे में काफी क्यूट लगता था। शुरुआत में उन्हें लगा कि ये बेबी को पापा से आनुवांशिक रुप से आया है और उन्होंने इस हल्के में लिया है। जब ये समय के साथ ठीक नहीं हुआ तो पैरेंट्स को लगा कि शायद नाक बंद है और उन्होंने अपने मन से दवा दे दी।

लेकिन नहीं सुधरी बच्चे की हालत

जल्दी ही बच्चा हमेशा नींद आने की शिकायत करने लगा और स्कूल बस भी छूट जाती थी। मेरी दोस्त गुस्से में हर दिन उसे डांट देती थी लेकिन वो कभी समय से बिस्तर पर जाने के बाद भी नहीं सो पाता था और समय से नहीं उठ पाता था। कुछ समय बाद उसके टीचर ने पैरेंट्स को बुलाकर बताया कि उनका बच्चा क्लास में बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पाता है और फोकस नहीं पाता है। सारा दिन क्लास में थका हुआ दिखता है।

इसके बाद पैरेंट्स अपने बच्चे को डॉक्टर के यहां ले गए और मेडिकल चेकअप कराया और इसके बाद जो निकला वो उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था।
बच्चों का खर्राटा लेना हो सकता है खतरनाक...

असल में उस छोटे बच्चे को स्लीप एपनिया (Sleep Apnea)

अब आप सोच रहे होंगे कि स्लीप एपनिया क्या है

हवा का बहाव अगर सांस लेने के दौरान किसी भी कारण से अच्छे से ना हो तो सांस लेने में समस्या होती है और ये गंभीर हेल्थ समस्या मानी जाती है। कई बार ऐसे में सांस लेना भी बंद हो सकता है। अगर इसका समय पर इलाज ना हो तो कई गंभीर बीमारी हो सकती है जो जिंदगी को खतरे में डाल सकती है।

रात में बच्चों पर ध्यान दें और इन लक्षणों पर भी नजर रखें।

रात में बच्चों पर ध्यान दें और इन लक्षणों पर भी नजर रखें।

  • एक सप्ताह में 3 रातों से अधिक दिनों तक खर्राटे लेना। 
  • खर्राटे लेने की वजह से सांस लेने में दिक्कत हो या कुछ सेकेंड के लिए बच्चे सांस ना ले पाएं।
  • सोने के दौरान पसीना आना
  • सोने के दौरान भी आराम ना कर पाना, बहुत अधिक अंगड़ाई लेना, अपना पोजिशन बहुत बदलना, अजीब पोजिशन में सोना।
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  • हो सकता है वो छोटे हों और बिस्तर गीला करें लेकिन अगर वो टॉयलेट जाने के लिए ट्रेंड होने के बाद भी वो बिस्तर गीला करते हों जबकि पहले वो बिस्तर गीला ना करते हों।

दिन में बच्चों के इन लक्ष्णों पर दें ध्यान

  • अगर वो सुबह ना उठ पाएं। 
  • खुद में खोए रहना और फोकस ना कर पाना। 
  • सोशल, व्यवहार या सीखने में समस्या हो। 
  • मूड स्विंग होना, जल्दी गुस्सा हो जाना, विरोधी स्वभाव का होना। 
  • नाक से बोलना। 

क्या करें

सबसे पहले अपने बच्चे को डॉक्टर के पास लेकर जाएं और इसे हल्के में ना लें। कई अच्छे अस्पताल अच्छे से सोने के ट्रीटमेंट देते हैं जिसमें स्लीप एपनिया भी शामिल है। इसके बाद डॉक्टर खुद आपके बच्चे को सही सलाह और ट्रीटमेंट देंगे। 

 

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theIndusparent