पढ़िए कैसे गले में बंधा काला टोटका शिशु के लिए बन गया ख़तरा

पढ़िए कैसे गले में बंधा काला टोटका शिशु के लिए बन गया ख़तरा

उस घटना के बाद मैंने शिशु के गले में कभी कोई ताबीज़ नहीं बांधी...पढ़िए पूरा वाकया

परिवार में जैसे ही किसी नन्हे सदस्य का आगमन होता है हर तरफ से रिश्तेदार और जानकार हमें शिशु की परवरिश से जुड़ी बातें समझाने लगते हैं । हो ना हो ये अनचाहे टिप्स हमारे लिए मददगार भी साबित होते हैं  जिसमें से कई आज़माये हुए घरेलू नुस्खे तो बेहद ही काम के होते हैं ।

इन सब टिप्स के साथ ही हमें अपने शिशु को बुरी नज़र और नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के लिए ताबीज़ आदि पहनाने के लिए भी कहा जाता है । चूंकि घर के बड़े-बूढ़े भी इससे काफी सहमत होते हैं इसलिए बदलते समय के अपडेटेड पैरेंट्स होने के बावज़ूद हमें इन विधियों पर भरोसा करना ही पड़ता है ।

यकींन मानिए शिशु के गले में बंधा काला धागा उसकी मदद भले ही ना करे पर उसे संक्रमित ज़रुर कर सकता है ।

डॉक्टर्स कभी भी इस तरह धागा बांधने की सलाह नहीं देते । चूंकि नहाने के बाद ये धागा गीला ही रह जाता है और कपड़ों के भीतर पूरी तरह सूख नहीं पाता इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है ।

धागे में तेल साबुन व अन्य गंदगी चिपकी रहती है जिसके कारण गले में रैशेज़ हो जाते हैं । शिशु इसे मुंह में भी ले सकते हैं और दुर्भाग्यवश अगर शिशु के हाथ धागे का फंदा खींचा जाए तो धागा गले में कस भी सकता है ।

ऊपर से जब आप अपशगुन या अनहोनी से बचाने के लिए उसमें चांदी या लोहे , या तांबे की पोटलीनुमा डिब्बे में हींग या फूल- भभूति बांध देते हैं तब समस्या और भी बढ़ सकती है । अगर आप वाकई में शिशु को परेशानी से बचाना चाहती हैं तो उसकी सेहत, साफ-सफाई और सुरक्षा का ध्यान रखें ।

छठी के दिन मेरे घर में भी पुरानी परंपराओं के अनुसार शिशु को काजल लगाने के साथ-साथ उसके गले में काला धागा एवं चांदी का जंतर डालने की विधि की गई थी ।

उस चांदी की पोटली में कई तरह के नज़र बट्टु डाले गए थे जिसके बाद उसे बंद कर लॉकेट का आकार दिया गया था दरअसल बुरी नज़र से शिशु को बचाने के लिए इन चीज़ों की डिमांड इतनी ज्यादा है कि ये सब गहने की दुकानों में या कहीं और भी रेडिमेड ही बाज़ार में उपलब्ध रहता है ।

पढ़िए कैसे गले में बंधा काला टोटका शिशु के लिए बन गया ख़तरा

सब ठीक चल रहा था...लेकिन कुछ दिनों बाद...एक दोपहर को मुझे शिशु के डायपर बदलने के दौरान उसमें सूई की टुकड़ी मिली । मुझे लगा कि ये डायपर ही डिफेक्टेड रहा होगा वरना उसमें सूई आऐगी कहां से ।

भगवान की कृपा से शिशु को सूई चुभ नहीं सकी थी और समय रहते मैंने देख लिया फिर भी ये बहुत चिंता की बात थी संदेहवश मैंने बचे हुए डायपर को एक-एक कर चेक किया लेकिन वहां सब कुछ ठीक था ।

फिर मुझे उसके कपड़े पर भी वैसी ही नुकीली टुकड़ी मिली अब मेरा घबरा जाना लाज़िमी था । तुरंत ही मैंने अपने शिशु के सारे कपड़े उतार दिए और तभी मेरी नज़र उसके लॉकेट पर पड़ी...जी हां सभी फसाद की जड़ तो वही थी ।

दरअसल चांदी के चौकोर ल़ॉकेट का एक भाग खुल गया था हो सकता है कि शिशु को नहाने के समय पानी में गीला होने के कारण उसमें चिपकाया गया पदार्थ ढ़ीला होकर निकल गया हो । उसी में नज़र से बचाने के लिए फिलर के तौर पर इस्तेमाल किया गया टोटके का सामान एक एक कर गिर रहा था और हमें इसकी भनक तक नहीं लगी ।

ख़ैर सही समय पर जांच करने के कारण ही मेरे शिशु को कोई तकलीफ नहीं हुई और वो पूरी तरह से सामान्य रहा वरना सूई उसके मुंह में या सीने में या फिर कहीं भी चुभ सकती थी ।

मेरे नन्हे से शिशु को इस अंधविश्वास के कारण कितनी बड़ी दुर्घटना का सामना करना पड़ सकता था....ओह् !! इसकी कल्पना करते हुए आज भी मैं भयभीत हो जाती हूं । इस वाकये से मुझे बड़ी सीख मिल गई थी और उस दिन ही मैंने साफ शब्दों में इन सब टोटकों को ना कह दिया ।

मैं समझ सकती हूं कि मां का दिल अपने शिशु को सभी बलाओं से बचाने के लिए हर संभव ऊपाय करने को तैयार रहता है लेकिन फिर भी आपको सकारात्मक रहना चाहिए ।

ईश्वर ने जीवन दिया है तो निश्चय ही वो उसकी रक्षा करेंगे और फिर आप की ममता से बढ़कर दूसरा कोई नज़र बट्टु आपके शिशु के लिए कहां हो सकता है ।     

Any views or opinions expressed in this article are personal and belong solely to the author; and do not represent those of theAsianparent or its clients.

Written by

theIndusparent