नन्हे बच्चों को गुड-टच, बैड-टच की ट्रेनिंग देने के दौरान आज़माएं ये टिप्स

सबसे पहले बच्चे का विश्वास जीतें । ताकि आप उसके माध्यम से स्कूल में हुए हर एक वाकये पर निगाह रख सकें । सबके साथ उसके अच्छे व्यवहार या कभी-कभी होने वाली नोंक-झोंक के विषय में पूरी जानकारी लेना जरुरी है ।

हर उम्र के बच्चों के साथ आएदिन हो रहे यौन-शोषण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए आपको भी अपने बच्चे को इस बारे में बेहतर ट्रेनिंग देने की ज़रुरत है । जी हां, लड़का हो या लड़की बच्चे बड़े हों या छोटे सभी को अपने शरीर को हर बुरी नज़र से सुरक्षित रखने के लिए तैयार करना भी आपकी ही जिम्मेदारियों में शुमार है । यूं तो हम अपने नन्हे सितारों को कई तरह के क्रियाकलापों, अच्छे-बुरे सलीकों, जीने के तौर-तरीकों आदि के बारे में बताते रहते हैं लेकिन कई बार हम उन्हें अच्छे बुरे लोगों में फर्क करना या गुड और बैड टच में अंतर समझना नहीं सिखा पाते ।

इसके पीछे का एक कारण ये है कि छोटे बच्चे इतनी बड़ी बातों को समझने के लिए मानसिक रुप से तैयार नहीं होते हैं और दूसरा कारण है कि हम आसान तरीके से उन्हें अपनी बात समझाने में विफल होते हैं । खैर, वजह चाहे जो भी हो लेकिन बच्चों के कोमल मस्तिष्क में यौन सुरक्षा और शोषण से संबंधित सही और सटीक जानकारी हमेशा के लिए बिठा देना आज के समय की मांग है । तो आईए इस ज़रुरी काम को सरलता से करने में हम आपकी कुछ मदद कर देते हैं ।

स्टोरी टेलिंग के माध्यम से हम बच्चों को बड़ी-बड़ी सीख दे सकते हैं । इसलिए नियमित रुप से रात्रि में एक मोरल स्टोरी और अंत में उससे मिली सीख पर बच्चे से चर्चा करें । उनके दिलो-दिमाग को सींचने का इससे बेहतर विकल्प और कुछ नहीं हो सकता । लेकिन कहानी के विषय में बदलाव करती रहें और अच्छे-बुरे बर्ताव या टच को भी विस्तार से बताएं ।

सबसे पहले बच्चे का विश्वास जीतें । ताकि आप उसके माध्यम से स्कूल में हुए हर एक वाकये पर निगाह रख सकें । सबके साथ उसके अच्छे व्यवहार या कभी-कभी होने वाली नोंक-झोंक के विषय में पूरी जानकारी लेना जरुरी है ।

तीन साल के बच्चों को आप प्राईवेट पार्टस और गुड-बैड टच की समझ दे सकती हैं वो कैसे जानिए....

उन्हें किसी गुड्डे या डॉल को दिखाकर बताएं कि शरीर के जो भाग हमेशा ही ढके होते हैं उन्हें हम प्राईवेट पार्टस कहते हैं और उनपर सिर्फ आपका ही अधिकार होता है । किसी भी परिस्थिति में कोई अन्य व्यक्ति या करीबी रिश्तेदार, घर या बाहर वहां छूने की कोशिश करे तो ज़ोर से मना करना चाहिए या वहां से बिना डरे तुरंत हट जाना चाहिए और इस बारे में अपने पैरेंट्स से जरुर बात करनी चाहिए

आप बच्चे से पूछें...जब मॉम आपको गले लगाती हैं या पापा प्यार-दुलार करते हैं तो आप कैसा महसूस करती/करते हो...इस तरह आप दादा-दादी या जो भी सदस्य साथ में रहते हों उनके स्पर्श के विषय में पूछें । अगर हो सके तो उसी वक्त डेमोन्सट्रेट कर के दिखाएं ताकि वो सही जबाब दे सकें । ज़ाहिर सी बात है उनका जबाब होगा कि उन्हें अच्छा फील होता है । अब आप उन्हें बताएं कि किसी के शरीर के आंतरिक भागों को स्पर्श करना बुरा टच होता है किसी ऐसे व्यक्ति जिनके साथ वो सहज नहीं हैं उनका गाल पर किस करना या कहीं भी चूमना बैड टच है ।

4 साल या अधिक उम्र के बच्चे को आप ये सिखाऐं कि किसी अपरिचित या दूर के रिश्तेदार के घर जाने पर उनकी गोद में ना बैंठे । अगर करीबी लोग हैं और बच्चा उनके साथ सहज महसूस कर रहा हो तभी ही आप बाहर जाने या अकेले घूमाने की अनुमति दें ।

3 साल की उम्र के बाद आप बच्चे को स्नान कराने के दौरान उन्हें खुद ही अपने प्राईवेट पार्टस की सफाई करने को कहें । ताकि वो इस मामले में संवेदनशील हो सके ।

हालांकि अपने प्रयासों में आपको सावधान भी रहना होगा ताकि बच्चे के दिमाग पर अनावश्यक भार ना पड़े । और कहीं ऐसा ना हो जाए कि वो हर किसी को शक की निगाहों से ही देखने लगें ।

कई लोग मानसिक विकृति के शिकार होते हैं जिनका पहचान बच्चे तब तक नहीं कर पाते जब तक कि वो उनके शिकार ना हो जाएं इसलिए पैरेंट्स को हर वक्त बच्चे के हाव-भाव और उनके करीबी लोगों पर निगाह रखनी चाहिए ।