प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना कितना सुरक्षित...जानिए इससे संबंधित सारे सवालों के जवाब

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना कितना सुरक्षित...जानिए इससे संबंधित सारे सवालों के जवाब

प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीने में गर्भपात होने का डर रहता है इसलिए सीढ़ीयां ना चढ़ने, यात्रा ना करने, धीरे चलने, भारी वस्तु ना उठाने, तथा संभोग ना करने के साथ ही आराम करने की सलाह दी जाती है ।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग या गर्भावस्था में रक्तश्राव होना किसी भी ऐक्सपेक्टिंग मॉम के लिए घबराहट की बात होगी । लेकिन आपको धैर्य पूर्वक ये समझना होगा कि आपके कपड़े पर खून के एक धब्बे मात्र से आपको गर्भधारण से संबंधित कोई परेशानी नहीं होगी ।

गर्भधारण के शुरुआती तीन महीने के दौरान अगर हल्की ब्लीडिंग हो जाए तो इसमें चिंता की कोई बात नहीं तकरीबन एक चौथाई मां बनने वाली महिलाओं के साथ ऐसा होता है खास कर गर्भावस्था की पहली तिमाही में उन महिलाओं में लाइट ब्लीडिंग होना सामान्य है जो जुड़वा बच्चों की मां बनने वाली हों ।

अगर किसी परिस्थिति में आप सामान्य महसूस नहीं कर रही हों या पेट में अत्यधिक दर्द या योनि से खून के साथ सॉलिड पार्टिकल्स (थक्का) जैसा निकलता दिखाई दे तो जल्द से जल्द किसी गायनोकोलॉजिस्ट से मिलकर इस पर चर्चा करें क्योंकि ये गर्भपात के लक्षण हो सकते हैं ।

ऐसे में रक्तश्राव या किसी भी प्रकार के वेजाइनल डिस्चार्ज को हल्के में ना लेते हुए, गर्भावस्था से जुड़ी कठिनाईयों के हर एक पहलू का जिक्र विस्तार से करें ताकि वो आपकी समस्या का सही कारण पता लगाकर ट्रीटमेंट शुरु कर सकें ।  

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग या गर्भावस्था में रक्तश्राव होने का कारण क्या है...

  • अंडा रोपण यानि इम्प्लांटेशन के कारण- जब निषेचित अंडा मां के बच्चेदानी में सफलता पूर्वक प्रवेश कर लेता है तो इस प्रक्रिया में रक्त कोष्टक के टूटने के कारण योनि से रक्तश्राव होने लगता है जो कुछ घंटे या किसी परिस्थिति में एक दो दिन में खुद ही ठीक हो जाता है ।
  • माहवारी चक्र का टूटना- गर्भावस्था के हार्मोन आपके मासिक चक्र को दबाने लगते हैं कई बार इस प्रयास में थोड़ा वक्त लग सकता है । इसलिए ऐसा संभव है कि पीरियड की निश्चित तिथि को आप उन दिनों में होने वाली समस्याओं को महसूस करें जैसे- टेंडर ब्रेस्ट, कमर दर्द, पेट दर्द आदि इसके साथ ही थोड़ी ब्लीडिंग भी हो सकती है जो बहुत कम मात्रा में होगी और स्वत: बंद हो जाएगी ।
  • योनि में संक्रमण- शरीर के आंतरिक हिस्से बेहद ही संवेदनशील होते हैं जिनमें संक्रमण होने से ब्लीडिंग की संभावना रहती है । कई बार योनि या ग्रीवा में बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण ऐसा होता है ।                
  • यौन संबंध- रक्तश्राव होने का एक कारण सेक्सुअल इंटरकोर्स भी हो सकता है । इसलिए गर्भधारण के शुरुआती 3-4 महीनों में परहेज़ करना जरुरी होता है वैसे भी कठिन गर्भधारण की स्थिति में अपनी गायनो की सलाह के बगैर यौन संबंध बनाना कई मायनों में असुरक्षित हो सकता है ।
  • अस्थानिक गर्भधारण- ये परिस्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होता है । जब अंडा सही जगह ना पहुंच सके और बच्चेदानी के अलावा कहीं और सेटल हो जाए तो उसे अस्थानिक गर्भ कहेंगे । सामान्य रुप से इस परिस्थिति में अंडा गर्भाशय नाल में ही रुक जाता है जिसके कारण गर्भवती महिला को ब्लीडिंग के साथ असहज रुप से पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है ।
  • मोलर गर्भावस्था- रक्तश्राव निषेचित अंडे में किसी असामान्यता का भी संकेत दे सकती है । इस परिस्थिति में भ्रूण का विकास हो पाना संभव नहीं होता।   

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना कितना सुरक्षित...जानिए इससे संबंधित सारे सवालों के जवाब

प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीने में गर्भपात होने का डर रहता है इसलिए सीढ़ीयां ना चढ़ने, यात्रा ना करने, धीरे चलने, भारी वस्तु ना उठाने, तथा संभोग ना करने के साथ ही आराम करने की सलाह दी जाती है ।

आगे के महीनों में ये डर कम हो जाता है फिर भी सावधानी बर्तनी चाहिए । आठवें या नौवें महीने में ब्लीडिंग होना असमय प्रसव का संकेत हो सकता है । इसलिए तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए ।

गर्भपात के लक्षण क्या हैं...

  • माहवारी के जैसे ही पेट दर्द होना
  • भूरे रंग का श्राव या हल्के गुलाबी रंग का डिस्चार्ज होना
  • योनि में खिंचाव महसूस होना
  • खून के थक्के निकलना
  • पेट दर्द का तीव्र होना                                                                                                                                                                      

खून दिखते ही गर्भपात हो जाए ये आवश्यक नहीं । समय रहते अगर डॉक्टर की देखरेख मिल जाए तो आपके शिशु की सुरक्षा निश्चित हो जाएगी पर गर्भावस्था में ब्लीडिंग होना कई मायनों में खतरनाक भी साबित हो सकता है ।

इसलिए आपको गर्भधारण करने के बाद से रेगुलर चेकअप कराना चाहिए ताकि किसी भी विकट परिस्थिति का संकेत डॉक्टर को पहले ही मिल जाए ।

अगर अत्यधिक खून बह रहा हो तो ज्यादा मात्रा में पेय पदार्थ जैसे जूस आदि लें ।इस समय पूर्ण रुप से आराम करने की सलाह दी जाती है। गर्भावस्ता के दौरान शरीर में हो रहे बदलाव को लेकर सजग रहें ।

इस अवस्था में योनि से निकलने वाला हर पदार्थ सांकेतिक होता है इसलिए डॉक्टर से हर बात खुल कर साझा करें ।

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Written by

Shradha Suman