धनतेरस की खरीदारी और खुशियों के बीच घर के बाहर एक दीया जलाना कतई ना भूलें... जानिए क्या है इसके पीछे का रहस्य

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शास्त्रों के अनुसार धनतेरस वाले दिन शाम होते ही अपने मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख कर के एक दीपक जरुर जलाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि यम दीपक जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और घर के किसी भी सदस्य की अकाल मृत्यु नहीं होती।

धन की कामना करते हुए धनतेरस के दिन हम तरह-तरह की चीजें खरीदते हैं। इस दिन सोने-चांदी से लेकर, पीतल एवं स्टील के बर्तन खरीदने की प्रथा है। अपने घर को धन-धान्य से परिपूर्ण रखने के लिए घर में विशेष पूजा का आयोजन भी किया जाता है।

लेकिन ध्यान रहे, सुख संमृद्धि के साथ ही स्वस्थ और सकुशल होना भी जरुरी है। इसलिए यमदेव का स्मरण करना ना भूलें। घरेलू सामान लाने और बाज़ारों के चक्कर काटने के बीच आप ना करें ऐसी गलती जिसका बाद में अफसोस बना रहे।  

धनतेरस के त्योहार में खरीदारी और पूजा-पाठ तो सभी करते हैं पर इस दिन मृत्यु के देवता यमराज का आवाह्न करना भी अति आवश्यक है। शास्त्रों के अनुसार धनतेरस वाले दिन शाम होते ही अपने मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख कर के एक दीपक जरुर जलाना चाहिए।

ऐसी मान्यता है कि यम दीपक जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और घर के किसी भी सदस्य की अकाल मृत्यु नहीं होती।  

धनतेरस की खरीदारी और खुशियों के बीच घर के बाहर एक दीया जलाना कतई ना भूलें... जानिए क्या है इसके पीछे का रहस्य

mitacmaitra / Pixabay

इस संदर्भ में एक कथा है कि हिम नाम के राजा को कई वर्षों बाद पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन उस पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह के चौथे दिन ही उनका देहांत हो जाएगा। समय बीतते देर नहीं लगी और एक दिन राजा ने अपने पुत्र का विवाह संपन्न कराया।

चौथे दिन अपने पति की प्राण रक्षा के लिए नवविवाहिता वधु ने पूरे महल को दीये से जगमग कर दिया और स्वंय देवी लक्ष्मी के ध्यान में लीन हो गई। जैसे ही यमराज राजा के पुत्र को यमलोक ले जाने पहुंचे तो वो वधु की भक्ति के प्रभाव से महल के भीतर प्रवेश नहीं कर पा रहे थे।

अंत में उन्होंने सर्प का रुप धारण किया लेकिन दीये की चकाचौंध में वो भटक कर माता लक्ष्मी की आराधना में लीन वधु के समक्ष पहुंच गए।

कहा जाता है कि वैसी अलौकिक पूजा-पाठ देखने और सुनने में वो इतने खो गए की सुबह हो गई और इस तरह उस पतिव्रता राजकुमारी ने अपने पति के प्राण  बचा लिए और इसतरह खाली हाथ यमलोक लौटते हुए यमराज ने कहा था कि जो भी स्त्री अपने घर के मुख्य द्वारा पर दीपक जलाऐंगी उनके परिवार को अकाल मृत्यु का भय नहीं सताऐगा।

  • नया दीपक का प्रयोग करें
  • कहीं-कहीं गाय के शुद्ध गोबर से बना दीया जलाने की प्रथा भी है
  • सरसों के तेल का दीया जलावें
  • दक्षिण दिशा की ओर दीपक को रखें

Written by

Shradha Suman

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