pregnancy के लिए 7 जरुरी भोजन

pregnancy के लिए 7 जरुरी भोजन

7 जरूरी खास भोजन आपकी प्रेगनेंसी के लिए

प्रेगनेंसी के दौरान पौष्टिक भोजन का सेवन सीधे बच्चे की वृद्धि और विकास को प्रभावित करता है । यह सही वजन, विकसित दिमाग साथ सामान्य जन्म के लिए प्रारंभिक पोषण है । 

प्रेगनेंसी के लिए 7 जरुरी भोजन और आवश्यक विटामिन और पोषक तत्वों से भरा एक आहार भी गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के खतरे को कम करने के लिए काफी है। उदाहरण के लिए, यह थकान, सुबह की बीमारी को कम करने के साथ साथ मूड को भी ठीक करता है। प्रीति सेठ, दिल्ली में एक कॉस्मेटोलॉजिस्ट और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट हैं जो कहती हैं की परिवार नियोजन से पहले खाये जानेवाले पदार्थ फोलेट, लौह तत्वों और फाइबर पोषक तत्वों से समृद्ध होने चाहिए । उदाहरण के लिए, अंजीर और किशमिश के सेवन से शरीर में कैल्शियम, लोहा, पोटेशियम और जस्ता की मात्रा बढ़ जाती है। गर्भवती महिलाओं को भी अपने शरीर में कैल्शियम की मात्रा बनाये रखने के लिए दूध और दूध उत्पादों जैसे खाद्य पदार्थों के सेवन में वृद्धि करनी चाहिए । सबसे अच्छे प्रसव पूर्व खाद्द पदार्थ की पहचान करने के लिए, आपको पता होना चाहिए की एक माँ बनने जा रही महिला के शरीर में किस तरह के बदलाव होते है जिससे उचित प्रबंध किया जा सकता है। हमारे विशेषज्ञों ने माँ बनने जा रही महिलाओं के लिए 7 सुपरफूड्स की लिस्ट बनाई है जो एक माँ के आहार का हिसा होना ही चाहिए।

 

 

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हरे पत्तों वाली सब्जियां

गुड़गांव स्थित लोकेन्द्र तोमर, एक आहार और पोषण विशेषज्ञ कहते हैं की फोलिक एसिड हमारे शरीर के रीढ़ की हड्डी के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है। फोलिक एसिड की कमी के कारण जन्मदोष होने की संभावना बनी रहती है ।इसी तरह से जब आप किसी बच्चे के बनते हुए होठ को देखते हैं तो यह बायोटिन की कमी की वजह से होता है । हरी पत्तेदार सब्जियां फोलिक एसिड और बायोटिन दोनों का एक अच्छा स्रोत हैं। इसलिए, हर खाने में उन्हें शामिल जरूर करें।

इसके अलावा, अपने मतलब हरी भोजन में हरी फूलगोभी डालना न भूलें ।

नीरज मेहता , मुंबई के एक पोषण विशेषज्ञ और जी.एफ.एफ.आई स्वास्थ्य अकादमी के निर्देशक, बताते हैं की बताते हैं की फूलगोभी लोहा, कैल्शियम, बीटा - कैरोटीन, विटामिन सी और वसा में घुलनशील विटामिन के का एक समृद्ध स्रोत है। अपने आहार में सिर्फ एक ही सब्जी जोड़ने से आपको कई तरह के लाभ हो सकते हैं। यह कैंसर और ट्यूमर से लड़ने में भी साबित होता है । हरी फूलगोभी हड्डी बिल्डर के नाम जाना जाता है साथ ही यह मोतियाबिंद जैसे रोगों और उम्र बढ़ने के लक्षणों से लड़ने में मदद करता है। "

 

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अंडे

अंडे प्रोटीन के सबसे कमाल के स्रोतों में से एक हैं । अंडे में मौजूद एमिनो एसिड की संरचना हमारे शरीर के एमिनो एसिड की संरचना से बहुत-जुलता है। हमारे शरीर का लगभग 10% हिस्सा प्रोटीन से बना है । गर्भावस्था भ्रूण के निरंतर विकास का चरण होता है । अत: शरीर की मांसपेशियों , त्वचा, अंगों और ऊतकों को बनाने के लिए प्रोटीन की निरंतर आपूर्ति की जरूरत होती है । इसलिए, दिन में कम से कम दो अंडे जरूर लें ।

 

 

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आँवला

तोमर आगे बताते हैं की अगर आप गर्भावस्था के दौरान दोषरहित त्वचा की इच्छा रखते है तो एंटीऑक्सिडेंट खाइये । अमले में विटामिन - सी और अन्य एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो भोजन में प्रदूषित वातावरण या कीटनाशक द्वारा आये खतरनाक कणों को निष्क्रिय कर देता है । जब तक दो इलेक्ट्रान एक साथ हैं तबतक तो अच्छी बात है लेकिन ही वो अलग होते हैं बहुत गुस्सैल और लड़ाकू हो जाते हैं. जब ये गुस्सैल रूप में होते हैं तब ये शरीर के कई अंगों को नष्ट कर देते हैं ।यहाँ तक की वो विकासशील भ्रूण की कोशिकाओं को भी नष्ट कर सकते हैं। एंटीऑक्सिडेंट अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन वाले पोषक तत्व होते हैं, वे अकेले गुस्से वाले इलेक्ट्रान के साथ जुड़कर जोड़ी बना लेते हैं जिससे आपको कोई नुकसान नहीं पहुँच पाता है।

 

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दूध

दूध क्यों ? तोमर बताते हैं की दूध सिर्फ कैल्शियम के लिए जरूरी नहीं है वल्कि यह आसानी से पच भी जाता है । इसके कैल्शियम भ्रूण में मजबूत हड्डियों और के निर्माण के लिए आवश्यक होते हैं । स्नैक्स के साथ छाछ भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।तोमर बताते हैं की प्रोटीन की खुराक को दूध में डाल कर भी पीया जा सकता है।अगर आप शाकाहारी हैं, तो आप के लिए प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत पाश्चराइज्ड दूध है।

मेहता आगे कहते हैं दुग्ध उत्पाद जैसे दही पनीर आदि  भी प्रोटीन के बहुत अच्छे स्रोत हैं। प्रोबायोटिक्स के वजह से दही एक असाधारण सुपर फ़ूड  है। यह भरपूर  प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है। दही भी कैल्शियम, विटामिन बी 12, और पोटेशियम से भरपूर होता  है। यह भी हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है । जापान में एक अध्ययन में नियमित रूप से दही खाने वालों के मौखिक स्वास्थ्य में सुधार दिखाया है। यह आपके पट्टिका, मसूड़े की सूजन और बुरे  सांस के खिलाफ  लड़ने में मदद करता है।

 

 

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अखरोट

क्या आपको अपने  पाठ्य पुस्तकों में अध्ययन किये गए  मस्तिष्क का आकार याद है? अब  एक अखरोट के आकार कल्पना कीजिये , यह बिलकुल वैसा ही होता है । हमारे मस्तिष्क का लगभग 60% ओमेगा -3 फैटी एसिड से बना है । तोमर बताते हैं की भ्रूण में विकसित होने वाला पहला अंग है मस्तिष्क और इस विकास में कच्चे माल की जरूरत तो होती  ही है।  अखरोट, बादाम और सन बीज ओमेगा 3 फैटी एसिड के अच्छे स्रोत हैं । भुना हुआ नमकीन बादाम भी गर्भावस्था के दौरान मतली की भावना को कम कर सकते हैं ।

 

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साबुत अनाज
सफेद आटे  ( मैदा ) से बनी  कोई भी चीज़  , उदाहरण के लिए रोटी , बिस्कुट आदि बहुत खतरनाक होते  है । यह आंत में फँस जाता  है और कब्ज का कारण बनता है । "गर्भावस्था के दौरान, गर्भाशय के बढ़ते आकार आंत को धक्का ;लगाते हैं । यह आंत की नलिओं को संकरा कर देता है । कम पानी और कम फाइबर के खाद्य सामग्री  पुरानी कब्ज के कारण हो सकते हैं यहाँ तक की एक और बहुत ही दर्दनाक स्थिति का  निर्माण  हो  सकता  है  जिसे बवासीर कहते  है। इसलिए फाइबर गर्भावस्था के दौरान आहार का एक हिस्सा होना चाहिए । तो, दर्द से बचने के लिए साबुत अनाज खाते रहिये ।

 

 

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पानी

चौंक गए ! हाँ ये  सच है। हमारा शरीर लगभग 70% पानी से बना है । वास्तव में, यह हमारे शरीर के निर्विषकरण में मदद करता है। अध्ययन के अनुसार, 80% शहरी आबादी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीता है।

जब हम खाना खाते हैं , यह विभाजित होकर रक्त प्रवाह में प्रवेश होकर  हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका तक जाता है। कोशिकाएं इस भोजन का उपयोग उर्जा पैदा करने में करते हैं । इस प्रक्रिया में, कुछ चयापचय अपशिष्ट (मेटाबोलिक वेस्ट ) उत्पन्न हो जाते है जिन्हें लसीका प्रणाली में डाल दिया जाता है । लसीका प्रणाली अपशिष्ट पदार्थों को किडनी तक ले जाती है जहाँ से इसे  अंततः शरीर से निकाल दिया जाता है । तोमर बताते  हैं की  अगर हम पर्याप्त पानी न पीयें तो  विषाक्त पदार्थ हमारे लसीका नोड्स में एकत्रित हो जाते हैं । समय के साथ यही  नोड्स गाँठ में परिवर्तित हो जाते हैं

उन्होंने आगे  कहा कि अगर माँ अपने स्तनों में, कांख में या कमर पर  कुछ गाँठ जैसा महसूस करे  तो इसकी वजह विषाक्त पदार्थों का एकत्रित होना हो सकता है ।
अगर आप स्वस्थ त्वचा के साथ एक बच्चा चाहते हैं तो पर्याप्त मात्रा में  पानी पीते रहे । गर्मियों में 3-5 लीटर और सर्दिओं में  2-3 लीटर पानी  पीना ही चाहिए । सुबह सुबह खाली पेट एक ग्लास पानी पीने से चयापचय (मेटाबोलिज्म ) दर  में करीब 30 % की बढ़ोत्तरी होती  है। "
स्वास्थ्य की योजना गर्भावस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। इसीलिए खाने की व्यवस्था कुछ ऐसी करें जिससे आपको और आपके बच्चे दोनों को फायदा हो।

 

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Written by

Prashant Jain