पुनर्विवाह का बच्चों पर प्रभाव...क्या आपके बच्चों के लिए सही है?

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बच्चों के दोनों ही पैरेंट्स से अच्छे रिलेशनशिप होते हैं और परिवार के टूटने से वो किसी एक को खोते हैं। इसलिए कुछ सावधानी बरतना जरूरी है।

कुछ समय पहले पूरा देश इंद्राणी मुखर्जी केस के खुलासे के बारे में जानकर हिल गया था। मीडिया से ताल्लुक रखने वाली इंद्राणी मुखर्जी तीन बच्चों की मां हैं और उनपर अपने पहले पति की बेटी की हत्या करने का आरो है। आगे बढ़ने की महत्वाकांझा और भूख उनके निजी रिश्तों मसलन लिव इन पार्टनर, दो पति और उनके बच्चों के साथ भी रिश्ते को उलझा बैठी।

इंद्राणी मुखर्जी की बार बार होने वाली शादियां और हर बार बोला गया झूठ उनके रिश्ते बच्चों के साथ खराब कर बैठी। क्या सभी पुनर्विवाह ऐसे ही होते हैं। क्या ऐसे टूटे हुए रिश्तों का बच्चों पर बुरा असर पड़ता है।

मुंबई की मनोचिक्तिसक डॉ सीमा हिंगोरेनी के अनुसार इसका जवाब हमेशा इस पर निर्भर करता है कि पैरेंट्स कैसे बच्चों को इसके लिए तैयार करते हैं। इसके लिए हमेशा उन्हें इस तरह के मसलों में शामिल करें-कम से कम एक से दो साल पहले से तो जरूर। ऐसा करने से बच्चों को अधिक अपनापन और प्यार का एहसास होता है । इससे धीरे धीरे वो अपने नए पिता और माता को भी अपना पाएंगे।

पुनर्विवाह का बच्चों पर असर!

भारत में पुनर्विवाह में हमेशा कई तरह की उलझनें होती है खासकर बच्चों के लिए। बच्चों पर पुनर्विवाह का नकारात्मक असर भी पड़ता है। दिल्ली की मनोविशेषज्ञ और सोशलिस्ट अनुजा कपूर का कहना है कि बच्चे ना सिर्फ पैरेंट्स के विवाद, पुनर्विवाह और तलाक के कारण फंस जाते हैं बल्कि कई बार उन्हें इसके गलत परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं।

बच्चे एकल पैरेंट्स, सौतेले पैरेंट्स के आने से अपने माता या पिता को नहीं भूल सकते। इस तरह के केस में वो खुश नहीं रहते। ऐसे केस में बच्चों को लगता है कि असफल शादियां उनके पैरेंट्स के अलगाव और पुनर्विवाह से ज्यादा अच्छा है।

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अनुजा कपूर के अनुसार ये पांच प्रभाव बच्चों पर पुनर्विवाह के पड़ते हैं

  • टूटे हुए परिवार के बच्चों को बॉन्डिंग बनाने में काफी समस्या होती है।
  • इसका उनके स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
  • इस वजह से वो कम कॉन्फिडेंस और दोस्तों करने भी समस्या होती है।
  • वो तनाव से जुड़ी समस्याओं का सामना करते हैं जैसे सर दर्द, बिस्तर गीला करना, पेट दर्द , बीमार रहना
  • स्कूल जाने में आनाकानी करना
  • खुद को तुच्छ समझना

हालांकि अगर इसे अच्छे से संभाला जाए तो पैरेंट्स इस प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं ताकि उनपर पुनर्विवाह का गलत प्रभाव ना पड़े। मुंबई बेस्ड 28 वर्षीय मीडिया प्रोफेशनल दीपिका त्रिलोकेकर ने खुद की प्रेरणा देने वाली कहानी शेयर की।

दीपिका त्रिलोकेकर के अनुसार मेरे पैरेंट्स की लंबे समय तक एक दूसरे से नहीं बनी और मैंने नोटिस किया कि उनके बीच सबकुछ ठीक नहीं है। जब पानी सर से ऊपर चला गया तो मेरी मां ने शादी को तोड़ने का फैसला लिया और 2000 में तलाक के अर्जी डाली। जब उन्होंने मेरे पिता को छोड़ा तो बाकियों की सोच से अलग मैंने उन्हें सपोर्ट किया और इस तरह से इसकी शुरूआत हुई। 2011 में उन्होंने मेरे नए पापा से शादी कर ली और वो हमारे लिए वरदान की तरह आए।

त्रिलोकेकर अपनी मां का साथ दे सकती थी क्योंकि वो बड़ी थी लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हर बड़ा बच्चा अपने पैरेंट्स को समझ सकता है कि उन्हें पार्टनर की जरूरत है। उनके अनुसार इस तरह की स्थिति में सकारात्मक माहौल बनाकर ही चीजों को संभाला जा सकता है। पैरेंट्स को अपने बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए और उनकी बातें सुननी चाहिए। अगर आपका बच्चा लगातार आपके नए रिश्ते के खिलाफ है तो अपने प्लान पर विचार करें और उनकी शादी का तब तक इंतजार करें जब तक कि वो इसके लिए तैयार ना हो जाएं।

जो पैरेंट्स हैं अलग होने के लिए तैयार वो ध्यान में रखें ये बातें

विशेषज्ञों के अनुसार पैरेंट्स को जब एहसास हो कि उनके बीच समस्याएं हैं तो सबसे पहले ये ध्यान दें कि बच्चों के दोनों ही पैरेंट्स से अच्छे रिलेशनशिप होते हैं और परिवार के टूटने से वो किसी एक को खोते हैं। इसलिए कुछ सावधानी बरतना जरूरी है।

डॉ कपूर ने एक चेकलिस्ट बनाया जिसमें 9 खास बातों पर ध्यान देने के लिए कहा ताकि बच्चों पर पुनर्विवाह के नकारात्मक प्रभावो को कैसे रोका जाए। हमेशा याद रखें कि ये कोई कठिन कार्य नहीं है कि आप अपने बच्चों को पैरेंट्स के तलाक के लिए और दूसरी शादी के लिए तैयार करें।

1. बच्चों से खुलकर बात करें : उन्हें बताइए कि आप उनकी केयर करते हैं और उनकी जगह ना बदली है और ना तो उन्हें आप भूल गए हैं। उन्हें अपनी बातें कहने दीजिए और इस बदलाव के बारे में खुल कर बताएं और स्थिति को संभालें।

2. सहानुभूति रखें : बच्चे पुर्नविवाह को हानि की तरह लेते हैं । वो दुबारा शादी के बारे में हो सकता है नहीं समझे या फिर उसके बारे में बात नहीं कर पाएं। आपके बच्चे क्या महसूस कर रहे हैं समझे। उन्हें सुने और उनकी चिंताओं को दूर करें।

3. बच्चों को एडजस्ट करने का समय दें : कुछ बच्चे नए रिश्तों में जल्दी घुलमिल जाते हैं और कुछ थोड़े संवेदनशील होते हैं।उन्हें एडजस्ट करने में समय लगता है। बच्चों को नई परिस्थिति में तुरंत ढल जाने का दवाब ना डालें। आप उनसे उम्मीद रखें कि वो विनम्रता और इज्जत के साथ पेश आएं।

4. ईमानदार रहें :  अपने बच्चे को सच्चाई बताएं कि जो हो रहा है वो सर्वोत्तम है। उन्हें बताएं कि शादी क्यों टूट गई लेकिन अपने पूर्व पार्टनर के बारे में कुछ भी बुरा ना बोलें। अपनी अपनी गलतियां स्वीकार करें जिसकी वजह से शादी टूटी। बच्चे परिस्थिति को अपने हिसाब से समझते हैं इसलिए उन्हें समझाएं कि इसमें किसी की भी गलती नहीं है।

5. बच्चे को नकारात्मकता से दूर रखें : हमेशा नकारात्मक बातों को जितना हो सके दूर रखें और ऐसी बातों को भी खुद तक ही सीमित रखें।

6. आपका बच्चा आपका जासूस नहीं : आप बडे हैं आपको बात करना सीखना ही होगा। अगर आपको अपने पूर्व पार्टनर को कुछ कहना है तो इसके लिए बच्चों का सहारा ना लें। अपना काम खुद करें।

विशेषज्ञों के अनुसार एक बार जब आप सुनिश्चित कर लें कि फिर से शादी करने से कोई नकारात्मक प्रभाव बच्चों पर नहीं पड़ेगा और वो इस स्थिति के लिए तैयार हैं। इसके बाद आप चाहें तो विशेषज्ञ की सलाह ले सकती हैं कि वो किस लेवल तक परिवार के नए सदस्य को अपना चुके हैं। उनसे बात करें और पूछें कि अगर उन्हें कोई चिंता सता रही है।

अगर आपके पास कोई सवाल या रेसिपी है तो कमेंट सेक्शन में जरूर शेयर करें।

Source: theindusparent