देश के लिए शर्म की बात...IIT दिल्ली स्कॉलर ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर की आत्महत्या

भोपाल की रहने वाली मंजुला देवक सिविल इंजीनियर थी और आईआईटी दिल्ली से PhD कर रही थी, दहेज प्रताड़ना से तंग आकर अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली

एक बेहद दिल दहलाने वाली दुर्घटना में आईआईटी दिल्ली की स्कॉलर ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली।वो अपने ससुराल वालों की दहेज प्रताड़ना से तंग आकर ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर हो गई।

भोपाल की रहने वाली मंजुला देवक सिविल इंजीनियर थी और आईआईटी दिल्ली से PhD कर रही थी। वो पहले US में काम करती थीं और अपनी PhD की पढ़ाई पूरी करने वापस आई थी और आईआईटी दिल्ली कैंपस के नालंदा अपार्टमेंट में अपने पति के साथ रहती थी।

 

उसके पति राजेश विरहा किसी काम के सिलसिले में इंदौर गए हुए थे।मंजुला के दोस्तों ने घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस को घटनास्थल पर बुलाया।

मंजुला के परिवार वाले ससुराल पक्ष को इस मौत का जिम्मेदार मान रहे हैं। उनके ससुराल वाले हमेशा चाहते थे कि वो PhD की पढ़ाई अधुरी छोड़कर वापस आ जाए।

क्या मेरी बेटी PhD करने के बाद घरेलू महिला बनकर रहती?

मंजुला के भावुक पिता का कहना है कि "मैंने अपनी बेटी की पढ़ाई पर जितने पैसे खर्च किए मुझे वो बचा लेना चाहिए था।मंजुला के परिवार वालों का कहना है कि उसके मंजुला की मां ने भी मीडिया से कहा कि "ससुराल वाले PhD के लिए पहले तैयार हुए थे लेकिन शादी के बाद इसके खिलाफ थे। वो उससे पैसों की मांग करते थे और PhD छोड़ने का दवाब डालते थे।"

शोक में डूबे मंजुला के पिता ने ये भी कहा कि मंजुला बहुत प्रतिभावान और होनहार छात्रा थी।

मंजुला के पिता ने कहा कि "मंजुला अपनी थीसिस अगले महीने खत्म करने वाली थी लेकिन उसके ससुराल वाले चाहते थे कि वो भोपाल आकर घर गृहस्थी संभाले। उसका पति राजेश भी 25 लाख दहेज की मांग कर रहा था। क्या मेरी बेटी डॉक्टरेट के बाद घर के काम काज करती।"

मंजुला के सुपरवाइजर ने भी इस बात पुष्टि की वो काफी ज्यादा प्रेशर और तनाव में थी।

भारत में दहेज से मृत्यु

 
dowry

एक ओर भारत जहां सबसे विकसित देश बनना चाहता है लेकिन बेहद दुख की बात है कि दहेज से प्रताड़ित होकर मरने वालों की संख्या में भी काफी इजाफा हो रहा है। INCRB के आंकड़ों के मुताबिक 2012 में18233 लोगों की मौत दहेज प्रताड़ना की वजह से हुई थी। इसका मतलब है कि हर 90 मिनट में एक दुल्हन की जान जा रही है। हर 100000 महिलाओं की मौत में 1.4 मौत दहेज की वजह से होती है।

सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि लोग दहेज लेना और देना दोनों बंद कर दें लेकिन चोरी छिपे दहेज का खेल जारी है।

दहेज के खिलाफ भारतीय कानून (दहेज निषेध नियम 1961) कई सालों से भारत में लगातार है। लेकिन इस कानून से दहेज की रोक पर कोई असर नहीं हुआ है और लगातार इसकी आलोचना भी हुई है।

मंजुला के पिता ने एक बेहद जरूरी मुद्दा उठाया है कि समय आ गया है कि हम बात करें और इस पर खुलकर चर्चा करें। अगर आप असफल शादी में हैं या किसी को जानते हैं तो उन्हें मनाएं और राजी करें कि वो इससे बाहर निकलें और समाज के नियम कानून से ना डरें।

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Source: theindusparent