प्रेग्नेंसी के नौवे महीने में ना बरतें लापरवाही...इन खास बातों का रखें ख्याल

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चूंकि गर्भावस्था के आखिरी चरण से आप गुज़र रही हैं तो ऐसे में किसी भी बात को अनदेखा ना करें।

यूं तो गर्भावस्था के दौरान इन पूरे नौ महीनों तक गर्भवती को अपना अपने बेबी का पूरा ख्याल रखना पड़ता है लेकिन जैसे ही उसे नौवा महीना लगे उसे और भी सतर्क होकर रहना पड़ता है। आपको बता दें कि गर्भवती का जैसे ही आठवां महीना खत्म होता है बेबी पेट के अंदर हलचल शुरू कर देता है।

गर्भवती को अहसास होता है कि बेबी पेट में लाते मार रहा है जिससे उसे हल्का हल्का दर्द का अनुभव भी होता है। गर्भवती के लिए नौवा महीना ऐसा है जिसमें उन्हें सबसे ज्यादा सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। उन्हें ना सिर्फ अपने खान पान को लेकर बल्कि अपनी उठने बैठने की आदतों को लेकर भी काफी सतर्क रहना पड़ता है। क्योंकि इस समय बच्चे का पूरा विकास हो चुका होता है और उसका वज़न तेज़ी से बढ़ता है।

ऐसे में करें डॉक्टर से संपर्क

चूंकि गर्भावस्था के आखिरी चरण से आप गुज़र रही हैं तो ऐसे में किसी भी बात को अनदेखा ना करें। अगर आपकी योनि से सफेद पानी निकले तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। इसके अलावा डॉक्टर की दी हुई डेट पर आप उनसे ज़रूर मिलें।

  • अगर आपको लगे कि आपको बार बार दर्द उठ रहा है तो डॉक्टर से मिलने में देरी ना करें। आप इसमें ज़रा भी लापरवाही ना बरतें।
  • अगर आपको लगे कि ब्लड प्रेशर या बुखार जैसी समस्या आपको हो रही है तो डॉक्टर से मिलें।
  • इसके अलावा अगर आप शुगर की मरीज़ हैं और आपका शुगर लेवल बढ़ गया है तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।

क्या करें क्या ना करें

  • आप प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में हैं और इस समय आपको कब कमज़ोरी जाए पता नहीं रहता। इसलिए आप हमेशा घर में फल रखें क्योंकि आपकी डिलिवरी भी कब हो जाए पता नहीं रहता। आपको जब भी कमज़ोरी लगे तो फल खा लें।
  • आप अपने खान-पान अच्छे से ख्याल रखें। डॉक्टर ने आपको जो डाइट बताई है उसे अच्छे से फॉलो करें। और बच्चे को समय से पहले डिलिवर कराने की जल्दबाज़ी ना करें। क्योंकि कुछ लोग ज्योतिषि में बहुत विश्वास रखते हैं और चाहते हैं कि शुभ मुहुर्त पर आपके बच्चे का जन्म हो। ऐसा समय से पहले कराने से बच्चे के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
  • चूंकि आपकी डिलिवरी कभी भी हो सकती है तो आप मैटरनिटी बैग पूरी तरह तैयार कर के रखें। कोशिश करें कि आप दो बैग पैक करें, जिसमें आपके और बच्चे के साफ कपड़े हों। ध्यान रहे कि बच्चे के जन्म के बाद उन्हें नया कपड़ा ना पहनाएं क्योंकि उनकी त्वचा काफी नाज़ुक होती है और नए कपड़ों से उन्हें रैशेज़ हो सकते हैं।
  • आप अपने बैग में एक मेडिकेटेड साबुन, क्रीम, कंघा, चार जोड़ी कपड़े, एक साफ चादर, एक कॉटन का पैकेट, टूथ ब्रश, टूथ पेस्, आदि जैसी आवश्यक चीज़ें ज़रूर रखें।

इसके अलावा आप इस बात का ध्यान रखें कि अगर आप घर में अकेली हैं तो अपने मोबाइल फोन के स्पीड डायल में उस व्यक्ति का नंबर ज़रूर रखें जो ज़रूरत पड़ने पर तुरंत आपके पास सबसे पहले पहुंच पाए।

नवजात शिशुओं का शरीर एक फूल की पंखुड़ी के समान होता है उन्‍हें बहुत ही सावधानी से रखना पड़ता है। इसलिए उनके पीने के लिए भी सिर्फ मां का दूध ही सजेस्‍ट किया जाता है क्‍योंकि वो पचने में आसान और लाइट होता है। लेकिन इन दिनों कई मां फैशन के चक्‍कर में आकर दूध पिलाना उचित नहीं मानती है और कई को दूध बनता ही नहीं है। कुछ महिलाएं ऐसी होती हैं जिनमें बहुत कम मात्रा में दूध बनता है। ऐसी महिलाओं को अपने खान-पान पर ध्‍यान देना चाहिए इससे उनमें काफी अच्‍छी मात्रा में दूध बनेगा।

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मेडिकल जगत में भी इस विषय पर काफी रिसर्च हो चुकी है जिसकी वजह से मां के दूध को बच्‍चे के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। अगर आपने हाल ही में संतान को जन्‍म दिया है और अपना स्‍तनपान करवाती हैं तो इन 10 ड्रिंक्‍स को पूरे दिन में अवश्‍य पिएं ताकि आपका शरीर हाईड्रेट बना रहे और आप बच्‍चे को भरपूर मात्रा में दूध का सेवन भी करवा पाएं :

पानी

ये कहना गलत नहीं होगा कि पानी हर ड्रिंक की जननी है यानि आप इसके बगैर किसी भी ड्रिंक को बना भी नहीं सकते हैं। साथ ही ये दुनिया का सबसे स्‍ट्रांग ड्रिंक है। इसे पीने से शरीर हाईड्रेट रहता है और आपकी बॉडी भी फ्रेश रहती है। आपको ये जानकर आश्‍चर्य होगा कि स्‍तन में बनने वाले दूध में 88 प्रतिशत पानी ही होता है। इसलिए स्‍तनपान करवाने वाली महिलाओं को हर दिन 13 गिलास पानी अवश्‍य पीना चाहिए।

मेंथी की चाय

स्‍तनपान करवाने महिलाएं अगर मेंथी की चाय पीती हैं तो इसका असर 72 घंटों के भीतर ही दिखने लगता है। ऐसी महिलाओं को दिन में एक बार इस चाय को पीने क सलाह दी जाती है। आपको दूध पर्याप्‍त मात्रा में बनता है तो दो दिन में एक बार इसका सेवन करें या कम मात्रा में इसका सेवन करें। इस दौरान आपकी यूरिन से मैपल सीरप की तरह महक आ सकती है लेकिन घबराएं नहीं। डायबटीज वाली महिलाओं को बता दें कि इसे पीने से ब्‍लड़ सुगर लेवल बहुत गिर जाता है।

सौंफ की चाय

सौंफ से बनी हुई चाय स्‍तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए बहुत ही अच्‍छी होती है। इसे पीने से उनके शरीर में आवश्‍यक हारमोन्‍स की मात्रा बढ़ जाती है और लैक्‍टेशन की प्रक्रिया फास्‍ट हो जाती है। साथ ही बनने वाले मिल्‍क की क्‍वालिटी भी अच्‍छी हो जाती है। इस चाय को बनाते समय आपको सौंफ के दानों को चाय बनाने के दौरान डाल देना होता है। ध्‍यान दें उबाल देने के बाद ही ये दाने डालें। इससे चाय में गुण आ जाएंगे लेकिन कड़वापन नहीं आएगा।

रास्‍पबेरी लीफ टी

स्‍तनपान करवाले वाली मम्मियों को के लिए रास्‍पवेरी किसी वरदान से कम नहीं है। इसका सेवन करने से दुग्‍ध की मात्रा बढ़ जाती है। आप चाहें तो इसकी पत्तियों को चाय बनाते समय डाल दें और इस हर्बल टी से लैक्‍टेशन की प्रक्रिया बूस्‍ट हो जाती है। जिन महिलाओं को स्‍तनों में दूध नहीं उतरता है वो एक दिन में चार कप इस चाय का सेवन करें। इससे उन्‍हें काफी आराम मिलेगा। आपको बता दें कि इस चाय में आयरन, कैल्शियम, मैग्‍नीशियम और विटामिन ई और सी होता है।

नेटल टी यानि चिड़चिड़े की चाय

नाम पर न जाएं इसके गुण पर ध्‍यान दें। नेटल की पत्तियों को सुखाकर रख लें और उबले हुए पानी में खौलाकर पी जाएं। ऐसा करने से प्रसव के बाद आने वाली कमजोरी दूर हो जाती है और दूध का उत्‍पादन भी शरीर मे बढ़ जाता है। लेकिन कुछ महिलाओं पर इसके हल्‍के साइड इफेक्‍ट भी होते हैं जिनको इसे पीने की सलाह नहीं दी जाती है। 

बादाम मिल्‍क 

बादाम में विटामिन ए, डी और ई की भरपूर मात्रा होती है जिससे स्‍तनपान कराने के दौरान स्‍तनों में दूध की मात्रा में कमी नहीं हो पाती है। बेहतर होगा कि आप रात भर पानी में भीगे बादाम को गाय के दूध में मिलाकर पी जाएं। बादाम को सील पर घिसकर दूध में मिलाना होगा। इससे आपको बेहद आराम महसूस होगा और कमजोरी भी दूर होगी।