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बच्चे को मोटापे से बचाने के लिए अपनाएं ये तरीके

इन सब कारणों के अलावा तेजी से बढ़ रही मोटापा नाम की गंभीर समस्या की एक बड़ी वजह है छोटे बच्चों का जंक फूड या तैलीय चीजों की तरफ बढता रुझान

आजकल छोटे बच्चों में मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के आधार पर पूरी दुनिया में  5 साल से कम उम्र के 2 करोड़ 20 लाख से भी अधिक बच्चे ओवरवेट हैं ।

विशेषज्ञों की मानें तो छोटे बच्चों में मोटापा होने का एक कारण है गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर में विटामिन डी की कमी । ये भी संभव है कि माता-पिता के ओवरवेट होने के कारण बच्चा भी आगे जाकर मोटापे का शिकार हो जाए ।

इन सब कारणों के अलावा तेजी से बढ़ रही मोटापा नाम की गंभीर समस्या की एक बड़ी वजह है छोटे बच्चों का जंक फूड या तैलीय चीजों की तरफ बढता रुझान । कोई बच्चा सामान्य वजन वाला है या नहीं इसका पता बच्चे की उम्र एवं लंबाई के आधार पर कैलक्युलेट किया गया उनका बीएमआई यान बॉडी मास इन्डेक्स ही बता देता है ।  

बच्चे को मोटापे से बचाने के लिए माता-पिता क्या करें

आज के सामय में अगर माता-पिता दोनों ही कामकाज़ी हों तो जाहिर है कि उनके पास बच्चे के लिए समय थोड़ा कम ही रहेगा ,ऐसे में स्नैक्स तैयार करना हो या हल्के भूख का इंतजाम करना हो, अधिकांश लोग झटपट तैयार होने वाला भोजन ही चुनते हैं । ये जानते हुए भी कि 2 मिनट में तैयार होने वाली सामग्री सेहतमंद नहीं है हम बच्चों के ज़िद्द के आगे झुक ही जाते हैं ।

चूंकि स्कूल एवं ऐक्स्ट्रा एक्टिविटी क्लासेज के कारण अब बच्चों के पास भी वक्त नहीं होता कि वो उछल-कूद कर सकें । स्मार्ट टीवी, मोबाईल एवं विडियो गेम के ज़माने में आउटडोर गेम्स में बच्चे की भागीदारी भी कम हो रही है यही कारण है कि अब बच्चों में शिथिलता बढ़ती जा रही है जिसके कारण छोटी उम्र के बच्चों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है ।   

  • गर्भावस्था के दौरान ही मां को धूप सेकनी चाहिए और शिशु को कम से कम 6 माह तक स्तनपान अवश्य कराना चाहिए ।
  • गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार लेना आवश्यक होता है ताकि भविष्य में भी शिशु का स्वास्थ्य व शरीर ठीक रह सके ।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी उम्र से ही बच्चे को सक्रिय रखना चाहिए । आजकल खेलने के कम जगहों के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधियां जिस तरह से कम होती जा रही हैं वही बच्चों में मोटापा का कारण बन रही है ।
  • बच्चे के भोजन की शुरुआत थोड़ी-थोड़ी मात्रा के साथ करें । बच्चे अपनी भूख एवं ऊर्जा ज़रुरत के मुताबिक ही खाना खाएं तो अच्छा होगा । बच्चे की वजन में बढ़ोतरी हो रही हो तो जबरदस्ती उसे कुछ भी ना खिलाएं । भूख लगने पर ही उसे भोजन दें ।
  • सॉफ्ट ड्रिंक की बजाए खूब पानी ,ताजा जूस या नींबू पानी पीना सिखाएं ।
  • रोजाना सुबह का नाश्ता बच्चे को ज़रुर खिलाएं इससे लंच टाईम उन्हें कम खाने की इच्छा रहती है और वो अनावश्यक रुप से कैलोरी नहीं जमा कर पाते ।
  • पैरेंट्स को चाहिए वो बच्चों में चॉकलेट व अन्य पैकेट बंद चीजों की बजाए ताजे फलों को खरीदने की लालसा जगाएं ।
  • तली-भूनी चीजें छोटे बच्चे को बहुत कम ही खिलाएं ।    
  • हरी पत्तेदार सब्जियां, सलाद आदि खाना बच्चों को शुरुआत से ही सिखाना चाहिए ।
  • आपको बता दें कि शुरुआती कुछ वर्षों में मोटापा को कंट्रोल कर आप बच्चे को एक स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं । क्योंकि मोटापा आगे जाकर कई बीमारियों जैसे- डायबीटिज, हृदयरोग, ब्लडप्रेशर इत्यादि का कारण बन जाता है ।